अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِالْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाणों और चमत्कारों के साथ।
- وَالزُّبُرِ: किताबों (आसमानी ग्रंथों) के साथ। 'ज़ुबुर' 'ज़बूर' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है लिखी हुई किताब।
- الذِّكْر: यहाँ इससे अभिप्राय कुरआन है, जो सबसे बड़ी याददिहानी और नसीहत है।
- لِتُبَيِّنَ: ताकि आप स्पष्ट कर दें।
- يَتَفَكَّرُونَ: वे चिंतन-मनन करें और सोच-समझकर सीखें।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने रसूलों को भेजा, और उन्हें दो चीज़ें अता कीं: पहली स्पष्ट निशानियाँ और चमत्कार, जो उनकी सच्चाई की गवाही देती थीं, और दूसरी आसमानी किताबें, जिनमें हिदायत और क़ानून दर्ज थे। ये किताबें लोगों के लिए रहनुमा बनकर आईं, ताकि वे अंधेरों से निकलकर रौशनी की ओर आएँ।
फिर अल्लाह तआला ने अपने आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद ﷺ की तरफ़ कुरआन उतारा, जिसे 'ज़िक्र' कहा गया। इसका मक़सद यह बताया गया कि आप ﷺ लोगों के लिए वह चीज़ें स्पष्ट कर दें जो उन पर उतारी गई हैं। यानी कुरआन में जो आम तौर पर संक्षिप्त या इशारे में बताई गई बातें हैं — जैसे नमाज़ के तरीक़े, ज़कात के निसाब, हज के मनासिक, और दूसरे अहकाम — उन्हें आप ﷺ अपने क़ौल (बयान) और अपने अमल (व्यवहार) से खोलकर समझाएँ। इससे पता चलता है कि सुन्नत (आप ﷺ का तरीक़ा) भी कुरआन की तरह ही वही और हिदायत है, क्योंकि वह कुरआन की व्याख्या है।
आख़िर में अल्लाह ने यह हिकमत बयान की कि यह सब कुछ इसलिए किया गया ताकि लोग ग़ौर-फ़िक्र करें। वे कुरआन की आयात पर दिमाग़ लगाएँ, उसके मतलब को समझें, और उससे नसीहत हासिल करें। जब वे ऐसा करेंगे, तो उन्हें हक़ दिखाई देगा और वे उस पर चलने की तौफ़ीक़ पाएँगे।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह तआला ने हमेशा हिदायत के लिए रसूल भेजे और उनके साथ स्पष्ट प्रमाण और किताबें दीं, ताकि किसी के पास बहाने की गुंजाइश न रहे। यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ की निशानी है।
- कुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समझने और उस पर अमल करने के लिए उतारा गया है। हमें चाहिए कि हम इसकी आयात पर ग़ौर करें और अपनी ज़िंदगी को इसके मुताबिक़ ढालें।
- नबी ﷺ का काम सिर्फ़ कुरआन पहुँचाना नहीं था, बल्कि उसकी व्याख्या करना भी था। इसलिए कुरआन को समझने के लिए हदीस और सुन्नत की ओर रुजू करना ज़रूरी है। यही असली रास्ता है।
- चिंतन और विचार (तफ़क्कुर) एक बहुत बड़ी नेमत है। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है ताकि हम उसका इस्तेमाल करें, सच्चाई को पहचानें और अपने रब की इबादत में लगें। जो लोग सोचते नहीं, वे गुमराही में पड़े रहते हैं।
- यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम दिमाग़ और दिल दोनों को खिताब करता है — दिमाग़ से सोचो, दिल से समझो, और फिर अमल करो। यही कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 42-46 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 44
सूरा अन-नहल आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारे पास क़ुरान नाज़िल किया है ताकि जो एहकाम…सूरा आयत 44/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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