अत-तीन · 6/8
अनुवाद उच्चारण — अत-तीन
إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ ۝٦
Ill-lal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati; falahum ajrun ghairu mamnoon
📖 हिंदी अर्थ
मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • غَيْرُ مَمْنُونٍ — जो कभी समाप्त न हो, न कटे, न घटे, और न ही उस पर कोई एहसान जताया जाए। यह ऐसा अज्र (प्रतिफल) है जो निरंतर और अक्षय है।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने ईमान लाया — यानी अल्लाह पर, उसके रसूलों पर और उसकी किताबों पर सच्चे दिल से विश्वास किया — और उन्होंने अपने ईमान के साथ अच्छे कर्म भी किए, यानी नेकियाँ और भलाई के काम किए, तो उनके लिए ऐसा अज्र (प्रतिफल) है जो कभी समाप्त नहीं होता, न कटता है और न ही घटता है।

यह अल्लाह का विशेष अनुग्रह है कि जब कोई व्यक्ति ईमान और अच्छे कर्मों पर स्थिर रहता है, तो अल्लाह उसे ऐसा बदला देता है जो हमेशा रहने वाला है — वह है जन्नत। यहाँ तक कि अगर कोई बूढ़ा हो जाए और कमज़ोरी के कारण अच्छे कर्म न कर सके, तो अल्लाह उसके पिछले अच्छे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देता है, जैसे वह जवानी में करता था। यह अल्लाह की रहमत और करम का इनाम है जो कभी खत्म नहीं होता।

इस आयत में अल्लाह तआला ने यह भी बताया कि इंसान को सबसे अच्छी सूरत में पैदा किया गया है, लेकिन अगर वह अल्लाह की नाफ़रमानी करे और रसूलों की पैरवी न करे, तो उसे जहन्नम की आग में डाल दिया जाएगा। मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, उनके लिए यह खुशखबरी है कि उनका अंजाम जन्नत है — एक ऐसा इनाम जो कभी खत्म नहीं होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो अल्लाह पर ईमान रखता है और अच्छे काम करता है। अल्लाह तआला अपने बंदों से वादा करता है कि उनकी मेहनत और नेकियाँ कभी बेकार नहीं जाएँगी। चाहे इंसान कितना भी बूढ़ा हो जाए या कमज़ोर, अल्लाह उसके अच्छे कर्मों का अज्र पूरा-पूरा देगा। यह अल्लाह की असीम रहमत है कि उसने अपने बंदों के लिए ऐसा इनाम तैयार किया है जो हमेशा रहने वाला है।

तो आइए, हम सब अपने ईमान को मज़बूत करें और अच्छे कर्मों पर स्थिर रहें — चाहे हालात कैसे भी हों — क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसका इनाम कभी खत्म नहीं होने वाला। यही सच्ची कामयाबी है, और यही हमारी ज़िंदगी का असली मक़सद है।



📜 आयत 4-8 — अत-तीन

4لَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ فِي أَحْسَنِ تَقْوِيمٍ
कि हमने इन्सान बहुत अच्छे कैड़े का पैदा किया
5ثُمَّ رَدَدْنَاهُ أَسْفَلَ سَافِلِينَ
फिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया
6إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ
मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है
7فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِالدِّينِ
तो (ऐ रसूल) इन दलीलों के बाद तुमको (रोज़े) जज़ा के बारे में कौन झुठला सकता है
8أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَحْكَمِ الْحَاكِمِينَ
क्या ख़ुदा सबसे बड़ा हाकिम नहीं है (हाँ ज़रूर है)
अत-तीनकुरान सूची
8आयत
मक्कीRevelation
6आयत

अनुवाद — अत-तीन 6

सूरा अत-तीन आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते…

सूरा आयत 6/8 — अत-तीन التين (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तीन सुनें, अत-तीन अनुवाद, अत-तीन mp3, अत-तीन pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए