अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- كَذَّبَ: झुठलाया, असत्य कहा
- تَوَلَّىٰ: मुँह फेर लिया, अलग हो गया
व्याख्या:
हे नबी! क्या आपने उस व्यक्ति की हालत पर ग़ौर किया जो आपको सज्दे से रोकता है? यह वही शख्स है जो सत्य को झुठलाता है और उससे मुँह मोड़ लेता है। जब उसे सच्चाई पेश की गई तो उसने उसे नकार दिया और ईमान लाने से इनकार कर दिया। वह न केवल खुद हक़ से दूर रहा, बल्कि दूसरों को भी रोकता रहा।
क्या उसे यह नहीं मालूम कि अल्लाह तआला उसके हर अमल को देख रहा है? उसका झुठलाना और मुँह मोड़ना उसे अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकता। अल्लाह के इल्म से कोई चीज़ छिपी नहीं है—ना उसका झूठ, ना उसकी साज़िशें, ना उसका घमंड।
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो हक़ को सुनकर भी उसे नकार देते हैं और अहंकार के कारण ईमान से दूर भागते हैं। इंसान को चाहिए कि वह अपने रब की तरफ लौटे, उसकी इबादत करे और उसके करीब होने की कोशिश करे। जो लोग सत्य से मुँह मोड़ते हैं, वे अल्लाह की नज़र में बिल्कुल कमज़ोर हैं, चाहे वे दुनिया में कितनी भी ताकत क्यों न रखते हों।
इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि सच्चाई को कभी नकारना नहीं चाहिए और न ही उससे पीठ मोड़नी चाहिए। जो इंसान हक़ को कबूल कर लेता है और उस पर अमल करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है। और जो सत्य से दुश्मनी करता है, उसका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखने वाला है और उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता।
📜 आयत 11-15 — अल-अलक
अनुवाद — अल-अलक 13
सूरा अल-अलक आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया…सूरा आयत 13/19 — अल-अलक العلق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अलक सुनें, अल-अलक अनुवाद, अल-अलक mp3, अल-अलक pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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