यूसुफ · 1/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
الر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ ۝١
Alif-Laaam-Raa; tilka Aayaatul Kitaabil Mubeen
📖 हिंदी अर्थ
अलिफ़ लाम रा ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الر: ये हुरूफ़े मुक़त्तआत (अलग-अलग अक्षर) हैं, जिनका असली ज्ञान केवल अल्लाह तआला को है। इन अक्षरों से क़ुरआन की ए'जाज़ (अद्भुतता) और बलाग़त का इशारा होता है।
  • تِلْكَ: यह उस चीज़ की ओर इशारा करता है जो सामने हो या जिसका ज़िक्र आगे आने वाला हो। यहाँ मुराद यह सूरह या क़ुरआन की आयात हैं।
  • الْكِتَابِ: यहाँ से मुराद क़ुरआन-ए-करीम है।
  • الْمُبِينِ: स्पष्ट, खुला हुआ, जो हक़ और बातिल, हलाल और हराम को वाज़ेह कर दे।

तफ़सीर:

"अलिफ़-लाम-रा।" ये हुरूफ़े मुक़त्तआत हैं, जिनके बारे में पहले भी गुज़र चुका है कि ये अरबी भाषा के वही अक्षर हैं जिनसे अरब अपनी बोलचाल करते हैं, फिर भी क़ुरआन की फ़साहत और बलाग़त के सामने सब आजिज़ हैं। यह ख़ुद क़ुरआन के मो'जिज़ा होने की दलील है।

फिर फ़रमाया: "ये (जो आयात इस सूरह में नाज़िल हुई हैं) वाज़ेह और रौशन किताब की आयात हैं।" यानी यह क़ुरआन अपने हलाल-हराम, हुदूद (सीमाओं), अहकाम (आदेशों) और ए'तिबार (नसीहत) के लिहाज़ से बिल्कुल साफ़ और खुली हुई किताब है। इसमें कोई पेचीदगी, इल्तिबास (उलझन) या ख़ामी नहीं। हर इंसान जो सच्चाई की तलाश में है, उसे यह किताब सीधा रास्ता दिखा देती है। यह किताब अपने हर दावे में स्पष्ट है, अपनी हर ख़बर में सच्ची है, और अपने हर हुक्म में अदल और हिकमत पर क़ायम है।


फ़ायदे (उपदेश):

  1. क़ुरआन की अज़मत और उसकी वाज़ेहियत (स्पष्टता) हमारे लिए रहनुमा है — जो शख्स इसे पढ़ता है और समझता है, उसे ज़िंदगी के हर मोड़ पर रौशनी मिलती है।
  2. हुरूफ़े मुक़त्तआत से हमें यह सबक़ मिलता है कि क़ुरआन अल्लाह का कलाम है और उसकी हर चीज़ में हिकमत है, चाहे हम उसे समझें या न समझें। हमारा ईमान उस पर उसी तरह है जैसे हमारा ईमान अल्लाह की ज़ात और सिफ़ात पर है।
  3. यह आयत हमें क़ुरआन से मुहब्बत और उसकी तिलावत व तदब्बुर (ग़ौर-ओ-फ़िक्र) की तरग़ीब देती है, क्योंकि यह किताब "मुबीन" है — यानी हर उस शख्स के लिए रौशनी है जो हिदायत चाहता है।
  4. क़ुरआन की स्पष्टता हमें बताती है कि इसमें कोई कमी नहीं, कोई टकराव नहीं, और यह क़यामत तक इंसानियत की रहनुमाई के लिए काफ़ी है। इसलिए हमें अपने मामलात (मामलों) में इसे ही फ़ैसला करने वाला बनाना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-3 — यूसुफ

1الر ۚ تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ
अलिफ़ लाम रा ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें है
2إِنَّا أَنزَلْنَاهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لَّعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
हमने इस किताब (क़ुरान) को अरबी में नाज़िल किया है ताकि तुम समझो
3نَحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ أَحْسَنَ الْقَصَصِ بِمَا أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ هَٰذَا الْقُرْآنَ وَإِن كُنتَ مِن قَبْلِهِ لَمِنَ الْغَافِلِينَ
(ऐ रसूल) हम तुम पर ये क़ुरान नाज़िल करके तुम से एक निहायत उम्दा क़िस्सा बयान करते हैं अगरचे तुम इसके पहले (उससे) बिल्कुल बेख़बर थे
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
1आयत

अनुवाद — यूसुफ 1

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सूरा आयत 1/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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