Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَوْ أَمَرَ بِالتَّقْوَىٰ – या उसने तक़वा (परहेज़गारी) का आदेश दिया।
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला उस ज़ालिम इंसान (अबू जहल) की मज़म्मत कर रहा है, जो अल्लाह के बंदे (नबी मुहम्मद ﷺ) को नमाज़ पढ़ने से रोकता था। अल्लाह फ़रमाता है: “क्या तूने उस शख्स को देखा जो रोकता है अल्लाह के बंदे को जब वह नमाज़ पढ़ता है?” फिर अल्लाह तआला दो सवाल पूछता है: “भला बता तो, अगर वह (नबी) हिदायत पर हो, या वह लोगों को तक़वा (परहेज़गारी) का हुक्म देता हो, तो क्या यह रोकना उचित है?”
यानी अगर कोई इंसान खुद हिदायत पर हो और दूसरों को भी अच्छाई और परहेज़गारी की तरफ बुलाता हो, तो क्या उसे रोकना किसी भी लिहाज़ से जायज़ हो सकता है? हरगिज़ नहीं! यह सबसे बड़ी ज़ुल्म और सरकशी है कि एक नेक इंसान को उसकी नेकी से रोका जाए।
यह आयत हमें सिखाती है कि हक़ और सच्चाई की राह पर चलने वालों को कभी नहीं रोकना चाहिए, बल्कि उनका साथ देना चाहिए। और जो लोग दूसरों को नेकी और तक़वा की तरफ बुलाते हैं, वे अल्लाह के बहुत प्यारे बंदे होते हैं। अल्लाह तआला उनकी हिफ़ाज़त करता है और उन्हें कामयाबी देता है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें खुद भी तक़वा (परहेज़गारी) अपनाना चाहिए और दूसरों को भी इसकी तरफ बुलाना चाहिए। तक़वा ही वह चीज़ है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत में कामयाबी देती है। अल्लाह तआला हम सबको तक़वा अपनाने और उस पर साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 10-14 — सूरा अल-अलक
अनुवाद — अल-अलक 12
सूरा अल-अलक आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो रोकना कैसा)सूरा आयत 12/19 — सूरा अल-अलक العلق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अलक सुनें, सूरा अल-अलक अनुवाद, सूरा अल-अलक mp3, सूरा अल-अलक pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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