अन-नहल · 44/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
بِالْبَيِّنَاتِ وَالزُّبُرِ ۗ وَأَنزَلْنَا إِلَيْكَ الذِّكْرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ إِلَيْهِمْ وَلَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ ۝٤٤
Bilbaiyinaati waz Zubur; wa anzalnaaa ilaikaz Zikra litubaiyina linnaasi maa nuzzila ilaihim wa la`allahum yatafakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारे पास क़ुरान नाज़िल किया है ताकि जो एहकाम लोगों के लिए नाज़िल किए गए है तुम उनसे साफ साफ बयान कर दो ताकि वह लोग खुद से कुछ ग़ौर फिक्र करें

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِالْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट प्रमाणों और चमत्कारों के साथ।
  • وَالزُّبُرِ: किताबों (आसमानी ग्रंथों) के साथ। 'ज़ुबुर' 'ज़बूर' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है लिखी हुई किताब।
  • الذِّكْر: यहाँ इससे अभिप्राय कुरआन है, जो सबसे बड़ी याददिहानी और नसीहत है।
  • لِتُبَيِّنَ: ताकि आप स्पष्ट कर दें।
  • يَتَفَكَّرُونَ: वे चिंतन-मनन करें और सोच-समझकर सीखें।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने रसूलों को भेजा, और उन्हें दो चीज़ें अता कीं: पहली स्पष्ट निशानियाँ और चमत्कार, जो उनकी सच्चाई की गवाही देती थीं, और दूसरी आसमानी किताबें, जिनमें हिदायत और क़ानून दर्ज थे। ये किताबें लोगों के लिए रहनुमा बनकर आईं, ताकि वे अंधेरों से निकलकर रौशनी की ओर आएँ।

फिर अल्लाह तआला ने अपने आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद ﷺ की तरफ़ कुरआन उतारा, जिसे 'ज़िक्र' कहा गया। इसका मक़सद यह बताया गया कि आप ﷺ लोगों के लिए वह चीज़ें स्पष्ट कर दें जो उन पर उतारी गई हैं। यानी कुरआन में जो आम तौर पर संक्षिप्त या इशारे में बताई गई बातें हैं — जैसे नमाज़ के तरीक़े, ज़कात के निसाब, हज के मनासिक, और दूसरे अहकाम — उन्हें आप ﷺ अपने क़ौल (बयान) और अपने अमल (व्यवहार) से खोलकर समझाएँ। इससे पता चलता है कि सुन्नत (आप ﷺ का तरीक़ा) भी कुरआन की तरह ही वही और हिदायत है, क्योंकि वह कुरआन की व्याख्या है।

आख़िर में अल्लाह ने यह हिकमत बयान की कि यह सब कुछ इसलिए किया गया ताकि लोग ग़ौर-फ़िक्र करें। वे कुरआन की आयात पर दिमाग़ लगाएँ, उसके मतलब को समझें, और उससे नसीहत हासिल करें। जब वे ऐसा करेंगे, तो उन्हें हक़ दिखाई देगा और वे उस पर चलने की तौफ़ीक़ पाएँगे।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह तआला ने हमेशा हिदायत के लिए रसूल भेजे और उनके साथ स्पष्ट प्रमाण और किताबें दीं, ताकि किसी के पास बहाने की गुंजाइश न रहे। यह अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ की निशानी है।
  2. कुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समझने और उस पर अमल करने के लिए उतारा गया है। हमें चाहिए कि हम इसकी आयात पर ग़ौर करें और अपनी ज़िंदगी को इसके मुताबिक़ ढालें।
  3. नबी ﷺ का काम सिर्फ़ कुरआन पहुँचाना नहीं था, बल्कि उसकी व्याख्या करना भी था। इसलिए कुरआन को समझने के लिए हदीस और सुन्नत की ओर रुजू करना ज़रूरी है। यही असली रास्ता है।
  4. चिंतन और विचार (तफ़क्कुर) एक बहुत बड़ी नेमत है। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है ताकि हम उसका इस्तेमाल करें, सच्चाई को पहचानें और अपने रब की इबादत में लगें। जो लोग सोचते नहीं, वे गुमराही में पड़े रहते हैं।
  5. यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम दिमाग़ और दिल दोनों को खिताब करता है — दिमाग़ से सोचो, दिल से समझो, और फिर अमल करो। यही कामयाबी की कुंजी है।


📜 आयत 42-46 — अन-नहल

42الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
और अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं (आख़िरत का सवाब) जानते होते
43وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِي إِلَيْهِمْ ۚ فَاسْأَلُوا أَهْلَ الذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
और (ऐ रसूल) तुम से पहले आदमियों ही को पैग़म्बर बना बनाकर भेजा किए जिन की तरफ हम वहीं भेजते थे तो (तुम अहले मक्का से कहो कि) अगर तुम खुद नहीं जानते हो तो अहले ज़िक्र (आलिमों से) पूछो (और उन पैग़म्बरों को भेजा भी तो) रौशन दलीलों और किताबों के साथ
44بِالْبَيِّنَاتِ وَالزُّبُرِ ۗ وَأَنزَلْنَا إِلَيْكَ الذِّكْرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ إِلَيْهِمْ وَلَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
और तुम्हारे पास क़ुरान नाज़िल किया है ताकि जो एहकाम लोगों के लिए नाज़िल किए गए है तुम उनसे साफ साफ बयान कर दो ताकि वह लोग खुद से कुछ ग़ौर फिक्र करें
45أَفَأَمِنَ الَّذِينَ مَكَرُوا السَّيِّئَاتِ أَن يَخْسِفَ اللَّهُ بِهِمُ الْأَرْضَ أَوْ يَأْتِيَهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ
तो क्या जो लोग बड़ी बड़ी मक्कारियाँ (शिर्क वग़ैरह) करते थे (उनको इस बात का इत्मिनान हो गया है (और मुत्तलिक़ ख़ौफ नहीं) कि ख़ुदा उन्हें ज़मीन में धसा दे या ऐसी तरफ से उन पर अज़ाब आ पहुँचे कि उसकी उनको ख़बर भी न हो
46أَوْ يَأْخُذَهُمْ فِي تَقَلُّبِهِمْ فَمَا هُم بِمُعْجِزِينَ
उनके चलते फिरते (ख़ुदा का अज़ाब) उन्हें गिरफ्तार करे तो वह लोग उसे ज़ेर नहीं कर सकते
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीRevelation
44आयत

अनुवाद — अन-नहल 44

सूरा अन-नहल आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारे पास क़ुरान नाज़िल किया है ताकि जो एहकाम…

सूरा आयत 44/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए