अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَعْمَاءَ: सुख-समृद्धि, आराम और खुशहाली।
- ضَرَّاءَ: कष्ट, तंगी, बीमारी या मुसीबत।
- السَّيِّئَاتُ: यहाँ इससे मतलब मुसीबतें, कष्ट और बुरे हालात।
- فَرِحٌ: इतराने वाला, खुशी से अकड़ने वाला (घमंड के साथ)।
- فَخُورٌ: अपनी तारीफ़ करने वाला, लोगों पर बड़ाई जताने वाला।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत इंसान की कमज़ोर फ़ितरत (स्वभाव) को बयान करती है। जब इंसान पर मुसीबत आती है—जैसे ग़रीबी, बीमारी, या कोई दुख—तो वह घबरा जाता है और निराश हो जाता है। लेकिन जब अल्लाह उस पर रहम करता है और उस कष्ट के बाद उसे सुख, सेहत और खुशहाली देता है, तो वह अल्लाह का शुक्र अदा करने के बजाय यह कहने लगता है: "मेरी सारी मुसीबतें दूर हो गईं, मेरे सारे दुख खत्म हो गए।" वह यह भूल जाता है कि यह राहत अल्लाह की तरफ से आई है, और वह इसे अपनी तदबीर या किस्मत का नतीजा समझता है।
इसके बाद अल्लाह उसकी दो बुरी आदतों का ज़िक्र करता है:
- فَرِحٌ: वह इतराता है, खुशी में अकड़ जाता है, और अपने अंदर घमंड पाल लेता है।
- فَخُورٌ: वह लोगों के सामने अपनी तारीफ़ करता है, अपनी नेमतों का दिखावा करता है और दूसरों को हेय नज़र से देखता है।
यह इंसान की नाफ़रमानी और नाशुक्री है—वह मुसीबत में अल्लाह को याद करता है, लेकिन राहत मिलते ही अल्लाह को भूल जाता है और अपनी बड़ाई करने लगता है। यह आयत उस इंसान के हाल पर निशानी लगाती है जो सिर्फ़ अपनी ख्वाहिशों के पीछे भागता है और अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल नहीं करता।
फ़ायदे (सीख):
- शुक्रगुज़ारी की अहमियत: इंसान को चाहिए कि जब अल्लाह उसे सुख और राहत दे, तो वह उसका शुक्र अदा करे, न कि घमंड करे। शुक्र अदा करने से अल्लाह नेमतों में और बढ़ोतरी करता है।
- घमंड से बचाव: यह आयत हमें सिखाती है कि नेमत पाकर इतराना और लोगों पर फ़ख़्र करना अल्लाह को नापसंद है। घमंड इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है।
- हर हाल में अल्लाह पर भरोसा: मुसीबत में सब्र और राहत में शुक्र—यही मोमिन की पहचान है। इंसान को चाहिए कि वह दोनों हालात में अल्लाह को याद रखे।
- दुनिया की नेमतें इम्तिहान हैं: सुख-समृद्धि भी अल्लाह की तरफ से एक इम्तिहान है—क्या इंसान शुक्र करता है या घमंड में आ जाता है। इसलिए नेमत को अपने लिए फ़ित्ना (आज़माइश) न बनने दें।
- इंसान की कमज़ोरी की पहचान: यह आयत हमें बताती है कि इंसान अपने आप में कमज़ोर है, उसे हर वक़्त अल्लाह की मदद और हिदायत की ज़रूरत है। अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमें नेमत में शुक्र और मुसीबत में सब्र की तौफ़ीक़ दे।
📜 आयत 8-12 — हूद
अनुवाद — हूद 10
सूरा हूद आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और हमारी शिकायत करने लगता है) और अगर हम तकलीफ…सूरा आयत 10/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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