अल-अलक · 18/19
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अलक
سَنَدْعُ الزَّبَانِيَةَ ۝١٨
Sanad `uz zabaaniyah
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَنَدْعُ: हम बुलाएँगे (अर्थात् बुला लेंगे)।
  • الزَّبَانِيَةَ: यह जहन्नम के कठोर और सख्त मिज़ाज वाले फ़रिश्तों का नाम है, जो अज़ाब (यातना) देने पर नियुक्त हैं। यह 'ज़ब्न' से लिया गया है, जिसका अर्थ है धकेलना या मारना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस धमकी का हिस्सा है जो अल्लाह तआला ने अबू जहल जैसे सरकश और ज़ालिम इंसान को दी है, जो नबी करीम ﷺ को नमाज़ पढ़ने से रोकता था और उन्हें सताता था। अल्लाह फ़रमाता है: "हम उसके पास जहन्नम के सख्त फ़रिश्तों को बुला लेंगे" — यानी जब वह अपने साथियों और अपनी मजलिस वालों को मदद के लिए बुलाएगा, तो हम उसके मुक़ाबले में उन ज़बानिया फ़रिश्तों को बुलाएँगे जो अल्लाह के हुक्म की पूरी तरह पालना करते हैं, न तो उनमें कोई नरमी है और न ही वे अल्लाह के आदेश की अवहेलना कर सकते हैं। ये फ़रिश्ते उसे जहन्नम में धकेल देंगे और उसे अपनी पकड़ में ले लेंगे।

यह आयत मुसलमानों के लिए बड़ी तसल्ली और हिम्मत का सबब है कि अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ और उनके साथियों की हिफ़ाज़त ख़ुद करता है। जो इंसान अल्लाह के दीन के रास्ते में सब्र करता है और उसकी इबादत पर क़ायम रहता है, अल्लाह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता। दुश्मन चाहे कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, अल्लाह की ताक़त के आगे उसकी सारी ताक़त बेकार है। जब अल्लाह किसी की मदद करने वाला हो, तो कौन उसे नुक़सान पहुँचा सकता है?

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हक़ (सत्य) के रास्ते पर चलने वालों को कभी डरना नहीं चाहिए, चाहे मुख़ालिफ़ीन की तादाद कितनी ही ज़्यादा क्यों न हो। अल्लाह के फ़रिश्ते हर उस शख्स की मदद के लिए मौजूद हैं जो अल्लाह की राह में साबित-क़दम रहता है। यही वजह है कि हमें चाहिए कि हम अपनी नमाज़ों को क़ायम रखें, अल्लाह की इबादत पर डटे रहें और उसकी तरफ़ पूरे दिल से झुकें — क्योंकि अल्लाह के क़रीब होने में ही हमारी इज़्ज़त और कामयाबी है। जो अल्लाह के क़रीब हो जाए, उसे किसी की परवाह नहीं होती।



📜 आयत 16-19 — सूरा अल-अलक

16نَاصِيَةٍ كَاذِبَةٍ خَاطِئَةٍ
झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे
17فَلْيَدْعُ نَادِيَهُ
तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे
18سَنَدْعُ الزَّبَانِيَةَ
(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना
19كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَاسْجُدْ وَاقْتَرِب ۩
और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)
अल-अलककुरान सूची
19आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अल-अलक 18

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Thursday, October 1, 2026

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