अत-तौबा · 40/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
إِلَّا تَنصُرُوهُ فَقَدْ نَصَرَهُ اللَّهُ إِذْ أَخْرَجَهُ الَّذِينَ كَفَرُوا ثَانِيَ اثْنَيْنِ إِذْ هُمَا فِي الْغَارِ إِذْ يَقُولُ لِصَاحِبِهِ لَا تَحْزَنْ إِنَّ اللَّهَ مَعَنَا ۖ فَأَنزَلَ اللَّهُ سَكِينَتَهُ عَلَيْهِ وَأَيَّدَهُ بِجُنُودٍ لَّمْ تَرَوْهَا وَجَعَلَ كَلِمَةَ الَّذِينَ كَفَرُوا السُّفْلَىٰ ۗ وَكَلِمَةُ اللَّهِ هِيَ الْعُلْيَا ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ ۝٤٠
Illaa tansuroohu faqad nasarahul laahu iz akhrajahul lazeena kafaroo saaniyasnaini iz humaa filghaari iz yaqoolu lisaahibihee la tahzan innnal laaha ma`anaa fa anzalallaahu sakeenatahoo `alaihi wa aiyadahoo bijunoodil lam tarawhaa wa ja`ala kalimatal lazeena kafarus suflaa; wa Kalimatul laahi hiyal `ulyaa; wallaahu `Azeezun Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
अगर तुम उस रसूल की मदद न करोगे तो (कुछ परवाह् नहीं ख़ुदा मददगार है) उसने तो अपने रसूल की उस वक्त मदद की जब उसकी कुफ्फ़ार (मक्का) ने (घर से) निकल बाहर किया उस वक्त सिर्फ (दो आदमी थे) दूसरे रसूल थे जब वह दोनो ग़ार (सौर) में थे जब अपने साथी को (उसकी गिरिया व ज़ारी (रोने) पर) समझा रहे थे कि घबराओ नहीं ख़ुदा यक़ीनन हमारे साथ है तो ख़ुदा ने उन पर अपनी (तरफ से) तसकीन नाज़िल फरमाई और (फ़रिश्तों के) ऐसे लश्कर से उनकी मदद की जिनको तुम लोगों ने देखा तक नहीं और ख़ुदा ने काफिरों की बात नीची कर दिखाई और ख़ुदा ही का बोल बाला है और ख़ुदा तो ग़ालिब हिकमत वाला है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثَانِيَ اثْنَيْنِ: दो में से दूसरा, अर्थात् दो व्यक्तियों में से एक।
  • الْغَارِ: पहाड़ की गुफा (यहाँ अर्थ है 'ग़ारे सौर' जो मक्का के पास जबल सौर पर है)।
  • السَّكِينَةَ: मन की शांति, सुकून और इत्मिनान।
  • أَيَّدَهُ: उसे शक्ति प्रदान की, उसकी सहायता की।
  • السُّفْلَى: नीची, अपमानित और पराजित।
  • الْعُلْيَا: ऊँची, प्रभावशाली और विजयी।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे ईमानवालों! यदि तुम रसूलुल्लाह ﷺ की सहायता नहीं करोगे और जब वे तुम्हें जिहाद के लिए बुलाएँ तो उनके साथ नहीं निकलोगे, तो इससे अल्लाह को कोई हानि नहीं पहुँचेगी, क्योंकि अल्लाह ने स्वयं उनकी सहायता की है। जब काफ़िरों ने उन्हें मक्का से निकाला, और वे दो व्यक्तियों में से दूसरे थे—अर्थात् वे और उनके साथी अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) थे। दोनों ग़ारे सौर (गुफा) में छिपे हुए थे, और काफ़िर उनकी तलाश में इधर-उधर भटक रहे थे। उस समय रसूलुल्लाह ﷺ ने अपने साथी अबू बक्र से कहा, जब उन्होंने दुश्मनों के पास पहुँचने का डर देखा: "उदास मत हो, अल्लाह हमारे साथ है"—अर्थात् अल्लाह हमारी रक्षा और सहायता कर रहा है।

तब अल्लाह ने अपनी ओर से अपने रसूल के हृदय पर सुकून और शांति उतारी, और उन्हें ऐसी सेनाओं से समर्थन दिया जिन्हें तुम नहीं देख सकते थे—वे फ़रिश्ते थे। इन फ़रिश्तों ने काफ़िरों के दिलों में भय डाला और उन्हें गुफा के मुँह से दूर कर दिया। इस प्रकार अल्लाह ने अपने नबी को शत्रुओं से बचा लिया। फिर अल्लाह ने काफ़िरों की बात (उनका शिर्क और बुरे इरादे) को नीचा और अपमानित किया, और अपनी बात (तौहीद और ईमान) को ऊँचा और विजयी बनाया। अल्लाह सर्वशक्तिमान है, अपनी इच्छा में कोई उसे पराजित नहीं कर सकता, और वह अपने बंदों के मामलों में पूर्ण ज्ञान और तदबीर (योजना) वाला है।


फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की सहायता का भरोसा: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नबी और अपने दीन की सहायता स्वयं करता है। जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, तो अल्लाह उसे ऐसे रास्तों से मदद देता है जिनकी उसे कल्पना भी नहीं होती।
  2. अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) की फ़ज़ीलत: इस आयत में अबू बक्र सिद्दीक़ की महानता का प्रमाण है कि वे रसूलुल्लाह ﷺ के साथी थे और उन्होंने उस कठिन घड़ी में साथ दिया। यह हमें सिखाता है कि सच्चे साथी वे होते हैं जो मुसीबत में साथ निभाते हैं।
  3. अल्लाह पर भरोसा और धैर्य: जब रसूलुल्लाह ﷺ ने अबू बक्र से कहा "अल्लाह हमारे साथ है", तो यह हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और घबराना नहीं चाहिए। अल्लाह की मदद ईमानवालों के साथ है।
  4. सच्चाई की विजय: यह आयत हमें बताती है कि अंततः सत्य की ही विजय होती है और असत्य का पतन निश्चित है। चाहे कितनी भी बड़ी ताकतें झूठ के साथ हों, अल्लाह सत्य को ऊँचा करता है।
  5. अल्लाह की क़ुदरत: अल्लाह ने बिना किसी दृश्य सेना के अपने नबी की मदद की। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह की ताकत असीमित है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। उसकी मदद के आगे कोई ताकत टिक नहीं सकती।
🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — अत-तौबा

38يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا مَا لَكُمْ إِذَا قِيلَ لَكُمُ انفِرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ اثَّاقَلْتُمْ إِلَى الْأَرْضِ ۚ أَرَضِيتُم بِالْحَيَاةِ الدُّنْيَا مِنَ الْآخِرَةِ ۚ فَمَا مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا فِي الْآخِرَةِ إِلَّا قَلِيلٌ
ऐ ईमानदारों तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि ख़ुदा की राह में (जिहाद के लिए) निकलो तो तुम लदधड़ (ढीले) हो कर ज़मीन की तरफ झुके पड़ते हो क्या तुम आख़िरत के बनिस्बत दुनिया की (चन्द रोज़ा) जिन्दगी को पसन्द करते थे तो (समझ लो कि) दुनिया की ज़िन्दगी का साज़ो सामान (आख़िर के) ऐश व आराम के मुक़ाबले में बहुत ही थोड़ा है
39إِلَّا تَنفِرُوا يُعَذِّبْكُمْ عَذَابًا أَلِيمًا وَيَسْتَبْدِلْ قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّوهُ شَيْئًا ۗ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
अगर (अब भी) तुम न निकलोगे तो ख़ुदा तुम पर दर्दनाक अज़ाब नाज़िल फरमाएगा और (ख़ुदा कुछ मजबरू तो है नहीं) तुम्हारे बदले किसी दूसरी क़ौम को ले आएगा और तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकते और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
40إِلَّا تَنصُرُوهُ فَقَدْ نَصَرَهُ اللَّهُ إِذْ أَخْرَجَهُ الَّذِينَ كَفَرُوا ثَانِيَ اثْنَيْنِ إِذْ هُمَا فِي الْغَارِ إِذْ يَقُولُ لِصَاحِبِهِ لَا تَحْزَنْ إِنَّ اللَّهَ مَعَنَا ۖ فَأَنزَلَ اللَّهُ سَكِينَتَهُ عَلَيْهِ وَأَيَّدَهُ بِجُنُودٍ لَّمْ تَرَوْهَا وَجَعَلَ كَلِمَةَ الَّذِينَ كَفَرُوا السُّفْلَىٰ ۗ وَكَلِمَةُ اللَّهِ هِيَ الْعُلْيَا ۗ وَاللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
अगर तुम उस रसूल की मदद न करोगे तो (कुछ परवाह् नहीं ख़ुदा मददगार है) उसने तो अपने रसूल की उस वक्त मदद की जब उसकी कुफ्फ़ार (मक्का) ने (घर से) निकल बाहर किया उस वक्त सिर्फ (दो आदमी थे) दूसरे रसूल थे जब वह दोनो ग़ार (सौर) में थे जब अपने साथी को (उसकी गिरिया व ज़ारी (रोने) पर) समझा रहे थे कि घबराओ नहीं ख़ुदा यक़ीनन हमारे साथ है तो ख़ुदा ने उन पर अपनी (तरफ से) तसकीन नाज़िल फरमाई और (फ़रिश्तों के) ऐसे लश्कर से उनकी मदद की जिनको तुम लोगों ने देखा तक नहीं और ख़ुदा ने काफिरों की बात नीची कर दिखाई और ख़ुदा ही का बोल बाला है और ख़ुदा तो ग़ालिब हिकमत वाला है
41انفِرُوا خِفَافًا وَثِقَالًا وَجَاهِدُوا بِأَمْوَالِكُمْ وَأَنفُسِكُمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
(मुसलमानों) तुम हलके फुलके (हॅसते) हो या भारी भरकम (मसलह) बहर हाल जब तुमको हुक्म दिया जाए फौरन चल खड़े हो और अपनी जानों से अपने मालों से ख़ुदा की राह में जिहाद करो अगर तुम (कुछ जानते हो तो) समझ लो कि यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
42لَوْ كَانَ عَرَضًا قَرِيبًا وَسَفَرًا قَاصِدًا لَّاتَّبَعُوكَ وَلَٰكِن بَعُدَتْ عَلَيْهِمُ الشُّقَّةُ ۚ وَسَيَحْلِفُونَ بِاللَّهِ لَوِ اسْتَطَعْنَا لَخَرَجْنَا مَعَكُمْ يُهْلِكُونَ أَنفُسَهُمْ وَاللَّهُ يَعْلَمُ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
(ऐ रसूल) अगर सरे दस्त फ़ायदा और सफर आसान होता तो यक़ीनन ये लोग तुम्हारा साथ देते मगर इन पर मुसाफ़त (सफ़र) की मशक़क़त (सख्ती) तूलानी हो गई और अगर पीछे रह जाने की वज़ह से पूछोगे तो ये लोग फौरन ख़ुदा की क़समें खॉएगें कि अगर हम में सकत होती तो हम भी ज़रूर तुम लोगों के साथ ही चल खड़े होते ये लोग झूठी कसमें खाकर अपनी जान आप हलाक किए डालते हैं और ख़ुदा तो जानता है कि ये लोग बेशक झूठे हैं
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीRevelation
40आयत

अनुवाद — अत-तौबा 40

सूरा अत-तौबा आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर तुम उस रसूल की मदद न करोगे तो (कुछ…

सूरा आयत 40/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए