अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رِجَالًا: पुरुष (मर्द), स्त्रियाँ नहीं।
- نُوحِي إِلَيْهِمْ: हम उनकी ओर वह्य (प्रकाशना) भेजते हैं।
- أَهْلَ الذِّكْرِ: ज्ञान वालों से, यानी पिछली किताबों (तौरात, इंजील) के विद्वानों से।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे पैगंबर! हमने आपसे पहले भी जितने भी रसूल भेजे, वे सभी इंसान ही थे—पुरुष, फ़रिश्ते नहीं। हम उन्हीं की ओर वह्य भेजते थे और उन्हें अपना पैग़ाम सौंपते थे। यह हमारी सुन्नत (रीति) रही है कि हमने किसी औरत या फ़रिश्ते को आम दावत के लिए रसूल बनाकर नहीं भेजा।
जब क़ुरैश के मुशरिकों ने यह कहा कि "अल्लाह इससे बड़ा है कि उसका रसूल एक इंसान हो, उसे तो फ़रिश्ता भेजना चाहिए था," तो अल्लाह ने यह आयत उतारी। उनसे कहा गया: अगर तुम्हें यह बात मालूम नहीं कि पिछले रसूल भी इंसान ही थे, तो उन लोगों से पूछ लो जिनके पास पहले की किताबें (तौरात और इंजील) हैं। वे तुम्हें बता देंगे कि मूसा, ईसा और दूसरे नबी सब इंसान ही थे, फ़रिश्ते नहीं।
यह आयत सिर्फ़ इसी मसले के लिए नहीं, बल्कि आम तौर पर हर उस मामले में दलील है जहाँ इंसान को खुद इल्म न हो—उसे चाहिए कि जानने वालों (विद्वानों) से पूछे। यही तरीका सीखने और समझने का है।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह ने हमेशा इंसानों को ही रसूल बनाकर भेजा, ताकि लोग उनसे सीधे मिल सकें, उनकी ज़िंदगी देख सकें और उनसे सीख सकें। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने फ़रिश्तों को नहीं, बल्कि हमारी ही जात के लोगों को पैग़ंबर बनाया।
- जिसे इल्म न हो, उसे चाहिए कि बिना शर्म किए जानने वालों से पूछे। यह अल्लाह का हुक्म है और इसी में इंसान की भलाई है। पूछना इल्म की कुंजी है।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि दीन के मामलों में सिर्फ़ अपनी राय पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उन लोगों की तरफ रुजू करना चाहिए जिन्हें दीन की समझ और इल्म हासिल है।
- इस्लाम में औरतों का मुकाम बुलंद है, लेकिन नबुव्वत और रिसालत का मंसब सिर्फ़ मर्दों के लिए खास है—यह अल्लाह का फ़ैसला है, और उसकी हर तदबीर में हिकमत है।
📜 आयत 41-45 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 43
सूरा अन-नहल आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम से पहले आदमियों ही को पैग़म्बर…सूरा आयत 43/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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