अल-अनफाल · 14/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
ذَٰلِكُمْ فَذُوقُوهُ وَأَنَّ لِلْكَافِرِينَ عَذَابَ النَّارِ ۝١٤
Zaalikum fazooqoohu wa anna lilkaafireena `azaaban Naar
📖 हिंदी अर्थ
(काफिरों दुनिया में तो) लो फिर उस (सज़ा का चखो और (फिर आख़िर में तो) काफिरों के वास्ते जहन्नुम का अज़ाब ही है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذَٰلِكُمْ (ज़ालिकुम): यह वह (अज़ाब)।
  • فَذُوقُوهُ (फ़ज़ूक़ूहु): तो उसे चखो (उसका स्वाद चखो)।
  • وَأَنَّ لِلْكَافِرِينَ (व अन्ना लिल्काफ़िरीन): और यह कि काफ़िरों के लिए है।
  • عَذَابَ النَّارِ (अज़ाबान्नार): आग का अज़ाब।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह अज़ाब, जो तुम्हें दुनिया में पहुँचाया गया — चाहे वह बद्र के मैदान में हार और क़त्ल की शक्ल में हो या किसी और मुसीबत के रूप में — ऐ काफ़िरों! यह तुम्हारे कुफ़्र और अल्लाह तथा उसके रसूल की अवज्ञा का नतीजा है। इसलिए इस दुनियावी अज़ाब का स्वाद चखो, जो तुम्हारे लिए जल्दी भेजा गया। और यह भी जान लो कि अगर तुम अपने कुफ़्र और हठधर्मी पर मरते रहे, तो आख़िरत में तुम्हारे लिए आग का अज़ाब तैयार है, जो इस दुनियावी अज़ाब से कहीं अधिक सख्त और स्थायी है। यह अज़ाब उन सब काफ़िरों के लिए है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और उसके रसूल की नाफ़रमानी करते हैं। यहाँ अल्लाह ने काफ़िरों को सीधे संबोधित करते हुए उन्हें चेतावनी दी है कि दुनिया में मिलने वाली सज़ा तो मामूली है, असली और बड़ा अज़ाब आख़िरत में है।

फ़ायदे (लाभ और सबक):

  1. अल्लाह की सज़ा दुनिया में भी आ सकती है, और यह उसकी रहमत का एक पहलू है कि वह लोगों को आख़िरत के अज़ाब से पहले छोटी सज़ा देकर आगाह करता है, ताकि वे अपनी ग़लती से बाज़ आएँ।
  2. यह आयत मुसलमानों को सब्र और शुक्र का सबक सिखाती है कि जब वे दुश्मन पर फ़तह पाते हैं, तो यह अल्लाह की मदद से है, और काफ़िरों की हार में उनके लिए इबरत है।
  3. कुफ़्र और नाफ़रमानी का अंजाम बुरा है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी। इससे इंसान को अपने अमल की इस्लाह (सुधार) की तरफ़ राग़िब होना चाहिए।
  4. आख़िरत का अज़ाब दुनियावी अज़ाब से कहीं बड़ा और हमेशा रहने वाला है, इसलिए अक़्लमंद वही है जो इससे बचने की कोशिश करे और अल्लाह की रहमत का तालिब बने।
  5. इस आयत में काफ़िरों के लिए सख्त तहदीद (धमकी) है, जो मुसलमानों के दिलों को मज़बूती देती है कि वे अपने ईमान पर क़ायम रहें और अल्लाह के वादे पर भरोसा रखें।


📜 आयत 12-16 — सूरा अल-अनफाल

12إِذْ يُوحِي رَبُّكَ إِلَى الْمَلَائِكَةِ أَنِّي مَعَكُمْ فَثَبِّتُوا الَّذِينَ آمَنُوا ۚ سَأُلْقِي فِي قُلُوبِ الَّذِينَ كَفَرُوا الرُّعْبَ فَاضْرِبُوا فَوْقَ الْأَعْنَاقِ وَاضْرِبُوا مِنْهُمْ كُلَّ بَنَانٍ
(ऐ रसूल ये वह वक्त था) जब तुम्हारा परवरदिगार फ़रिश्तों से फरमा रहा था कि मै यकीनन तुम्हारे साथ हूँ तुम ईमानदारों को साबित क़दम रखो मै बहुत जल्द काफिरों के दिलों में (तुम्हारा रौब) डाल दूँगा (पस फिर क्या है अब) तो उन कुफ्फार की गर्दनों पर मारो और उनकी पोर पोर को चटिया कर दो
13ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَاقُّوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَمَن يُشَاقِقِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَإِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
ये (सज़ा) इसलिए है कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालिफ की और जो शख़्स (भी) ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालफ़त करेगा तो (याद रहें कि) ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है
14ذَٰلِكُمْ فَذُوقُوهُ وَأَنَّ لِلْكَافِرِينَ عَذَابَ النَّارِ
(काफिरों दुनिया में तो) लो फिर उस (सज़ा का चखो और (फिर आख़िर में तो) काफिरों के वास्ते जहन्नुम का अज़ाब ही है
15يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا لَقِيتُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا زَحْفًا فَلَا تُوَلُّوهُمُ الْأَدْبَارَ
ऐ ईमानदारों जब तुमसे कुफ्फ़ार से मैदाने जंग में मुक़ाबला हुआ तो (ख़बरदार) उनकी तरफ पीठ न करना
16وَمَن يُوَلِّهِمْ يَوْمَئِذٍ دُبُرَهُ إِلَّا مُتَحَرِّفًا لِّقِتَالٍ أَوْ مُتَحَيِّزًا إِلَىٰ فِئَةٍ فَقَدْ بَاءَ بِغَضَبٍ مِّنَ اللَّهِ وَمَأْوَاهُ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
(याद रहे कि) उस शख़्स के सिवा जो लड़ाई वास्ते कतराए या किसी जमाअत के पास (जाकर) मौके पाए (और) जो शख़्स भी उस दिन उन कुफ्फ़ार की तरफ पीठ फेरेगा वह यक़ीनी (हिर फिर के) ख़ुदा के ग़जब में आ गया और उसका ठिकाना जहन्नुम ही हैं और वह क्या बुरा ठिकाना है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
14आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 14

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Thursday, October 1, 2026

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