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सूरा अत-तीन

सूरा अल-अलक

सूरा अत-तीन

95:4
لَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ فِيٓ أَحۡسَنِ تَقۡوِيمٍ ٤
कि हमने इन्सान बहुत अच्छे कैड़े का पैदा किया
95:5
ثُمَّ رَدَدۡنَٰهُ أَسۡفَلَ سَٰفِلِينَ ٥
फिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया
95:6
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَلَهُمۡ أَجۡرٌ غَيۡرُ مَمۡنُونٍ ٦
मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है
95:7
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعۡدُ بِٱلدِّينِ ٧
तो (ऐ रसूल) इन दलीलों के बाद तुमको (रोज़े) जज़ा के बारे में कौन झुठला सकता है
सूरा अल-अलक

96:1
ٱقۡرَأۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلَّذِي خَلَقَ ١
(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया
96:5
عَلَّمَ ٱلۡإِنسَٰنَ مَا لَمۡ يَعۡلَمۡ ٥
उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था
96:11
أَرَءَيۡتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلۡهُدَىٰٓ ١١
भला देखो तो कि अगर ये राहे रास्त पर हो या परहेज़गारी का हुक्म करे
96:13
أَرَءَيۡتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ ١٣
भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा
96:14
أَلَمۡ يَعۡلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ ١٤
(तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है
96:15
كـَلَّا لَئِن لَّمۡ يَنتَهِ لَنَسۡفَعَۢا بِٱلنَّاصِيَةِ ١٥
देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे
96:19
كـَلَّا لَا تُطِعۡهُ وَٱسۡجُدۡۤ وَٱقۡتَرِب۩ ١٩
और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)
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पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 1, 2026
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