अन-नहल · 43/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِي إِلَيْهِمْ ۚ فَاسْأَلُوا أَهْلَ الذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ ۝٤٣
Wa maaa arsalnaa min qablika illaa rijaalan nooheee ilaihim; fas`alooo ahlaz zikri in kuntum laa ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम से पहले आदमियों ही को पैग़म्बर बना बनाकर भेजा किए जिन की तरफ हम वहीं भेजते थे तो (तुम अहले मक्का से कहो कि) अगर तुम खुद नहीं जानते हो तो अहले ज़िक्र (आलिमों से) पूछो (और उन पैग़म्बरों को भेजा भी तो) रौशन दलीलों और किताबों के साथ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رِجَالًا: पुरुष (मर्द), स्त्रियाँ नहीं।
  • نُوحِي إِلَيْهِمْ: हम उनकी ओर वह्य (प्रकाशना) भेजते हैं।
  • أَهْلَ الذِّكْرِ: ज्ञान वालों से, यानी पिछली किताबों (तौरात, इंजील) के विद्वानों से।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे पैगंबर! हमने आपसे पहले भी जितने भी रसूल भेजे, वे सभी इंसान ही थे—पुरुष, फ़रिश्ते नहीं। हम उन्हीं की ओर वह्य भेजते थे और उन्हें अपना पैग़ाम सौंपते थे। यह हमारी सुन्नत (रीति) रही है कि हमने किसी औरत या फ़रिश्ते को आम दावत के लिए रसूल बनाकर नहीं भेजा।

जब क़ुरैश के मुशरिकों ने यह कहा कि "अल्लाह इससे बड़ा है कि उसका रसूल एक इंसान हो, उसे तो फ़रिश्ता भेजना चाहिए था," तो अल्लाह ने यह आयत उतारी। उनसे कहा गया: अगर तुम्हें यह बात मालूम नहीं कि पिछले रसूल भी इंसान ही थे, तो उन लोगों से पूछ लो जिनके पास पहले की किताबें (तौरात और इंजील) हैं। वे तुम्हें बता देंगे कि मूसा, ईसा और दूसरे नबी सब इंसान ही थे, फ़रिश्ते नहीं।

यह आयत सिर्फ़ इसी मसले के लिए नहीं, बल्कि आम तौर पर हर उस मामले में दलील है जहाँ इंसान को खुद इल्म न हो—उसे चाहिए कि जानने वालों (विद्वानों) से पूछे। यही तरीका सीखने और समझने का है।


फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह ने हमेशा इंसानों को ही रसूल बनाकर भेजा, ताकि लोग उनसे सीधे मिल सकें, उनकी ज़िंदगी देख सकें और उनसे सीख सकें। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने फ़रिश्तों को नहीं, बल्कि हमारी ही जात के लोगों को पैग़ंबर बनाया।
  2. जिसे इल्म न हो, उसे चाहिए कि बिना शर्म किए जानने वालों से पूछे। यह अल्लाह का हुक्म है और इसी में इंसान की भलाई है। पूछना इल्म की कुंजी है।
  3. इस आयत से यह भी पता चलता है कि दीन के मामलों में सिर्फ़ अपनी राय पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उन लोगों की तरफ रुजू करना चाहिए जिन्हें दीन की समझ और इल्म हासिल है।
  4. इस्लाम में औरतों का मुकाम बुलंद है, लेकिन नबुव्वत और रिसालत का मंसब सिर्फ़ मर्दों के लिए खास है—यह अल्लाह का फ़ैसला है, और उसकी हर तदबीर में हिकमत है।


📜 आयत 41-45 — सूरा अन-नहल

41وَالَّذِينَ هَاجَرُوا فِي اللَّهِ مِن بَعْدِ مَا ظُلِمُوا لَنُبَوِّئَنَّهُمْ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً ۖ وَلَأَجْرُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
और जिन लोगों ने (कुफ्फ़ार के ज़ुल्म पर ज़ुल्म सहने के बाद ख़ुदा की खुशी के लिए घर बार छोड़ा हिजरत की हम उनको ज़रुर दुनिया में भी अच्छी जगह बिठाएँगें और आख़िरत की जज़ा तो उससे कहीं बढ़ कर है काश ये लोग जिन्होंने ख़ुदा की राह में सख्तियों पर सब्र किया
42الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
और अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं (आख़िरत का सवाब) जानते होते
43وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِي إِلَيْهِمْ ۚ فَاسْأَلُوا أَهْلَ الذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
और (ऐ रसूल) तुम से पहले आदमियों ही को पैग़म्बर बना बनाकर भेजा किए जिन की तरफ हम वहीं भेजते थे तो (तुम अहले मक्का से कहो कि) अगर तुम खुद नहीं जानते हो तो अहले ज़िक्र (आलिमों से) पूछो (और उन पैग़म्बरों को भेजा भी तो) रौशन दलीलों और किताबों के साथ
44بِالْبَيِّنَاتِ وَالزُّبُرِ ۗ وَأَنزَلْنَا إِلَيْكَ الذِّكْرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ إِلَيْهِمْ وَلَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
और तुम्हारे पास क़ुरान नाज़िल किया है ताकि जो एहकाम लोगों के लिए नाज़िल किए गए है तुम उनसे साफ साफ बयान कर दो ताकि वह लोग खुद से कुछ ग़ौर फिक्र करें
45أَفَأَمِنَ الَّذِينَ مَكَرُوا السَّيِّئَاتِ أَن يَخْسِفَ اللَّهُ بِهِمُ الْأَرْضَ أَوْ يَأْتِيَهُمُ الْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ
तो क्या जो लोग बड़ी बड़ी मक्कारियाँ (शिर्क वग़ैरह) करते थे (उनको इस बात का इत्मिनान हो गया है (और मुत्तलिक़ ख़ौफ नहीं) कि ख़ुदा उन्हें ज़मीन में धसा दे या ऐसी तरफ से उन पर अज़ाब आ पहुँचे कि उसकी उनको ख़बर भी न हो
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
43आयत

अनुवाद — अन-नहल 43

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Saturday, October 3, 2026

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