Infiroo khifaafanw wa siqaalanw wa jaahidoo bi amwaalikum wa anfusikum fee sabeelil laah; zaalikum khairul lakum in kuntum ta`lamoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(मुसलमानों) तुम हलके फुलके (हॅसते) हो या भारी भरकम (मसलह) बहर हाल जब तुमको हुक्म दिया जाए फौरन चल खड़े हो और अपनी जानों से अपने मालों से ख़ुदा की राह में जिहाद करो अगर तुम (कुछ जानते हो तो) समझ लो कि यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
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🌐 اردو
تم سبکبار ہو یا گراں بار (یعنی مال و اسباب تھوڑا رکھتے ہو یا بہت، گھروں سے) نکل آؤ۔ اور خدا کے رستے میں مال اور جان سے لڑو۔ یہی تمہارے حق میں اچھا ہے بشرطیکہ سمجھو
(मुसलमानों) तुम हलके फुलके (हॅसते) हो या भारी भरकम (मसलह) बहर हाल जब तुमको हुक्म दिया जाए फौरन चल खड़े हो और अपनी जानों से अपने मालों से ख़ुदा की राह में जिहाद करो अगर तुम (कुछ जानते हो तो) समझ लो कि यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
انْفِرُوا: निकलो, जिहाद के लिए तैयार होकर चलो।
خِفَافًا وَثِقَالًا: हल्के हालत में (जब जाना आसान हो) और भारी हालत में (जब जाना कठिन हो), यानी हर हालत में।
جَاهِدُوا: पूरी कोशिश और संघर्ष करो।
بِأَمْوَالِكُمْ وَأَنفُسِكُمْ: अपने धन और अपनी जान से।
فِي سَبِيلِ اللهِ: अल्लाह के रास्ते में।
ذَلِكُمْ خَيْرٌ لَكُمْ: यही तुम्हारे लिए बेहतर है।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों को हुक्म देता है कि वे उसके रास्ते में जिहाद के लिए निकलें—चाहे वे हल्के हालत में हों (जैसे जवान, तंदुरुस्त, आसानी के समय) या भारी हालत में (जैसे बूढ़े, कमज़ोर, मुश्किल और तंगी के समय)। यानी किसी भी परिस्थिति में जिहाद से पीछे न हटें। साथ ही अल्लाह उन्हें आदेश देता है कि वे अपने माल और अपनी जान से अल्लाह के रास्ते में संघर्ष करें, ताकि अल्लाह का कलाम (दीन) बुलंद हो और उसका दीन पूरी दुनिया में फैले।
यह निकलना और अपने माल-जान से जिहाद करना, दुनिया और आख़िरत दोनों में तुम्हारे लिए बेहतर है—इससे घर बैठे रहने और अपने माल-जान की सलामती की फिक्र में लगे रहने से कहीं ज़्यादा फायदेमंद है। अगर तुम समझदार हो और इसकी हकीकत को जानते हो, तो इसी पर अमल करो और इसी को अपनाओ। यह हुक्म उस वक्त दिया गया जब मुसलमानों को ग़ज़वा-ए-तबूक के लिए तैयार होने का आदेश था, और यह इस बात की ताकीद है कि जिहाद में किसी भी तरह की काहिली या आलस नहीं होनी चाहिए।
फायदे और सबक:
जिहाद (अल्लाह के रास्ते में संघर्ष) हर हालत में वाजिब है—चाहे हालात आसान हों या मुश्किल, चाहे इंसान जवान हो या बूढ़ा। यह ईमान की कसौटी है कि इंसान अपनी सुविधा और आराम की परवाह किए बिना अल्लाह के हुक्म पर चले।
अल्लाह के रास्ते में माल और जान दोनों कुर्बान करने की तालीम दी गई है। यह सिखाता है कि सिर्फ ज़बान से ईमान का दावा काफी नहीं, बल्कि अपने धन और अपनी जान से अल्लाह के दीन की मदद करनी चाहिए।
इस आयत से मुसलमानों को यह प्यारा सबक मिलता है कि दुनिया की आसानी और आराम की ज़िंदगी से बढ़कर अल्लाह की राह में जान-माल खर्च करना ही असली कामयाबी है। यही इंसान को दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में जन्नत तक पहुंचाता है।
अल्लाह ने यहां "अगर तुम जानते हो" कहकर बताया कि जो लोग दुनिया और आख़िरत की भलाई को समझते हैं, वे कभी जिहाद से पीछे नहीं हटते। यह हमें इल्म और समझ की अहमियत सिखाता है कि सही समझ इंसान को अच्छे अमल की तरफ ले जाती है।
यह आयत मुसलमानों में जोश और हिम्मत पैदा करती है कि वे अपने दीन की खिदमत के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार रहें, क्योंकि अल्लाह का वादा है कि जो उसके रास्ते में खर्च करता है, अल्लाह उसे बेहतर बदला देता है।
अगर (अब भी) तुम न निकलोगे तो ख़ुदा तुम पर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और (ख़ुदा कुछ मजबरू तो है नहीं) तुम्हारे बदले किसी दूसरी क़ौम को ले आएगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
अगर तुम उस रसूल की मदद न करोगे तो (कुछ परवाह् नहीं ख़ुदा मददगार है) उसने तो अपने रसूल की उस वक्त मदद की जब उसकी कुफ्फ़ार (मक्का) ने (घर से) निकल बाहर किया उस वक्त सिर्फ (दो आदमी थे) दूसरे रसूल थे जब वह दोनो ग़ार (सौर) में थे जब अपने साथी को (उसकी गिरिया व ज़ारी (रोने) पर) समझा रहे थे कि घबराओ नहीं ख़ुदा यक़ीनन हमारे साथ है तो ख़ुदा ने उन पर अपनी (तरफ से) तसकीन नाज़िल फरमाई और (फ़रिश्तों के) ऐसे लश्कर से उनकी मदद की जिनको तुम लोगों ने देखा तक नहीं और ख़ुदा ने काफिरों की बात नीची कर दिखाई और ख़ुदा ही का बोल बाला है और ख़ुदा तो ग़ालिब हिकमत वाला है
(मुसलमानों) तुम हलके फुलके (हॅसते) हो या भारी भरकम (मसलह) बहर हाल जब तुमको हुक्म दिया जाए फौरन चल खड़े हो और अपनी जानों से अपने मालों से ख़ुदा की राह में जिहाद करो अगर तुम (कुछ जानते हो तो) समझ लो कि यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
(ऐ रसूल) अगर सरे दस्त फ़ायदा और सफर आसान होता तो यक़ीनन ये लोग तुम्हारा साथ देते मगर इन पर मुसाफ़त (सफ़र) की मशक़क़त (सख्ती) तूलानी हो गई और अगर पीछे रह जाने की वज़ह से पूछोगे तो ये लोग फौरन ख़ुदा की क़समें खॉएगें कि अगर हम में सकत होती तो हम भी ज़रूर तुम लोगों के साथ ही चल खड़े होते ये लोग झूठी कसमें खाकर अपनी जान आप हलाक किए डालते हैं और ख़ुदा तो जानता है कि ये लोग बेशक झूठे हैं
(ऐ रसूल) ख़ुदा तुमसे दरगुज़र फरमाए तुमने उन्हें (पीछे रह जाने की) इजाज़त ही क्यों दी ताकि (तुम) अगर ऐसा न करते तो) तुम पर सच बोलने वाले (अलग) ज़ाहिर हो जाते और तुम झूटों को (अलग) मालूम कर लेते
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