अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَذَقْنَا: हमने चखाया (यानी अनुभव कराया)
- رَحْمَةً: दया, कृपा, नेमत (जैसे स्वास्थ्य, सुरक्षा, धन-संपत्ति)
- نَزَعْنَاهَا: हमने उसे छीन लिया, उससे अलग कर दिया
- لَيَئُوسٌ: अत्यधिक निराश, हताश (जो रहमत की ओर से पूरी तरह उम्मीद खो दे)
- كَفُورٌ: बहुत अधिक कृतघ्न, नेमतों का इनकार करने वाला
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत इंसान की कमज़ोर फ़ितरत (स्वभाव) को उजागर करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब हम इंसान को अपनी ओर से कोई रहमत (नेमत) देते हैं—जैसे तंदुरुस्ती, अमन-चैन, धन-दौलत, या कोई और भलाई—और फिर उस नेमत को उससे छीन लेते हैं, तो वह इंसान दो चीज़ों का शिकार हो जाता है:
पहली: वह अल्लाह की रहमत से पूरी तरह निराश हो जाता है। उसे यक़ीन हो जाता है कि यह नेमत अब कभी लौटकर नहीं आएगी, और वह अल्लाह की कुदरत और उसकी दया से मायूस हो बैठता है। वह भूल जाता है कि अल्लाह जब चाहे उसे फिर से दे सकता है।
दूसरी: वह उन नेमतों का अत्यधिक इनकार करने लगता है। जो नेमतें उसे पहले मिली थीं, उन्हें वह भूल जाता है, और अल्लाह की उन भलाइयों का एहसान नहीं मानता जो उसने पहले उस पर किए थे। वह कृतघ्न हो जाता है और शिकायत करने लगता है, जबकि उसे चाहिए था कि वह सब्र करता और अल्लाह से उम्मीद रखता।
यह आयत इंसान की उस कमज़ोरी की ओर इशारा करती है जब वह सिर्फ़ अपनी हालत को देखता है और अल्लाह की व्यापक रहमत और उसकी कुदरत को भूल जाता है।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह की रहमत से निराश न होना: यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत और परेशानी के वक़्त भी अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए। निराशा एक बुरी आदत है जो इंसान को अल्लाह से दूर कर देती है।
- नेमतों का एहसान मानना: हमें चाहिए कि हर हालत में अल्लाह की दी हुई नेमतों का शुक्र अदा करें, चाहे वे कम ही क्यों न हों। कृतघ्नता इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर देती है।
- सब्र और शुक्र का ताल्लुक़: मुसीबत में सब्र करना और नेमत में शुक्र करना—यही मोमिन की पहचान है। यह आयत हमें बताती है कि इंसान की फ़ितरत में कमज़ोरी है, लेकिन ईमान और यक़ीन इस कमज़ोरी को दूर करता है।
- अल्लाह की कुदरत पर भरोसा: जो नेमत चली जाए, वह अल्लाह के इशारे पर लौट सकती है। अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, इसलिए उसकी रहमत से मायूस होना बेवजह है।
- इंसान की कमज़ोरी का इलाज: यह आयत हमें अपनी कमज़ोरियों को पहचानने और उन्हें ईमान, यक़ीन और अल्लाह की याद से दूर करने की तरग़ीब देती है।
📜 आयत 7-11 — हूद
अनुवाद — हूद 9
सूरा हूद आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखाएं…सूरा आयत 9/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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