अत-तीन · 5/8
अनुवाद उच्चारण — अत-तीन
ثُمَّ رَدَدْنَاهُ أَسْفَلَ سَافِلِينَ ۝٥
Thumma ra dad naahu asfala saafileen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अस्फ़ल साफ़िलीन (أَسْفَلَ سَافِلِينَ): सबसे निचले स्तर पर लौटा देना, अर्थात बुढ़ापे की अवस्था में पहुँचा देना या नर्क के सबसे निचले दर्जे में डाल देना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में फ़रमाया कि हमने इंसान को सबसे अच्छी सूरत और अच्छे क़द-काठी पर पैदा किया, उसे अक़्ल, समझ और इख़्तियार दिया, और उसे अपनी बनाई हुई चीज़ों पर फ़ज़ीलत अता की। लेकिन जब इंसान अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) नहीं करता और उसके भेजे हुए रसूलों की पैरवी नहीं करता, तो हम उसे सबसे निचले दर्जे पर लौटा देते हैं।

यह "सबसे निचला दर्जा" दो चीज़ों की तरफ़ इशारा करता है:

  1. दुनिया में: इंसान को बुढ़ापे की कमज़ोर अवस्था में पहुँचा दिया जाता है, जब उसकी ताक़त जाती रहती है, उसका शरीर कमज़ोर हो जाता है, और उसकी अक़्ल भी कम हो जाती है। यह उसके लिए एक निशानी है कि जिस तरह वह जवानी और ताक़त के बाद इस हालत को पहुँचता है, उसी तरह अगर वह अल्लाह की इताअत से दूर रहे तो उसका अंजाम भी बुरा होगा।
  2. आख़िरत में: जो लोग ईमान नहीं लाते और नेक अमल नहीं करते, उन्हें जहन्नुम की सबसे निचली तह में डाल दिया जाएगा, जहाँ सबसे सख़्त अज़ाब होगा।

लेकिन अल्लाह तआला अपने रहमत और करम से उन लोगों को इस बुरे अंजाम से बचा लेता है जो ईमान लाते हैं और नेक अमल करते हैं। उनके लिए ऐसा अज्र (इनाम) है जो कभी ख़त्म नहीं होता और न ही कम किया जाता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारी ज़िंदगी का मक़सद सिर्फ़ खाना, पीना और मौज-मस्ती नहीं है। अल्लाह ने हमें इतनी खूबसूरत सूरत और इतनी बड़ी अक़्ल दी है कि हम उसकी इबादत करें और उसके बताए हुए रास्ते पर चलें। अगर हम इस नेमत की क़द्र नहीं करेंगे और अल्लाह की नाफ़रमानी करेंगे, तो हमारा अंजाम बहुत बुरा होगा। लेकिन अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है—जो भी ईमान लाए और नेक अमल करे, उसके लिए ऐसा इनाम है जिसकी कोई इंतिहा नहीं। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में गुज़ारें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 3-7 — अत-तीन

3وَهَٰذَا الْبَلَدِ الْأَمِينِ
और उस अमन वाले शहर (मक्का) की
4لَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ فِي أَحْسَنِ تَقْوِيمٍ
कि हमने इन्सान बहुत अच्छे कैड़े का पैदा किया
5ثُمَّ رَدَدْنَاهُ أَسْفَلَ سَافِلِينَ
फिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया
6إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَلَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ
मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है
7فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِالدِّينِ
तो (ऐ रसूल) इन दलीलों के बाद तुमको (रोज़े) जज़ा के बारे में कौन झुठला सकता है
अत-तीनकुरान सूची
8आयत
मक्कीRevelation
5आयत

अनुवाद — अत-तीन 5

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Tuesday, August 18, 2026

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