हूद · 9/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَلَئِنْ أَذَقْنَا الْإِنسَانَ مِنَّا رَحْمَةً ثُمَّ نَزَعْنَاهَا مِنْهُ إِنَّهُ لَيَئُوسٌ كَفُورٌ ۝٩
Wa la`in azaqnal insaana minnaa rahmatan summa naza`naahaa minhu, innahoo laya`oosun kafoor
📖 हिंदी अर्थ
और अगर हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखाएं फिर उसको हम उससे छीन लें तो (उस वक्त) यक़ीनन बड़ा बेआस और नाशुक्रा हो जाता है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَذَقْنَا: हमने चखाया (यानी अनुभव कराया)
  • رَحْمَةً: दया, कृपा, नेमत (जैसे स्वास्थ्य, सुरक्षा, धन-संपत्ति)
  • نَزَعْنَاهَا: हमने उसे छीन लिया, उससे अलग कर दिया
  • لَيَئُوسٌ: अत्यधिक निराश, हताश (जो रहमत की ओर से पूरी तरह उम्मीद खो दे)
  • كَفُورٌ: बहुत अधिक कृतघ्न, नेमतों का इनकार करने वाला

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत इंसान की कमज़ोर फ़ितरत (स्वभाव) को उजागर करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब हम इंसान को अपनी ओर से कोई रहमत (नेमत) देते हैं—जैसे तंदुरुस्ती, अमन-चैन, धन-दौलत, या कोई और भलाई—और फिर उस नेमत को उससे छीन लेते हैं, तो वह इंसान दो चीज़ों का शिकार हो जाता है:

पहली: वह अल्लाह की रहमत से पूरी तरह निराश हो जाता है। उसे यक़ीन हो जाता है कि यह नेमत अब कभी लौटकर नहीं आएगी, और वह अल्लाह की कुदरत और उसकी दया से मायूस हो बैठता है। वह भूल जाता है कि अल्लाह जब चाहे उसे फिर से दे सकता है।

दूसरी: वह उन नेमतों का अत्यधिक इनकार करने लगता है। जो नेमतें उसे पहले मिली थीं, उन्हें वह भूल जाता है, और अल्लाह की उन भलाइयों का एहसान नहीं मानता जो उसने पहले उस पर किए थे। वह कृतघ्न हो जाता है और शिकायत करने लगता है, जबकि उसे चाहिए था कि वह सब्र करता और अल्लाह से उम्मीद रखता।

यह आयत इंसान की उस कमज़ोरी की ओर इशारा करती है जब वह सिर्फ़ अपनी हालत को देखता है और अल्लाह की व्यापक रहमत और उसकी कुदरत को भूल जाता है।


फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की रहमत से निराश न होना: यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत और परेशानी के वक़्त भी अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए। निराशा एक बुरी आदत है जो इंसान को अल्लाह से दूर कर देती है।
  2. नेमतों का एहसान मानना: हमें चाहिए कि हर हालत में अल्लाह की दी हुई नेमतों का शुक्र अदा करें, चाहे वे कम ही क्यों न हों। कृतघ्नता इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर देती है।
  3. सब्र और शुक्र का ताल्लुक़: मुसीबत में सब्र करना और नेमत में शुक्र करना—यही मोमिन की पहचान है। यह आयत हमें बताती है कि इंसान की फ़ितरत में कमज़ोरी है, लेकिन ईमान और यक़ीन इस कमज़ोरी को दूर करता है।
  4. अल्लाह की कुदरत पर भरोसा: जो नेमत चली जाए, वह अल्लाह के इशारे पर लौट सकती है। अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, इसलिए उसकी रहमत से मायूस होना बेवजह है।
  5. इंसान की कमज़ोरी का इलाज: यह आयत हमें अपनी कमज़ोरियों को पहचानने और उन्हें ईमान, यक़ीन और अल्लाह की याद से दूर करने की तरग़ीब देती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — हूद

7وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ وَكَانَ عَرْشُهُ عَلَى الْمَاءِ لِيَبْلُوَكُمْ أَيُّكُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا ۗ وَلَئِن قُلْتَ إِنَّكُم مَّبْعُوثُونَ مِن بَعْدِ الْمَوْتِ لَيَقُولَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और वह तो वही (क़ादिरे मुत्तलिक़) है जिसने आसमानों और ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया और (उस वक्त) उसका अर्श (फलक नहुम) पानी पर था (उसने आसमान व ज़मीन) इस ग़रज़ से बनाया ताकि तुम लोगों को आज़माए कि तुममे ज्यादा अच्छी कार गुज़ारी वाला कौन है और (ऐ रसूल) अगर तुम (उनसे) कहोगे कि मरने के बाद तुम सबके सब दोबारा (क़ब्रों से) उठाए जाओगे तो काफ़िर लोग ज़रुर कह बैठेगें कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
8وَلَئِنْ أَخَّرْنَا عَنْهُمُ الْعَذَابَ إِلَىٰ أُمَّةٍ مَّعْدُودَةٍ لَّيَقُولُنَّ مَا يَحْبِسُهُ ۗ أَلَا يَوْمَ يَأْتِيهِمْ لَيْسَ مَصْرُوفًا عَنْهُمْ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और अगर हम गिनती के चन्द रोज़ो तक उन पर अज़ाब करने में देर भी करें तो ये लोग (अपनी शरारत से) बेताम्मुल ज़रुर कहने लगेगें कि (हाए) अज़ाब को कौन सी चीज़ रोक रही है सुन रखो जिस दिन इन पर अज़ाब आ पडे तो (फिर) उनके टाले न टलेगा और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाया करते थे वह उनको हर तरह से घेर लेगा
9وَلَئِنْ أَذَقْنَا الْإِنسَانَ مِنَّا رَحْمَةً ثُمَّ نَزَعْنَاهَا مِنْهُ إِنَّهُ لَيَئُوسٌ كَفُورٌ
और अगर हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखाएं फिर उसको हम उससे छीन लें तो (उस वक्त) यक़ीनन बड़ा बेआस और नाशुक्रा हो जाता है
10وَلَئِنْ أَذَقْنَاهُ نَعْمَاءَ بَعْدَ ضَرَّاءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ السَّيِّئَاتُ عَنِّي ۚ إِنَّهُ لَفَرِحٌ فَخُورٌ
(और हमारी शिकायत करने लगता है) और अगर हम तकलीफ के बाद जो उसे पहुँचती थी राहत व आराम का जाएक़ा चखाए तो ज़रुर कहने लगता है कि अब तो सब सख्तियाँ मुझसे दफा हो गई इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा (जल्दी खुश) होने येख़ी बाज़ है
11إِلَّا الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أُولَٰئِكَ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ كَبِيرٌ
मगर जिन लोगों ने सब्र किया और अच्छे (अच्छे) काम किए (वह ऐसे नहीं) ये वह लोग हैं जिनके वास्ते (ख़ुदा की) बख़्शिस और बहुत बड़ी (खरी) मज़दूरी है
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
9आयत

अनुवाद — हूद 9

सूरा हूद आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखाएं…

सूरा आयत 9/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए