अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अंदाद (أنداد): समान, बराबर वाले, साझीदार। यहाँ अर्थ है कि कुछ लोग अल्लाह के साथ दूसरों को उसका समकक्ष ठहराते हैं।
- कहुब्बिल्लाह (كحُبّ الله): जैसा प्रेम अल्लाह के लिए होना चाहिए, वैसा ही प्रेम वे अपने झूठे देवताओं से करते हैं।
- अशद्दु हुब्बन (أشد حبًا): अधिक प्रबल और गहरा प्रेम।
- अल-क़ुव्वाह (القوة): पूर्ण शक्ति, सामर्थ्य और प्रभुत्व।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की स्थिति बयान कर रहा है, जो साफ़-साफ़ दलीलों और निशानियों के बावजूद अल्लाह के सिवा दूसरों को उसका समकक्ष ठहराते हैं। वे मूर्तियों, पत्थरों, या अपने बुज़ुर्गों और पसंदीदा लोगों को इस क़द्र चाहते हैं और उनका सम्मान करते हैं, जैसा कि केवल अल्लाह का हक़ है। वे उन्हें अपनी ज़िंदगी में वह दर्जा दे देते हैं जो सिर्फ़ अल्लाह को दिया जाना चाहिए — उनसे डरते हैं, उनसे उम्मीदें रखते हैं, और उनकी रज़ा को अल्लाह की रज़ा से आगे रखते हैं।
लेकिन जो लोग सच्चे मोमिन हैं, उनका अल्लाह से प्रेम इन सब से कहीं बढ़कर और गहरा होता है। क्योंकि मोमिन का दिल सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस होता है — वह उससे हर हाल में मुहब्बत रखता है, सुख में भी और दुख में भी। जबकि मुशरिकों की मुहब्बत अधूरी और कमज़ोर होती है; वे अपने देवताओं से तभी लिपटते हैं जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो, लेकिन जब मुसीबत आती है, तो वे अपने देवताओं को भूलकर सीधे अल्लाह को पुकारते हैं। यही उनकी मुहब्बत की कमज़ोरी और झूठापन है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: काश! ये ज़ालिम लोग — जिन्होंने शिर्क करके अपनी जानों पर ज़ुल्म किया — उस वक़्त को देख लेते जब वे क़यामत के दिन अज़ाब को अपनी आँखों से देखेंगे। उस दिन उन्हें साफ़ पता चल जाएगा कि सारी शक्ति, सारा ज़ोर, सारा अधिकार — सब कुछ सिर्फ़ अल्लाह ही के पास है। कोई और नहीं। और वे यह भी जान लेंगे कि अल्लाह का अज़ाब कितना सख्त और भयानक है। अगर वे यह बात आज ही समझ लेते, तो कभी अल्लाह के सिवा किसी और को पूजने के लिए न खड़े होते।
दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):
यह आयत हमें सिखाती है कि प्रेम (मुहब्बत) की सबसे उच्च और शुद्ध मंज़िल सिर्फ़ अल्लाह के लिए है। जो दिल अल्लाह की मुहब्बत से भर जाता है, वह कभी किसी और के आगे झुकता नहीं, किसी और से डरता नहीं, और किसी और से उम्मीद नहीं रखता। इस्लाम हमें यही सिखाता है कि अपने दिल को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस रखो — यही सबसे बड़ी आज़ादी है। जब इंसान अल्लाह से सच्ची मुहब्बत करता है, तो उसे हर मुश्किल में सुकून मिलता है, क्योंकि उसे यक़ीन होता है कि सारी ताक़त अल्लाह के हाथ में है। आओ, हम अपने दिलों को सिर्फ़ अल्लाह की मुहब्बत से भरें, और उसकी रज़ा को ही अपना सबसे बड़ा लक्ष्य बनाएँ — यही कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 163-167 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 165
सूरा अल-बकरा आयत 165 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो ख़ुदा के सिवा…सूरा आयत 165/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 163–167. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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