अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بَدَا لَهُمْ: उन्हें दिखाई दिया / उनके मन में विचार आया
- الْآيَاتِ: स्पष्ट प्रमाण, निशानियाँ (यहाँ: यूसुफ़ अलैहिस्सलाम की बेगुनाही के सबूत)
- لَيَسْجُنُنَّهُ: वे उसे अवश्य क़ैद में डालेंगे
- حَتَّىٰ حِينٍ: एक निश्चित समय तक
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ अलैहिस्सलाम की पाकदामनी और सच्चाई के स्पष्ट प्रमाण सामने आ गए—क़मीज़ पीछे से फटी हुई थी, गवाह ने गवाही दी, और औरतों ने अपने हाथ काट लिए—तो अज़ीज़ (मिस्र के शासक) और उसके साथियों को यक़ीन हो गया कि यूसुफ़ बिल्कुल बेगुनाह है। लेकिन इसके बावजूद, उन्होंने उसे क़ैद करने का फ़ैसला किया।
उनके इस फ़ैसले के पीछे असल वजह यह थी कि उन्हें अपनी बेइज़्ज़ती और रुसवाई का डर था। अगर यूसुफ़ को आज़ाद छोड़ दिया जाता, तो पूरे शहर में यह बात फैल जाती कि अज़ीज़ की बीवी ने एक ग़ुलाम को बहकाने की कोशिश की और नाकाम रही। यह शर्मनाक बात उनके लिए बहुत बड़ी बदनामी का सबब बनती। इसलिए उन्होंने सोचा कि यूसुफ़ को कुछ समय के लिए क़ैद में डाल देना ही बेहतर है, ताकि लोगों की ज़ुबानें बंद हो जाएँ और यह मामला धीरे-धीरे भुला दिया जाए।
यह उनकी नाइंसाफ़ी थी—एक बेगुनाह इंसान को सिर्फ़ अपनी बदनामी से बचने के लिए क़ैद कर दिया। उन्होंने सच्चाई को तो मान लिया, लेकिन उस पर अमल नहीं किया। यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने इस ज़ुल्म को सब्र के साथ बर्दाश्त किया, और यही उनकी आज़माइश का हिस्सा था।
फ़ायदे (सबक):
- सच्चाई ज़ाहिर होने पर भी ज़ालिम अपनी ज़िद पर अड़ा रहता है — यह आयत हमें सिखाती है कि कुछ लोग सच्चाई जानने के बावजूद अपनी दुनियावी मस्लहत के लिए नाइंसाफ़ी करते हैं। हमें हमेशा सच्चाई का साथ देना चाहिए, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ।
- मुसीबत में सब्र का इनाम बहुत बड़ा होता है — यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने क़ैद में भी अपना सब्र और भरोसा अल्लाह पर नहीं छोड़ा। अल्लाह ने उन्हें बाद में मिस्र का ख़ज़ाना सौंपा। यह हमारे लिए सबक़ है कि मुसीबतें आज़माइश हैं, और सब्र करने वालों के लिए अल्लाह की तरफ़ से बेहतरीन इनाम है।
- बेगुनाह पर इल्ज़ाम लगाना बहुत बड़ा गुनाह है — इस क़िस्से में हम देखते हैं कि कैसे एक बेगुनाह इंसान को झूठे इल्ज़ाम की वजह से क़ैद होना पड़ा। हमें कभी किसी पर झूठा इल्ज़ाम नहीं लगाना चाहिए, और अगर किसी पर इल्ज़ाम लगे तो सच्चाई की तफ़तीश करनी चाहिए।
- अल्लाह की मदद हमेशा साथ होती है — यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को क़ैद में डाला गया, लेकिन अल्लाह ने उन्हें वहीं से निकालकर बुलंदी दी। यह हमें सिखाता है कि इंसान की साज़िशें अल्लाह के इरादे के आगे कुछ नहीं कर सकतीं। जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता।
- पाकदामनी और परहेज़गारी की बरकत — यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने गुनाह से बचने के लिए क़ैद को तरजीह दी थी (जैसा कि पहले की आयतों में आया है), और अल्लाह ने उन्हें इसी पाकदामनी की बरकत से बड़ा मुक़ाम अता किया। यह हमें सिखाता है कि गुनाह से बचने की कोशिश करने वालों को अल्लाह दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है।
📜 आयत 33-37 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 35
सूरा यूसुफ आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर (अज़ीज़ मिस्र और उसके लोगों ने) बावजूद के (यूसुफ…सूरा आयत 35/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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