अल-बुरूज · 11/22
अनुवाद उच्चारण — अल-बुरूज
إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْكَبِيرُ ۝١١
Innal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati lahum Jannaatun tajree min tahtihal anhaar; zaalikal fawzul kabeer
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे उनके लिए वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं यही तो बड़ी कामयाबी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آمَنُوا: ईमान लाए, अल्लाह और उसके रसूल को सच्चे दिल से माना।
  • الصَّالِحَاتِ: अच्छे और नेक काम, जो अल्लाह को पसंद हों और शरीयत के अनुसार हों।
  • جَنَّاتٌ: बाग़, जन्नत के बाग़।
  • تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ: जिनके नीचे नहरें बहती हैं।
  • الْفَوْزُ الْكَبِيرُ: बड़ी कामयाबी, सबसे बड़ी सफलता।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने ईमानवाले बंदों को खुशखबरी दे रहा है। जिन लोगों ने अल्लाह पर ईमान लाया और अपने ईमान को सिर्फ ज़ुबान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने अमल से साबित किया—यानी नेक काम किए, अच्छे आचरण अपनाए, अल्लाह के हुक्मों पर चले और उसकी मनाही से बचे—उनके लिए जन्नत के बाग़ हैं। ऐसे बाग़ जिनके महलों और दरख्तों के नीचे नहरें बहती हैं। यह वह जगह है जहाँ हर तरह की खुशी, सुकून और आराम होगा, जहाँ कोई दुख, थकान या चिंता नहीं होगी।

यही असली कामयाबी है—वह कामयाबी जो दुनिया की किसी भी कामयाबी से बड़ी है। दुनिया की दौलत, शोहरत, ताकत—ये सब चीज़ें फानी (नाशवान) हैं और इनमें कोई असली सुकून नहीं। लेकिन जन्नत की कामयाबी वह है जो हमेशा रहेगी, कभी खत्म नहीं होगी। अल्लाह ने इसे "फ़ौज़ुल-कबीर" (बड़ी कामयाबी) कहा, क्योंकि इसके आगे दुनिया की हर चीज़ छोटी और बेहद कमज़ोर है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का रास्ता बिल्कुल साफ़ है—ईमान और अमल-ए-सालिह। अगर हम सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान लाएँ और अपने कामों को उसकी पसंद के मुताबिक बनाएँ, तो हमारे लिए वह जगह तैयार है जिसकी कोई उपमा नहीं। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता। तो आइए, हम अपनी ज़िंदगी को इसी दिशा में लगाएँ—ईमान को मज़बूत करें और नेक कामों में जुट जाएँ, ताकि हम भी उस बड़ी कामयाबी को पा सकें। यही हमारी असली कामयाबी है, और इसी के लिए हमें दुनिया में भेजा गया है।



📜 आयत 9-13 — अल-बुरूज

9الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
वह (ख़ुदा) जिसकी सारे आसमान ज़मीन में बादशाहत है और ख़ुदा हर चीज़ से वाक़िफ़ है
10إِنَّ الَّذِينَ فَتَنُوا الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَتُوبُوا فَلَهُمْ عَذَابُ جَهَنَّمَ وَلَهُمْ عَذَابُ الْحَرِيقِ
बेशक जिन लोगों ने ईमानदार मर्दों और औरतों को तकलीफें दीं फिर तौबा न की उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब तो है ही (इसके अलावा) जलने का भी अज़ाब होगा
11إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْكَبِيرُ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे उनके लिए वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं यही तो बड़ी कामयाबी है
12إِنَّ بَطْشَ رَبِّكَ لَشَدِيدٌ
बेशक तुम्हारे परवरदिगार की पकड़ बहुत सख्त है
13إِنَّهُ هُوَ يُبْدِئُ وَيُعِيدُ
वही पहली दफ़ा पैदा करता है और वही दोबारा (क़यामत में ज़िन्दा) करेगा
अल-बुरूजकुरान सूची
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11आयत

अनुवाद — अल-बुरूज 11

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Tuesday, August 18, 2026

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