यूसुफ · 36/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
وَدَخَلَ مَعَهُ السِّجْنَ فَتَيَانِ ۖ قَالَ أَحَدُهُمَا إِنِّي أَرَانِي أَعْصِرُ خَمْرًا ۖ وَقَالَ الْآخَرُ إِنِّي أَرَانِي أَحْمِلُ فَوْقَ رَأْسِي خُبْزًا تَأْكُلُ الطَّيْرُ مِنْهُ ۖ نَبِّئْنَا بِتَأْوِيلِهِ ۖ إِنَّا نَرَاكَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ ۝٣٦
Wa dakhala ma`ahussijna fata yaan; qaala ahaduhumaaa inneee araaneee a`siru khamranw wa qaalal aakharu inneee khubzan taakulut tairu minh; nabbi `naa bitaaweelihee innaa naraaka minal muhsineen
📖 हिंदी अर्थ
कि कुछ मियाद के लिए उनको क़ैद ही करे दें और यूसुफ के साथ और भी दो जवान आदमी (क़ैद ख़ाने) में दाख़िल हुए (चन्द दिन के बाद) उनमें से एक ने कहा कि मैने ख्वाब में देखा है कि मै (शराब बनाने के वास्ते अंगूर) निचोड़ रहा हूँ और दूसरे ने कहा (मै ने भी ख्वाब में) अपने को देखा कि मै अपने सर पर रोटिया उठाए हुए हूँ और चिड़ियाँ उसे खा रही हैं (यूसुफ) हमको उसकी ताबीर (मतलब) बताओ क्योंकि हम तुमको यक़ीनन नेकी कारों से समझते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَتَيَانِ: दो युवक (यहाँ राजा के दो नौकर/गुलाम)।
  • أَعْصِرُ خَمْرًا: अंगूर निचोड़ रहा हूँ (अर्थात शराब बनाने के लिए अंगूर दबा रहा हूँ)।
  • تَأْوِيلِهِ: इसकी व्याख्या, इसका अंतिम परिणाम और अर्थ।
  • مِنَ الْمُحْسِنِينَ: भलाई करने वालों में से, अच्छे आचरण और ज्ञान वालों में से।

विस्तृत व्याख्या:

जब यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को जेल में डाला गया, तो उनके साथ राजा के दो और युवा नौकर भी जेल में आए। ये दोनों राजा के करीबी सेवक थे—एक शराब पिलाने वाला (साक़ी) और दूसरा भोजन बनाने वाला (ख़ब्बाज़)। एक दिन इन दोनों ने सपने देखे और वे उनके अर्थ से अनजान थे।

पहले युवक (साक़ी) ने कहा: "मैंने सपने में देखा कि मैं अंगूर निचोड़ रहा हूँ ताकि शराब बने।" दूसरे युवक (ख़ब्बाज़) ने कहा: "मैंने सपने में देखा कि मैं अपने सिर के ऊपर रोटियाँ लिए हुए हूँ और पक्षी उन्हें खा रहे हैं।" दोनों ने यूसुफ (अलैहिस्सलाम) से कहा: "हमें इन सपनों का अर्थ बताइए, क्योंकि हम आपको नेकी करने वालों और अच्छे ज्ञान वालों में से देखते हैं।"

यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने उनकी बात सुनी और उन्हें सपनों का सही अर्थ बताने का वादा किया। यह घटना उनके ज्ञान और ईमान की गवाही देती है, क्योंकि उन्होंने इस अवसर का उपयोग उन्हें सच्चे धर्म की ओर बुलाने के लिए भी किया (जैसा कि आगे की आयतों में आता है)।


शिक्षाएँ और लाभ:

  1. अच्छे आचरण का प्रभाव: यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की नेकी और ईमानदारी का असर यह था कि जेल के कैदी भी उन्हें भला और ज्ञानी व्यक्ति मानते थे। यह हमें सिखाता है कि अच्छा चरित्र और ईमानदारी हर जगह सम्मान दिलाती है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
  2. सपनों की व्याख्या का ज्ञान: यह घटना बताती है कि सपनों का सही अर्थ निकालना एक विशेष ज्ञान है जो अल्लाह अपने चुने हुए बंदों को देता है। यह ज्ञान यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की नबुव्वत की निशानी थी।
  3. मुसीबत में भी दूसरों की मदद: जेल में होते हुए भी यूसुफ (अलैहिस्सलाम) ने दूसरों की मदद करने से इनकार नहीं किया। यह हमें सिखाता है कि कठिन समय में भी हमें दूसरों के काम आना चाहिए और अपनी परेशानियों को दूसरों की मदद करने में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।
  4. अल्लाह की योजना: यह घटना दिखाती है कि अल्लाह कैसे मुसीबत के रास्ते से भी भलाई निकालता है। जेल ही वह जगह बनी जहाँ से यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की शान बढ़ी और आगे चलकर वे मिस्र के खज़ाने के मुखिया बने।
  5. सच्चाई की तलाश: दोनों युवकों ने सपनों का अर्थ जानने के लिए सच्चे इंसान की तलाश की और यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को पाया। यह हमें सिखाता है कि सच्चे ज्ञान और सही राह की तलाश में हमें उन लोगों की ओर रुख करना चाहिए जो अल्लाह से डरने वाले और नेक हों।


📜 आयत 34-38 — यूसुफ

34فَاسْتَجَابَ لَهُ رَبُّهُ فَصَرَفَ عَنْهُ كَيْدَهُنَّ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
तो उनके परवरदिगार ने उनकी सुन ली और उन औरतों के मकर को दफा कर दिया इसमें शक़ नहीं कि वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
35ثُمَّ بَدَا لَهُم مِّن بَعْدِ مَا رَأَوُا الْآيَاتِ لَيَسْجُنُنَّهُ حَتَّىٰ حِينٍ
फिर (अज़ीज़ मिस्र और उसके लोगों ने) बावजूद के (यूसुफ की पाक दामिनी की) निशानियाँ देख ली थी उसके बाद भी उनको यही मुनासिब मालूम हुआ
36وَدَخَلَ مَعَهُ السِّجْنَ فَتَيَانِ ۖ قَالَ أَحَدُهُمَا إِنِّي أَرَانِي أَعْصِرُ خَمْرًا ۖ وَقَالَ الْآخَرُ إِنِّي أَرَانِي أَحْمِلُ فَوْقَ رَأْسِي خُبْزًا تَأْكُلُ الطَّيْرُ مِنْهُ ۖ نَبِّئْنَا بِتَأْوِيلِهِ ۖ إِنَّا نَرَاكَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ
कि कुछ मियाद के लिए उनको क़ैद ही करे दें और यूसुफ के साथ और भी दो जवान आदमी (क़ैद ख़ाने) में दाख़िल हुए (चन्द दिन के बाद) उनमें से एक ने कहा कि मैने ख्वाब में देखा है कि मै (शराब बनाने के वास्ते अंगूर) निचोड़ रहा हूँ और दूसरे ने कहा (मै ने भी ख्वाब में) अपने को देखा कि मै अपने सर पर रोटिया उठाए हुए हूँ और चिड़ियाँ उसे खा रही हैं (यूसुफ) हमको उसकी ताबीर (मतलब) बताओ क्योंकि हम तुमको यक़ीनन नेकी कारों से समझते हैं
37قَالَ لَا يَأْتِيكُمَا طَعَامٌ تُرْزَقَانِهِ إِلَّا نَبَّأْتُكُمَا بِتَأْوِيلِهِ قَبْلَ أَن يَأْتِيَكُمَا ۚ ذَٰلِكُمَا مِمَّا عَلَّمَنِي رَبِّي ۚ إِنِّي تَرَكْتُ مِلَّةَ قَوْمٍ لَّا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ
यूसुफ ने कहा जो खाना तुम्हें (क़ैद ख़ाने से) दिया जाता है वह आने भी न पाएगा कि मै उसके तुम्हारे पास आने के क़ब्ल ही तुम्हे उसकी ताबीर बताऊँगा ये ताबीरे ख्वाब भी उन बातों के साथ है जो मेरे परवरदिगार ने मुझे तालीम फरमाई है मैं उन लोगों का मज़हब छोड़ बैठा हूँ जो ख़ुदा पर ईमान नहीं लाते और वह लोग आख़िरत के भी मुन्किर है
38وَاتَّبَعْتُ مِلَّةَ آبَائِي إِبْرَاهِيمَ وَإِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ ۚ مَا كَانَ لَنَا أَن نُّشْرِكَ بِاللَّهِ مِن شَيْءٍ ۚ ذَٰلِكَ مِن فَضْلِ اللَّهِ عَلَيْنَا وَعَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ
और मैं तो अपने बाप दादा इबराहीम व इसहाक़ व याक़ूब के मज़हब पर चलने वाला हूँ मुनासिब नहीं कि हम ख़ुदा के साथ किसी चीज़ को (उसका) शरीक बनाएँ ये भी ख़ुदा की एक बड़ी मेहरबानी है हम पर भी और तमाम लोगों पर मगर बहुतेरे लोग उसका शुक्रिया (भी) अदा नहीं करते
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अनुवाद — यूसुफ 36

सूरा यूसुफ आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि कुछ मियाद के लिए उनको क़ैद ही करे दें…

सूरा आयत 36/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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