अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- कल्ला (كَلَّا): हरगिज़ नहीं, ऐसा कभी नहीं हो सकता। यह नकार और झिड़की के लिए आया है।
- ला तुतिहु (لَا تُطِعْهُ): उसकी बात मत मानो, उसके कहने पर अमल मत करो।
- वस्जुद (وَاسْجُدْ): अपने रब के आगे सजदा करो।
- वक्तरिब (وَاقْتَرِبْ): और (अल्लाह की तरफ) करीब हो जाओ, उसकी तरफ बढ़ो।
तफसीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए फ़रमाता है कि यह बात हरगिज़ ऐसी नहीं है जैसा यह ज़ालिम (अबू जहल) समझता है। वह यह गुमान रखता है कि वह तुम्हें नुक़सान पहुँचा सकता है या तुम्हें सजदे से रोक सकता है, लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा।
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि तुम उसकी किसी भी बात को मत मानो, न उसके नेकी से रोकने वाले कहने पर ध्यान दो और न उसकी धमकियों से डरो। तुम्हारा काम सिर्फ़ एक है — अपने रब के आगे सजदा करो और उसकी तरफ बढ़ते जाओ। सजदा ही वह मुकाम है जहाँ बंदा अपने रब के सबसे करीब होता है।
यह आयत हर उस मुसलमान के लिए एक नुस्ख़ा है जो किसी ज़ालिम के दबाव में हो। चाहे दुनिया की ताक़तवर तरफ़ें तुम्हें रोकें, चाहे लोग तुम्हारा मज़ाक उड़ाएँ, चाहे वे तुम्हें धमकाएँ — तुम्हें सिर्फ़ अल्लाह की तरफ मुड़ना है। सजदा वह जगह है जहाँ अल्लाह अपने बंदे को अपने करीब ले लेता है।
और याद रखो, जो शख्स सजदे में अपने रब के करीब हो जाता है, उसे दुनिया की कोई ताक़त नुक़सान नहीं पहुँचा सकती। अल्लाह की पनाह में आने के बाद किसी इंसान का डर नहीं रहता।
यही वह रास्ता है जो इंसान को इज़्ज़त देता है — अल्लाह के आगे झुकना। जो अल्लाह के आगे झुक गया, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में सर बुलंद करता है।
तो ऐ मुसलमान! तू भी इस हुक्म पर अमल कर — किसी ज़ालिम की बात मत मान, किसी के दबाव में मत आ, बस अपने रब के आगे सजदा कर और उसकी तरफ बढ़ता जा। यही तेरी कामयाबी है, यही तेरी इज़्ज़त है।
📜 आयत 17-19 — अल-अलक
अनुवाद — अल-अलक 19
सूरा अल-अलक आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)सूरा आयत 19/19 — अल-अलक العلق (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अलक सुनें, अल-अलक अनुवाद, अल-अलक mp3, अल-अलक pdf. आयत 17–19. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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