हूद · 8/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
وَلَئِنْ أَخَّرْنَا عَنْهُمُ الْعَذَابَ إِلَىٰ أُمَّةٍ مَّعْدُودَةٍ لَّيَقُولُنَّ مَا يَحْبِسُهُ ۗ أَلَا يَوْمَ يَأْتِيهِمْ لَيْسَ مَصْرُوفًا عَنْهُمْ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ ۝٨
Wala`in akhkharnaa `anhumul `azaaba ilaaa ummatim ma`doodatil la yaqoolunna maa yahbisuh; alaa yawma yaateehim laisa masroofan `anhum wa haaqa bihim maa kaanoo bihee yastahzi`oon
📖 हिंदी अर्थ
और अगर हम गिनती के चन्द रोज़ो तक उन पर अज़ाब करने में देर भी करें तो ये लोग (अपनी शरारत से) बेताम्मुल ज़रुर कहने लगेगें कि (हाए) अज़ाब को कौन सी चीज़ रोक रही है सुन रखो जिस दिन इन पर अज़ाब आ पडे तो (फिर) उनके टाले न टलेगा और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाया करते थे वह उनको हर तरह से घेर लेगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُمَّةٍ مَّعْدُودَةٍ: एक निश्चित और सीमित अवधि, यानी कुछ ही दिनों का समय।
  • مَا يَحْبِسُهُ: कौन सी चीज़ उसे रोके हुए है? यानी उसे कौन सी चीज़ आने से रोक रही है?
  • مَصْرُوفًا: टाला हुआ या हटाया हुआ।
  • حَاقَ: घेर लिया, चारों ओर से आ घेरा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यदि हम इन मुशरिकों (बहुदेववादियों) से उनके उस अज़ाब (यातना) को जो वे अपने कुकर्मों के कारण पाने के हक़दार हैं, एक निश्चित और सीमित अवधि तक के लिए टाल दें, तो वे अपनी जल्दबाज़ी और उपहास के कारण कहने लगेंगे: "आख़िर कौन सी चीज़ इस अज़ाब को आने से रोक रही है? अगर यह सच है तो अभी क्यों नहीं आता?" वे इस तरह की बातें करके उस अज़ाब का मज़ाक उड़ाते हैं। लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए कि जिस दिन वह अज़ाब उनके पास आएगा — चाहे वह बद्र के दिन हो या क़ियामत के दिन — उसे उनसे टाला नहीं जा सकेगा और न ही कोई उसे उनसे हटा पाएगा। वह अज़ाब उन्हें चारों ओर से घेर लेगा, और वही चीज़ उन पर आ पड़ेगी जिसका वे मज़ाक उड़ाया करते थे। यानी उनका उपहास ही उनकी सज़ा का कारण बनेगा और वह यातना उन पर इस तरह हावी हो जाएगी कि उससे बचने का कोई रास्ता नहीं होगा।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की सज़ा में देरी उसकी रहमत और मोहलत का परिणाम है, लेकिन यह मोहलत हमेशा के लिए नहीं होती। इंसान को चाहिए कि वह इस मोहलत को ग़नीमत समझे और तौबा कर ले।
  2. अल्लाह के अज़ाब का मज़ाक उड़ाना बहुत बड़ा गुनाह है। जो लोग दीन की बातों और अल्लाह के वादों पर हँसते हैं, वही अज़ाब उन पर उल्टकर आ पड़ता है।
  3. अल्लाह का अज़ाब जब आ जाता है तो उसे कोई टाल नहीं सकता। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह की तरफ़ जल्दी लौटे और अपनी ज़िंदगी को सही कर ले, क्योंकि अज़ाब आने के बाद पछतावे का कोई फ़ायदा नहीं।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों पर रहम करने वाला है और उन्हें मौक़ा देता है, लेकिन जब उसकी मोहलत ख़त्म हो जाती है, तो उसका फ़ैसला टलता नहीं। इसलिए हमें अल्लाह के साथ अपने रिश्ते को मज़बूत करना चाहिए और उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए।


📜 आयत 6-10 — सूरा हूद

6۞ وَمَا مِن دَابَّةٍ فِي الْأَرْضِ إِلَّا عَلَى اللَّهِ رِزْقُهَا وَيَعْلَمُ مُسْتَقَرَّهَا وَمُسْتَوْدَعَهَا ۚ كُلٌّ فِي كِتَابٍ مُّبِينٍ
और ज़मीन पर चलने वालों में कोई ऐसा नहीं जिसकी रोज़ी ख़ुदा के ज़िम्मे न हो और ख़ुदा उनके ठिकाने और (मरने के बाद) उनके सौपे जाने की जगह (क़ब्र) को भी जानता है सब कुछ रौशन किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है
7وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ وَكَانَ عَرْشُهُ عَلَى الْمَاءِ لِيَبْلُوَكُمْ أَيُّكُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا ۗ وَلَئِن قُلْتَ إِنَّكُم مَّبْعُوثُونَ مِن بَعْدِ الْمَوْتِ لَيَقُولَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और वह तो वही (क़ादिरे मुत्तलिक़) है जिसने आसमानों और ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया और (उस वक्त) उसका अर्श (फलक नहुम) पानी पर था (उसने आसमान व ज़मीन) इस ग़रज़ से बनाया ताकि तुम लोगों को आज़माए कि तुममे ज्यादा अच्छी कार गुज़ारी वाला कौन है और (ऐ रसूल) अगर तुम (उनसे) कहोगे कि मरने के बाद तुम सबके सब दोबारा (क़ब्रों से) उठाए जाओगे तो काफ़िर लोग ज़रुर कह बैठेगें कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
8وَلَئِنْ أَخَّرْنَا عَنْهُمُ الْعَذَابَ إِلَىٰ أُمَّةٍ مَّعْدُودَةٍ لَّيَقُولُنَّ مَا يَحْبِسُهُ ۗ أَلَا يَوْمَ يَأْتِيهِمْ لَيْسَ مَصْرُوفًا عَنْهُمْ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और अगर हम गिनती के चन्द रोज़ो तक उन पर अज़ाब करने में देर भी करें तो ये लोग (अपनी शरारत से) बेताम्मुल ज़रुर कहने लगेगें कि (हाए) अज़ाब को कौन सी चीज़ रोक रही है सुन रखो जिस दिन इन पर अज़ाब आ पडे तो (फिर) उनके टाले न टलेगा और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाया करते थे वह उनको हर तरह से घेर लेगा
9وَلَئِنْ أَذَقْنَا الْإِنسَانَ مِنَّا رَحْمَةً ثُمَّ نَزَعْنَاهَا مِنْهُ إِنَّهُ لَيَئُوسٌ كَفُورٌ
और अगर हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखाएं फिर उसको हम उससे छीन लें तो (उस वक्त) यक़ीनन बड़ा बेआस और नाशुक्रा हो जाता है
10وَلَئِنْ أَذَقْنَاهُ نَعْمَاءَ بَعْدَ ضَرَّاءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ السَّيِّئَاتُ عَنِّي ۚ إِنَّهُ لَفَرِحٌ فَخُورٌ
(और हमारी शिकायत करने लगता है) और अगर हम तकलीफ के बाद जो उसे पहुँचती थी राहत व आराम का जाएक़ा चखाए तो ज़रुर कहने लगता है कि अब तो सब सख्तियाँ मुझसे दफा हो गई इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा (जल्दी खुश) होने येख़ी बाज़ है
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
8आयत

अनुवाद — हूद 8

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Thursday, October 1, 2026

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