Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَرَأَيْتَ: क्या आपने देखा? (यहाँ इसका अर्थ है: क्या आपने जाना और समझा?)
- يَنْهَى: वह रोकता है / मना करता है
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस व्यक्ति (अबू जहल) के बारे में है जो अल्लाह के नबी मुहम्मद (ﷺ) को नमाज़ पढ़ने से रोकता था। अल्लाह तआला इस आयत में उसके आचरण पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं।
क्या आपने उस व्यक्ति की हालत पर ग़ौर किया जो अल्लाह के बंदे को उसकी इबादत से रोकता है? यह कितनी बड़ी ढिठाई और सरकशी है कि एक इंसान दूसरे इंसान को उसके रब की इबादत से रोके! अबू जहल ने जब देखा कि रसूलुल्लाह (ﷺ) काबा के पास नमाज़ अदा कर रहे हैं, तो वह उन्हें धमकाने और रोकने के लिए आया।
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: क्या तुमने देखा? अगर यह नबी (ﷺ) हिदायत पर हों और लोगों को तक़वा (परहेज़गारी) की तालीम दे रहे हों, तो क्या यह उचित है कि उन्हें रोका जाए? और अगर यह नबी (ﷺ) सच्चाई पर हैं, तो उन्हें रोकने वाला कितनी बड़ी ग़लती पर है!
फिर अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: क्या उस रोकने वाले को यह नहीं मालूम कि अल्लाह सब कुछ देख रहा है? वह उसके सारे कर्मों को जानता है और उसका हिसाब लेगा। यह बात उसके वहम में भी नहीं है कि अल्लाह उसके इस ज़ुल्म को देख रहा है और उस पर कोई सज़ा नहीं होगी।
अल्लाह तआला फिर फ़रमाते हैं: हरगिज़ नहीं! अगर यह शख्स अपनी सरकशी और ज़ुल्म से बाज़ नहीं आया, तो हम उसकी पेशानी के बाल पकड़कर उसे जहन्नम की आग में झोंक देंगे। वह पेशानी जो झूठ बोलने वाली और ग़लती करने वाली है। यानी उसका पूरा वजूद ही झूठ और ग़लती पर है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाते हैं: वह अपने साथियों और हमदर्दों को बुला ले, हम भी अपने अज़ाब के फ़रिश्तों को बुला लेंगे। वह चाहे जितनी ताकत जुटा ले, अल्लाह की ताकत के आगे उसकी कोई हक़ीकत नहीं।
आख़िर में अल्लाह तआला अपने नबी (ﷺ) को तसल्ली देते हुए फ़रमाते हैं: ऐ नबी! तुम उसकी बात मत मानो, उसके कहने पर नमाज़ मत छोड़ो। तुम सजदा करते रहो और अपने रब के करीब होते जाओ। यही सच्ची कामयाबी है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की इबादत को कोई भी रोक नहीं सकता। चाहे दुनिया की ताकतें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अल्लाह का बंदा अपनी नमाज़ और इबादत पर क़ायम रहे। यह भी सिखाती है कि अल्लाह हर चीज़ देख रहा है — जो ज़ुल्म करता है, उसका हिसाब होगा; और जो सब्र करता है, उसके लिए अल्लाह की तरफ से कामयाबी है। नमाज़ और सजदा ही वह ज़रिया है जिससे बंदा अपने रब के करीब होता है। आज भी अगर कोई हमें अल्लाह की इबादत से रोके, तो हमें डरना नहीं चाहिए, बल्कि और ज़्यादा इबादत में मशगूल हो जाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है।
📜 आयत 7-11 — सूरा अल-अलक
अनुवाद — अल-अलक 9
सूरा अल-अलक आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला तुमने उस शख़्श को भी देखासूरा आयत 9/19 — सूरा अल-अलक العلق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अलक सुनें, सूरा अल-अलक अनुवाद, सूरा अल-अलक mp3, सूरा अल-अलक pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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