अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عُقْبَاهَا (उक़्बाहा): इसका अर्थ है उसका अंजाम, परिणाम या बुरा नतीजा। यहाँ इससे अभिप्राय उस सज़ा और अज़ाब का अंजाम है जो अल्लाह ने समूद की क़ौम पर नाज़िल किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब समूद की क़ौम ने अपनी सारी हदें पार कर दीं, अपने नबी सालिह अलैहिस्सलाम को झुठलाया और अल्लाह की भेजी हुई नाक़ा (ऊँटनी) को काट डाला, तो अल्लाह तआला ने उन पर अपना कठोर अज़ाब नाज़िल किया। उन्होंने जो कुछ भी किया था, उसका बुरा परिणाम उन्होंने भुगता और उनमें से कोई भी बच न सका।
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह अपने इस अज़ाब के अंजाम से नहीं डरता। यानी जब अल्लाह किसी ज़ालिम क़ौम को सज़ा देता है, तो उसे किसी के तरफ़ से कोई डर नहीं होता, न उस पर कोई आरोप लगा सकता है, न उसे किसी की परवाह है। वह अपनी हिकमत और अदालत के मुताबिक़ जो चाहता है करता है, और उसके फ़ैसले पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।
यह अल्लाह की क़ुदरत और उसके इल्म की निशानी है कि वह अपने बंदों के साथ जो सलूक करता है, वह पूरी तरह अदल और हिकमत पर आधारित है। उसे किसी की नाराज़गी का डर नहीं, क्योंकि वह सबसे बड़ा, सबसे ताक़तवर और सबसे ज़्यादा जानने वाला है।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह तआला की पकड़ बहुत सख्त है। जब वह किसी ज़ालिम को सज़ा देने का फ़ैसला कर लेता है, तो कोई उसे रोक नहीं सकता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करें, उसके नबियों की बात मानें और उन लोगों के अंजाम से सबक हासिल करें जिन्होंने अल्लाह के दीन को झुठलाया। यह आयत हमें अल्लाह का खौफ दिलाती है और साथ ही यह बताती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों पर रहमत और कृपा करता है, लेकिन सरकशों और नाफ़रमानों के लिए उसका अज़ाब बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इताअत को अपनाएँ और उसकी नाराज़गी से बचें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
📜 आयत 13-15 — अश-शम्स
अनुवाद — अश-शम्स 15
सूरा अश-शम्स आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसको उनके बदले का कोई ख़ौफ तो है नहींसूरा आयत 15/15 — अश-शम्स الشمس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शम्स सुनें, अश-शम्स अनुवाद, अश-शम्स mp3, अश-शम्स pdf. आयत 13–15. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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