हूद · 10/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَلَئِنْ أَذَقْنَاهُ نَعْمَاءَ بَعْدَ ضَرَّاءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ السَّيِّئَاتُ عَنِّي ۚ إِنَّهُ لَفَرِحٌ فَخُورٌ ۝١٠
Wala`in azaqnaahu na`maaa`a ba`da darraaa`a massat hu la yaqoolanna zahabas saiyiaatu `anneee; innahoo lafarihun fakhoor
📖 हिंदी अर्थ
(और हमारी शिकायत करने लगता है) और अगर हम तकलीफ के बाद जो उसे पहुँचती थी राहत व आराम का जाएक़ा चखाए तो ज़रुर कहने लगता है कि अब तो सब सख्तियाँ मुझसे दफा हो गई इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा (जल्दी खुश) होने येख़ी बाज़ है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَعْمَاءَ: सुख-समृद्धि, आराम और खुशहाली।
  • ضَرَّاءَ: कष्ट, तंगी, बीमारी या मुसीबत।
  • السَّيِّئَاتُ: यहाँ इससे मतलब मुसीबतें, कष्ट और बुरे हालात।
  • فَرِحٌ: इतराने वाला, खुशी से अकड़ने वाला (घमंड के साथ)।
  • فَخُورٌ: अपनी तारीफ़ करने वाला, लोगों पर बड़ाई जताने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत इंसान की कमज़ोर फ़ितरत (स्वभाव) को बयान करती है। जब इंसान पर मुसीबत आती है—जैसे ग़रीबी, बीमारी, या कोई दुख—तो वह घबरा जाता है और निराश हो जाता है। लेकिन जब अल्लाह उस पर रहम करता है और उस कष्ट के बाद उसे सुख, सेहत और खुशहाली देता है, तो वह अल्लाह का शुक्र अदा करने के बजाय यह कहने लगता है: "मेरी सारी मुसीबतें दूर हो गईं, मेरे सारे दुख खत्म हो गए।" वह यह भूल जाता है कि यह राहत अल्लाह की तरफ से आई है, और वह इसे अपनी तदबीर या किस्मत का नतीजा समझता है।

इसके बाद अल्लाह उसकी दो बुरी आदतों का ज़िक्र करता है:

  1. فَرِحٌ: वह इतराता है, खुशी में अकड़ जाता है, और अपने अंदर घमंड पाल लेता है।
  2. فَخُورٌ: वह लोगों के सामने अपनी तारीफ़ करता है, अपनी नेमतों का दिखावा करता है और दूसरों को हेय नज़र से देखता है।

यह इंसान की नाफ़रमानी और नाशुक्री है—वह मुसीबत में अल्लाह को याद करता है, लेकिन राहत मिलते ही अल्लाह को भूल जाता है और अपनी बड़ाई करने लगता है। यह आयत उस इंसान के हाल पर निशानी लगाती है जो सिर्फ़ अपनी ख्वाहिशों के पीछे भागता है और अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल नहीं करता।


फ़ायदे (सीख):

  1. शुक्रगुज़ारी की अहमियत: इंसान को चाहिए कि जब अल्लाह उसे सुख और राहत दे, तो वह उसका शुक्र अदा करे, न कि घमंड करे। शुक्र अदा करने से अल्लाह नेमतों में और बढ़ोतरी करता है।
  2. घमंड से बचाव: यह आयत हमें सिखाती है कि नेमत पाकर इतराना और लोगों पर फ़ख़्र करना अल्लाह को नापसंद है। घमंड इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है।
  3. हर हाल में अल्लाह पर भरोसा: मुसीबत में सब्र और राहत में शुक्र—यही मोमिन की पहचान है। इंसान को चाहिए कि वह दोनों हालात में अल्लाह को याद रखे।
  4. दुनिया की नेमतें इम्तिहान हैं: सुख-समृद्धि भी अल्लाह की तरफ से एक इम्तिहान है—क्या इंसान शुक्र करता है या घमंड में आ जाता है। इसलिए नेमत को अपने लिए फ़ित्ना (आज़माइश) न बनने दें।
  5. इंसान की कमज़ोरी की पहचान: यह आयत हमें बताती है कि इंसान अपने आप में कमज़ोर है, उसे हर वक़्त अल्लाह की मदद और हिदायत की ज़रूरत है। अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें नेमत में शुक्र और मुसीबत में सब्र की तौफ़ीक़ दे।
🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — हूद

8وَلَئِنْ أَخَّرْنَا عَنْهُمُ الْعَذَابَ إِلَىٰ أُمَّةٍ مَّعْدُودَةٍ لَّيَقُولُنَّ مَا يَحْبِسُهُ ۗ أَلَا يَوْمَ يَأْتِيهِمْ لَيْسَ مَصْرُوفًا عَنْهُمْ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और अगर हम गिनती के चन्द रोज़ो तक उन पर अज़ाब करने में देर भी करें तो ये लोग (अपनी शरारत से) बेताम्मुल ज़रुर कहने लगेगें कि (हाए) अज़ाब को कौन सी चीज़ रोक रही है सुन रखो जिस दिन इन पर अज़ाब आ पडे तो (फिर) उनके टाले न टलेगा और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाया करते थे वह उनको हर तरह से घेर लेगा
9وَلَئِنْ أَذَقْنَا الْإِنسَانَ مِنَّا رَحْمَةً ثُمَّ نَزَعْنَاهَا مِنْهُ إِنَّهُ لَيَئُوسٌ كَفُورٌ
और अगर हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखाएं फिर उसको हम उससे छीन लें तो (उस वक्त) यक़ीनन बड़ा बेआस और नाशुक्रा हो जाता है
10وَلَئِنْ أَذَقْنَاهُ نَعْمَاءَ بَعْدَ ضَرَّاءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ السَّيِّئَاتُ عَنِّي ۚ إِنَّهُ لَفَرِحٌ فَخُورٌ
(और हमारी शिकायत करने लगता है) और अगर हम तकलीफ के बाद जो उसे पहुँचती थी राहत व आराम का जाएक़ा चखाए तो ज़रुर कहने लगता है कि अब तो सब सख्तियाँ मुझसे दफा हो गई इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा (जल्दी खुश) होने येख़ी बाज़ है
11إِلَّا الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أُولَٰئِكَ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ كَبِيرٌ
मगर जिन लोगों ने सब्र किया और अच्छे (अच्छे) काम किए (वह ऐसे नहीं) ये वह लोग हैं जिनके वास्ते (ख़ुदा की) बख़्शिस और बहुत बड़ी (खरी) मज़दूरी है
12فَلَعَلَّكَ تَارِكٌ بَعْضَ مَا يُوحَىٰ إِلَيْكَ وَضَائِقٌ بِهِ صَدْرُكَ أَن يَقُولُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ كَنزٌ أَوْ جَاءَ مَعَهُ مَلَكٌ ۚ إِنَّمَا أَنتَ نَذِيرٌ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ
तो जो चीज़ तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए से भेजी है उनमें से बाज़ को (सुनाने के वक्त) यायद तुम फक़त इस ख्याल से छोड़ देने वाले हो और तुम तंग दिल हो कि मुबादा ये लोग कह बैंठें कि उन पर खज़ाना क्यों नहीं नाज़िल किया गया या (उनके तसदीक के लिए) उनके साथ कोई फरिश्ता क्यों न आया तो तुम सिर्फ (अज़ाब से) डराने वाले हो
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Tuesday, August 18, 2026

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