Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَتَنُوا: अर्थात अत्याचार किया, यातना दी, आग में जलाया, और धर्म से बहकाने की कोशिश की।
- الْحَرِيقِ: अर्थात जलाने वाली आग, वह आग जो शरीर को जला दे।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन अत्याचारियों के भयानक अंजाम को बयान करती है जिन्होंने अल्लाह के नेक बंदों को उनके ईमान की वजह से तकलीफ़ दी। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने मोमिन पुरुषों और मोमिन महिलाओं को आग में जलाकर अत्याचार किया, उन्हें धर्म से फेरने के लिए तरह-तरह की यातनाएँ दीं, और फिर इस कुकर्म के बाद उन्होंने तौबा नहीं की, अपनी गलती पर पछतावा नहीं किया और अल्लाह की ओर वापस नहीं लौटे—तो उनके लिए दोहरी सज़ा है।
पहली सज़ा: उनके कुफ्र और अत्याचार की वजह से जहन्नम की आग, जिसमें वे हमेशा रहेंगे। दूसरी सज़ा: जलाने वाली आग का अज़ाब, यानी वह आग जो उनके शरीर को बार-बार जलाएगी और उन्हें भयंकर तकलीफ़ देगी। यह उसी का बदला है जो उन्होंने दुनिया में मोमिनों के साथ किया—उन्हें आग में जलाया, तो अल्लाह उन्हें भी आग में जलाकर सज़ा देगा। यह अल्लाह का न्याय है, जो बिल्कुल सटीक और पूर्ण है।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला अत्याचारियों को देख रहा है और उनकी हर करतूत का हिसाब रख रहा है। भले ही वे दुनिया में अपनी ताकत और सत्ता पर इतराएँ, लेकिन अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। साथ ही, यह आयत मोमिनों के लिए सब्र और इस्तिक़ामत की तरग़ीब देती है कि अल्लाह की राह में तकलीफ़ उठाना कोई ज़ाया नहीं जाता—बल्कि अल्लाह उनके सब्र का बदला जन्नत में देगा, और अत्याचारियों को उनकी सज़ा ज़रूर मिलेगी।
और देखिए, अल्लाह ने यहाँ तौबा का दरवाज़ा भी खुला रखा है—जो लोग अत्याचार करने के बाद तौबा कर लें, अल्लाह उन्हें माफ़ कर सकता है। लेकिन जो लोग अपनी ज़िद और कुफ्र पर अड़े रहे और तौबा नहीं किया, उनके लिए अज़ाब ही है। यह अल्लाह की रहमत और अद्ल दोनों का इज़हार है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की राह पर चलें, मुश्किलों में सब्र करें, और कभी भी अत्याचार का रास्ता न अपनाएँ—क्योंकि अल्लाह की सज़ा बहुत सख्त है, और उसका फैसला कभी गलत नहीं होता।
📜 आयत 8-12 — सूरा अल-बुरूज
अनुवाद — अल-बुरूज 10
सूरा अल-बुरूज आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिन लोगों ने ईमानदार मर्दों और औरतों को तकलीफें…सूरा आयत 10/22 — सूरा अल-बुरूज البروج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बुरूज सुनें, सूरा अल-बुरूज अनुवाद, सूरा अल-बुरूज mp3, सूरा अल-बुरूज pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-बुरूज
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


