अल-अलक · 6/19
अनुवाद उच्चारण — अल-अलक
كَلَّا إِنَّ الْإِنسَانَ لَيَطْغَىٰ ۝٦
Kallaa innal insaana layatghaa
📖 हिंदी अर्थ
सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कल्ला (كلا): हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है — यह नकार और झिड़की के लिए है।
  • अल-इंसान (الإنسان): यहाँ से आम इंसान मुराद है, और कुछ मुफ़स्सिरीन के नज़दीक ख़ास तौर पर अबू जहल जैसा सरकश इंसान।
  • यत्ग़ा (يطغى): हद से बढ़ जाना, सरकशी करना, अपनी हद से आगे निकल जाना।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है: हरगिज़ नहीं! यक़ीनन इंसान अपनी हद से बढ़ जाता है। यह आयत उस इंसान के हाल पर निकली है जो अपने माल और औलाद पर इतरा कर सरकश हो जाता है, और अल्लाह की दी हुई नेअमतों को देख कर घमंड में आ कर हक़ को झुटलाने और अल्लाह के बंदों को रास्ते से रोकने पर उतर आता है। जब इंसान को ग़नी और मालदार बना दिया जाता है, तो वह अक्सर अपनी औक़ात भूल जाता है, अपने रब की नाफ़रमानी करता है, और अपने आप को किसी के आगे झुकने के क़ाबिल नहीं समझता। यही हाल अबू जहल का था, जो अपनी दौलत और क़बीले की इज़्ज़त पर इतरा कर रसूलुल्लाह ﷺ को रोकने और उन पर ज़ुल्म करने से नहीं झिझकता था।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह सरकशी और हद से बढ़ना उस इंसान की कमज़ोर अक़्ल और नादानी की वजह से है, क्योंकि वह यह भूल जाता है कि उसे किसने पैदा किया, और उसे किसने यह ताक़त और माल दिया। अगर वह अपनी पैदाइश पर ग़ौर करे, तो उसे अपनी कमज़ोरी का अंदाज़ा हो जाए, और अगर वह अपने अंजाम पर नज़र डाले, तो उसे मालूम हो जाए कि उसे एक दिन अपने रब के सामने हाज़िर होना है।

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक बड़ी नसीहत है जो माल, ओहदा, हुस्न, इल्म या ताक़त के घमंड में आ कर अल्लाह की हदों से बाहर निकल जाता है। याद रखो! यह दुनिया की चीज़ें इंसान को बड़ा नहीं बना सकतीं, बल्कि अल्लाह के सामने इंसान की इज़्ज़त उसके तक़वा और अच्छे आमाल से है। जो इंसान जितना ज़्यादा अल्लाह की नेअमतों को पहचानता है, उसे उतना ही ज़्यादा अल्लाह के आगे झुकना चाहिए, न कि सरकशी करनी चाहिए। और जो लोग अपनी दौलत या ताक़त के घमंड में हक़ को ठुकराते हैं, उन्हें यक़ीन रखना चाहिए कि उनका अंजाम अल्लाह के हाथ में है, और वही उन्हें उनके किए का बदला देगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 4-8 — अल-अलक

4الَّذِي عَلَّمَ بِالْقَلَمِ
जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी
5عَلَّمَ الْإِنسَانَ مَا لَمْ يَعْلَمْ
उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था
6كَلَّا إِنَّ الْإِنسَانَ لَيَطْغَىٰ
सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है
7أَن رَّآهُ اسْتَغْنَىٰ
तो सरकश हो जाता है
8إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ الرُّجْعَىٰ
बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ (सबको) पलटना है
अल-अलककुरान सूची
19आयत
मक्कीRevelation
6आयत

अनुवाद — अल-अलक 6

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Tuesday, August 18, 2026

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