अल-अनफाल · 13/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَاقُّوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَمَن يُشَاقِقِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَإِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ ۝١٣
Zaalika bi annahum shaaaqqul laaha wa Rasoolah; wa mai yushaqiqil laaha wa Rasoolahoo fa innal laaha shadeedul `iqaab
📖 हिंदी अर्थ
ये (सज़ा) इसलिए है कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालिफ की और जो शख़्स (भी) ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालफ़त करेगा तो (याद रहें कि) ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شَاقُّوا: विरोध किया, खिलाफ़ किया, अलग रास्ता अपनाया।
  • يُشَاقِق: जो कोई विरोध करे, खिलाफ़ चले।

व्याख्या:

यह अज़ाब जो कुफ्फ़ार पर आया—उनके सिर, गर्दन और अंगों पर वार किया गया—यह इसलिए था क्योंकि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) का विरोध किया और उनके आदेशों की अवहेलना की। उन्होंने न तो उन आदेशों का पालन किया जो उन्हें दिए गए और न ही उन निषेधों से रुके जिनसे उन्हें रोका गया। उन्होंने अल्लाह के दीन से अलग रास्ता अपनाया और उसका मुक़ाबला किया।

फिर अल्लाह तआला ने चेतावनी दी कि जो कोई भी अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) का विरोध करेगा और उनके हुक्मों के खिलाफ़ चलेगा, तो अल्लाह उसे दुनिया में क़त्ल, क़ैद और अपमान के रूप में सज़ा देगा, और आख़िरत में उसके लिए जहन्नुम की आग तैयार है। अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है और उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) का विरोध करना सबसे बड़ा गुनाह है, और इसका अंजाम दुनिया और आख़िरत दोनों में बुरा है।
  2. अल्लाह की सज़ा से डरना चाहिए, क्योंकि वह बहुत सख्त अज़ाब देने वाला है।
  3. इस आयत से हमें सबक मिलता है कि हमेशा अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) के आदेशों का पालन करना चाहिए और उनकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए।
  4. यह आयत मुसलमानों को सब्र और इस्तिक़ामत पर क़ायम रहने की तरग़ीब देती है, क्योंकि अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उनके दुश्मनों को सज़ा देता है।


📜 आयत 11-15 — अल-अनफाल

11إِذْ يُغَشِّيكُمُ النُّعَاسَ أَمَنَةً مِّنْهُ وَيُنَزِّلُ عَلَيْكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً لِّيُطَهِّرَكُم بِهِ وَيُذْهِبَ عَنكُمْ رِجْزَ الشَّيْطَانِ وَلِيَرْبِطَ عَلَىٰ قُلُوبِكُمْ وَيُثَبِّتَ بِهِ الْأَقْدَامَ
ये वह वक्त था जब अपनी तरफ से इत्मिनान देने के लिए तुम पर नींद को ग़ालिब कर रहा था और तुम पर आसमान से पानी बरस रहा था ताकि उससे तुम्हें पाक (पाकीज़ा कर दे और तुम से शैतान की गन्दगी दूर कर दे और तुम्हारे दिल मज़बूत कर दे और पानी से (बालू जम जाए) और तुम्हारे क़दम ब क़दम (अच्छी तरह) जमाए रहे
12إِذْ يُوحِي رَبُّكَ إِلَى الْمَلَائِكَةِ أَنِّي مَعَكُمْ فَثَبِّتُوا الَّذِينَ آمَنُوا ۚ سَأُلْقِي فِي قُلُوبِ الَّذِينَ كَفَرُوا الرُّعْبَ فَاضْرِبُوا فَوْقَ الْأَعْنَاقِ وَاضْرِبُوا مِنْهُمْ كُلَّ بَنَانٍ
(ऐ रसूल ये वह वक्त था) जब तुम्हारा परवरदिगार फ़रिश्तों से फरमा रहा था कि मै यकीनन तुम्हारे साथ हूँ तुम ईमानदारों को साबित क़दम रखो मै बहुत जल्द काफिरों के दिलों में (तुम्हारा रौब) डाल दूँगा (पस फिर क्या है अब) तो उन कुफ्फार की गर्दनों पर मारो और उनकी पोर पोर को चटिया कर दो
13ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ شَاقُّوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ وَمَن يُشَاقِقِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَإِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ
ये (सज़ा) इसलिए है कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालिफ की और जो शख़्स (भी) ख़ुदा और उसके रसूल की मुख़ालफ़त करेगा तो (याद रहें कि) ख़ुदा बड़ा सख्त अज़ाब करने वाला है
14ذَٰلِكُمْ فَذُوقُوهُ وَأَنَّ لِلْكَافِرِينَ عَذَابَ النَّارِ
(काफिरों दुनिया में तो) लो फिर उस (सज़ा का चखो और (फिर आख़िर में तो) काफिरों के वास्ते जहन्नुम का अज़ाब ही है
15يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا لَقِيتُمُ الَّذِينَ كَفَرُوا زَحْفًا فَلَا تُوَلُّوهُمُ الْأَدْبَارَ
ऐ ईमानदारों जब तुमसे कुफ्फ़ार से मैदाने जंग में मुक़ाबला हुआ तो (ख़बरदार) उनकी तरफ पीठ न करना
अल-अनफालकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अनफाल 13

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Tuesday, August 18, 2026

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