अल-अलक · 17/19
अनुवाद उच्चारण — अल-अलक
فَلْيَدْعُ نَادِيَهُ ۝١٧
Fal yad`u naadiyah
📖 हिंदी अर्थ
तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नादी (नादीहु): अर्थात उसकी सभा, उसके साथी, उसका क़बीला या जिन लोगों से वह मदद लेता था। यह उस जगह को भी कहा जाता है जहाँ लोग इकट्ठा होते हैं और उन लोगों को भी जो वहाँ आते हैं।

तफ़सीर:

यह आयत उस सरकश और सिरफिरे इंसान (अबू जहल) के बारे में है, जो अल्लाह के नबी मुहम्मद ﷺ को नमाज़ पढ़ने से रोकता था। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उस सरकश को चाहिए कि वह अपनी सभा और अपने साथियों को बुला ले, जिन पर उसे नाज़ था और जिनके बल पर वह इतराता था। वह उन्हें अपनी मदद के लिए पुकारे, लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम भी अपने अज़ाब के फ़रिश्तों को बुला लेंगे। यानी उसकी ताक़त और उसके साथी उसे अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकते।

यह एक चुनौती है, जो अल्लाह की तरफ से उन सबको दी गई है जो हक़ के मुक़ाबले में अपनी जात, अपने क़बीले और अपनी दुनियावी ताक़त पर भरोसा करते हैं। अल्लाह फ़रमा रहा है कि अगर उसमें दम है तो वह अपने साथियों को बुला ले, हम भी अपने फ़रिश्तों को बुलाते हैं। यह बात साफ़ कर दी गई कि अल्लाह की ताक़त के आगे हर ताक़त बेकार है।

इस आयत में एक बड़ी दिलासा है नबी ﷺ और उनके साथियों के लिए कि दुश्मनों की भीड़ और उनकी साज़िशें कुछ भी नहीं कर सकतीं। अल्लाह अपने नबी की हिफ़ाज़त ख़ुद करता है। साथ ही यह भी सबक़ है कि इंसान को अपनी ताक़त, अपने रिश्तेदारों और अपनी सभा पर नाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह सब कुछ अल्लाह की मर्ज़ी के बिना किसी काम नहीं आ सकता।

याद रखिए, अल्लाह तआला ने इस आयत में उस इंसान की कमज़ोरी बयान की है जो दुनियावी सहारों पर इतराता है। हमें चाहिए कि हम अपना भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखें, क्योंकि वही सबसे बड़ा सहारा है। जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें हर मुश्किल से निकालता है और हमारे दुश्मनों को रुसवा करता है।



📜 आयत 15-19 — अल-अलक

15كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًا بِالنَّاصِيَةِ
देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे
16نَاصِيَةٍ كَاذِبَةٍ خَاطِئَةٍ
झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे
17فَلْيَدْعُ نَادِيَهُ
तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे
18سَنَدْعُ الزَّبَانِيَةَ
(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना
19كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَاسْجُدْ وَاقْتَرِب ۩
और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)
अल-अलककुरान सूची
19आयत
मक्कीRevelation
17आयत

अनुवाद — अल-अलक 17

सूरा अल-अलक आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद…

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Tuesday, August 18, 2026

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