अल-कहफ · 41/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
أَوْ يُصْبِحَ مَاؤُهَا غَوْرًا فَلَن تَسْتَطِيعَ لَهُ طَلَبًا ۝٤١
Aw yusbiha maaa`uhaaa ghawran falan tastatee`a lahoo talabaa
📖 हिंदी अर्थ
उसका पानी नीचे उतर (के खुश्क) हो जाए फिर तो उसको किसी तरह तलब न कर सके

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • غَوْرًا (ग़ौरन): ज़मीन में गहराई तक धँसा हुआ, ऐसा पानी जो ज़मीन के अंदर इतना गहरा चला जाए कि उस तक पहुँचना नामुमकिन हो जाए।
  • فَلَن تَسْتَطِيعَ لَهُ طَلَبًا (फ़लन तस्ततीअ लहू तलबन): तो तुम उसे ढूँढ़ने और वापस लाने की कोई ताक़त न रखोगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वही मौक़ा है जब एक ईमानदार और नेक इंसान अपने उस दोस्त को नसीहत कर रहा है जो अपनी बाग़ और दौलत पर इतना घमंडी हो गया था कि उसे भूल गया कि यह सब उसे अल्लाह की तरफ़ से मिला है। वह उसे समझाता है कि अगर तूने अल्लाह का शुक्र नहीं किया और अपनी ताक़त पर इतना नाज़ किया, तो अल्लाह चाहे तो तेरे इस बाग़ को ऐसा तबाह कर दे कि उसका पानी ज़मीन में इतना गहरा धँस जाए कि तू उसे कभी वापस न निकाल सके। जब पानी ही नहीं होगा, तो बाग़ अपने आप ख़त्म हो जाएगा — पेड़ सूख जाएँगे, ज़मीन बंजर हो जाएगी, और तेरी सारी दौलत और शानो-शौकत मिट्टी में मिल जाएगी।

यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखा रहा है कि ये दुनिया की चीज़ें — पैसा, ज़मीन, बाग़, औलाद — सब कुछ अल्लाह के हाथ में हैं। जिस पल वह चाहे, उन्हें छीन सकता है। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी किसी भी नेअमत पर घमंड न करे, बल्कि हर वक़्त अल्लाह का शुक्र अदा करे और यह याद रखे कि यह सब अल्लाह की देन है। जब हम अपने अंदर यह अच्छाई पैदा कर लेंगे कि हमारे पास जो कुछ भी है, वह अल्लाह की मेहरबानी से है, तो हम कभी किसी को नीचा नहीं समझेंगे और न ही अपनी दौलत पर इतराएँगे।

यह क़िस्सा हमें यह भी सिखाता है कि अल्लाह की नेअमतों की हिफ़ाज़त का सबसे बेहतरीन तरीक़ा शुक्रगुज़ारी है। जो इंसान अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और देता है, और जो कुफ़्रान (नाशुक्री) करता है, उससे नेअमतें छीन ली जाती हैं। यही वह प्यारा पैग़ाम है जो हमें अपने रब से जोड़ता है और हमें सिखाता है कि सच्ची कामयाबी उसी की है जो अल्लाह के सामने अपने आपको छोटा रखे और उसकी बड़ाई को पहचाने।



📜 आयत 39-43 — सूरा अल-कहफ

39وَلَوْلَا إِذْ دَخَلْتَ جَنَّتَكَ قُلْتَ مَا شَاءَ اللَّهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ ۚ إِن تَرَنِ أَنَا أَقَلَّ مِنكَ مَالًا وَوَلَدًا
और जब तू अपने बाग़ में आया तो (ये) क्यों न कहा कि ये सब (माशा अल्लाह ख़ुदा ही के चाहने से हुआ है (मेरा कुछ भी नहीं क्योंकि) बग़ैर ख़ुदा की (मदद) के (किसी में) कुछ सकत नहीं अगर माल और औलाद की राह से तू मुझे कम समझता है
40فَعَسَىٰ رَبِّي أَن يُؤْتِيَنِ خَيْرًا مِّن جَنَّتِكَ وَيُرْسِلَ عَلَيْهَا حُسْبَانًا مِّنَ السَّمَاءِ فَتُصْبِحَ صَعِيدًا زَلَقًا
तो अनक़ीरब ही मेरा परवरदिगार मुझे वह बाग़ अता फरमाएगा जो तेरे बाग़ से कहीं बेहतर होगा और तेरे बाग़ पर कोई ऐसी आफत आसमान से नाज़िल करे कि (ख़ाक सियाह) होकर चटियल चिकना सफ़ाचट मैदान हो जाए
41أَوْ يُصْبِحَ مَاؤُهَا غَوْرًا فَلَن تَسْتَطِيعَ لَهُ طَلَبًا
उसका पानी नीचे उतर (के खुश्क) हो जाए फिर तो उसको किसी तरह तलब न कर सके
42وَأُحِيطَ بِثَمَرِهِ فَأَصْبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيْهِ عَلَىٰ مَا أَنفَقَ فِيهَا وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي لَمْ أُشْرِكْ بِرَبِّي أَحَدًا
(चुनान्चे अज़ाब नाज़िल हुआ) और उसके (बाग़ के) फल (आफत में) घेर लिए गए तो उस माल पर जो बाग़ की तैयारी में सर्फ (ख़र्च) किया था (अफसोस से) हाथ मलने लगा और बाग़ की ये हालत थी कि अपनी टहनियों पर औंधा गिरा हुआ पड़ा था तो कहने लगा काश मै अपने परवरदिगार का किसी को शरीक न बनाता
43وَلَمْ تَكُن لَّهُ فِئَةٌ يَنصُرُونَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَمَا كَانَ مُنتَصِرًا
और ख़ुदा के सिवा उसका कोई जत्था भी न था कि उसकी मदद करता और न वह बदला ले सकता था इसी जगह से (साबित हो गया
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
41आयत

अनुवाद — अल-कहफ 41

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Wednesday, September 30, 2026

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