अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नादी (नादीहु): अर्थात उसकी सभा, उसके साथी, उसका क़बीला या जिन लोगों से वह मदद लेता था। यह उस जगह को भी कहा जाता है जहाँ लोग इकट्ठा होते हैं और उन लोगों को भी जो वहाँ आते हैं।
तफ़सीर:
यह आयत उस सरकश और सिरफिरे इंसान (अबू जहल) के बारे में है, जो अल्लाह के नबी मुहम्मद ﷺ को नमाज़ पढ़ने से रोकता था। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उस सरकश को चाहिए कि वह अपनी सभा और अपने साथियों को बुला ले, जिन पर उसे नाज़ था और जिनके बल पर वह इतराता था। वह उन्हें अपनी मदद के लिए पुकारे, लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम भी अपने अज़ाब के फ़रिश्तों को बुला लेंगे। यानी उसकी ताक़त और उसके साथी उसे अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकते।
यह एक चुनौती है, जो अल्लाह की तरफ से उन सबको दी गई है जो हक़ के मुक़ाबले में अपनी जात, अपने क़बीले और अपनी दुनियावी ताक़त पर भरोसा करते हैं। अल्लाह फ़रमा रहा है कि अगर उसमें दम है तो वह अपने साथियों को बुला ले, हम भी अपने फ़रिश्तों को बुलाते हैं। यह बात साफ़ कर दी गई कि अल्लाह की ताक़त के आगे हर ताक़त बेकार है।
इस आयत में एक बड़ी दिलासा है नबी ﷺ और उनके साथियों के लिए कि दुश्मनों की भीड़ और उनकी साज़िशें कुछ भी नहीं कर सकतीं। अल्लाह अपने नबी की हिफ़ाज़त ख़ुद करता है। साथ ही यह भी सबक़ है कि इंसान को अपनी ताक़त, अपने रिश्तेदारों और अपनी सभा पर नाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह सब कुछ अल्लाह की मर्ज़ी के बिना किसी काम नहीं आ सकता।
याद रखिए, अल्लाह तआला ने इस आयत में उस इंसान की कमज़ोरी बयान की है जो दुनियावी सहारों पर इतराता है। हमें चाहिए कि हम अपना भरोसा सिर्फ़ अल्लाह पर रखें, क्योंकि वही सबसे बड़ा सहारा है। जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें हर मुश्किल से निकालता है और हमारे दुश्मनों को रुसवा करता है।
📜 आयत 15-19 — अल-अलक
अनुवाद — अल-अलक 17
सूरा अल-अलक आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद…सूरा आयत 17/19 — अल-अलक العلق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अलक सुनें, अल-अलक अनुवाद, अल-अलक mp3, अल-अलक pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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