Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- اقْرَأْ: पढ़िए, पढ़कर सुनाइए।
- وَرَبُّكَ: और आपका पालनहार।
- الأَكْرَمُ: सबसे अधिक उदार, असीम दया और करुणा वाला, जिसकी उदारता की कोई सीमा नहीं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाता है: "पढ़िए, और आपका पालनहार सबसे बड़ा कृपालु और उदार है।" यह आदेश केवल पढ़ने का नहीं, बल्कि उस पढ़ने की ताकीद है जो अल्लाह के नाम से शुरू हो, जिसका उद्देश्य उसकी वही (प्रकाशना) को पढ़ना और लोगों तक पहुँचाना है।
इस आयत में अल्लाह ने अपने नबी को दिलासा दी है कि जिस रब ने आपको यह आदेश दिया है, वह सबसे अधिक उदार और दयावान है। उसकी उदारता की कोई मिसाल नहीं, उसका दान और कृपा असीमित है। वह अपने बंदों को ज्ञान देता है, उन्हें अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर लाता है। उसने मनुष्य को कलम (लेखनी) के द्वारा लिखना सिखाया, और उसे वह कुछ सिखाया जो वह नहीं जानता था।
यहाँ "الأَكْرَمُ" (सबसे उदार) का विशेष उल्लेख इसलिए किया गया कि नबी ﷺ को यह विश्वास दिलाया जाए कि यह रब उन सांसारिक रबों (सरदारों, शासकों) जैसा नहीं है जो अपनी उदारता में कंजूसी करते हैं या बदले की उम्मीद रखते हैं। अल्लाह की उदारता निःस्वार्थ है, वह देता है और कुछ नहीं माँगता। वह अपने बंदों की भलाई चाहता है, उन्हें ऊपर उठाना चाहता है, और उन्हें मान-सम्मान देना चाहता है।
इस आयत में एक बड़ी शिक्षा है कि जब हमें कोई ज़िम्मेदारी या कार्य सौंपा जाए, तो हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि अल्लाह हमारे साथ है, वह हमारी मदद करेगा और हमें कामयाबी देगा। उसकी उदारता का दामन थाम लेने वाला कभी निराश नहीं होता। यही कारण है कि इस्लाम में ज्ञान को बहुत ऊँचा स्थान दिया गया है — पहली वही (प्रकाशना) ही "पढ़ने" के आदेश से शुरू हुई, और यह उम्मत (समुदाय) की सबसे बड़ी विशेषता है कि उसे ज्ञान और समझ का धर्म दिया गया।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह की उदारता पर भरोसा रखें, उससे माँगते रहें, और उसके दिए हुए ज्ञान और समझ को दूसरों तक पहुँचाने का प्रयास करें। जो व्यक्ति अल्लाह के नाम पर पढ़ता है, उसकी पढ़ाई में बरकत होती है, और वह दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई पाता है।
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-अलक
अनुवाद — अल-अलक 3
सूरा अल-अलक आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा क़रीम हैसूरा आयत 3/19 — सूरा अल-अलक العلق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अलक सुनें, सूरा अल-अलक अनुवाद, सूरा अल-अलक mp3, सूरा अल-अलक pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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