Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَبَرَّأَ: अलग होना, बरी होना, नाता तोड़ लेना।
- اتُّبِعُوا: जिनकी पैरवी की गई (नेता, बड़े, रहनुमा)।
- اتَّبَعُوا: जिन्होंने पैरवी की (अनुयायी, मातहत)।
- الْعَذَابَ: यातना, अज़ाब।
- تَقَطَّعَتْ: टूट गए, कट गए।
- الْأَسْبَابُ: वे रिश्ते और ज़रिए जो दुनिया में आपस में जोड़े हुए थे (रिश्तेदारी, दोस्ती, मोहब्बत, साझेदारी, पैरवी)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत क़यामत के दिन के उस भयानक दृश्य का वर्णन कर रही है जब सारे पर्दे उठा दिए जाएँगे और हर इंसान अपने अंजाम के सामने खड़ा होगा। उस दिन जब अज़ाब को आँखों से देख लिया जाएगा, तो वे बड़े-बड़े नेता, जिन्हें दुनिया में लोगों ने अपना रहनुमा बनाया था, और जिनकी पैरवी में लोग गुमराह हुए थे, वे अपने अनुयायियों से किनारा कर लेंगे। वे साफ़ कह देंगे कि हमारा तुमसे कोई वास्ता नहीं, हम तुम्हें नहीं जानते। जिस तरह दुनिया में वे लोगों को अपने पीछे चलने की तरग़ीब देते थे और कहते थे कि हमारी राह पर चलो, उस दिन वे उन्हीं से बरी हो जाएँगे।
इसका कारण यह होगा कि जब वे अज़ाब को सामने देख लेंगे, तो उनके होश उड़ जाएँगे और वे सिर्फ़ अपनी जान बचाने की फ़िक्र में होंगे। उस वक़्त वे सारे रिश्ते और सारे ज़रिए टूट जाएँगे जो दुनिया में उन्हें आपस में मिलाए हुए थे। दुनिया में जो रिश्तेदारी थी, दोस्ती थी, मोहब्बत थी, साझेदारी थी, या यह कहना चाहिए कि जिस बात ने उन्हें एक दूसरे से जोड़ रखा था — वह सब कुछ कट जाएगा और आपस में दुश्मनी पैदा हो जाएगी। जैसा कि दूसरी जगह क़ुरआन में बताया गया है कि उस दिन दोस्त एक दूसरे के दुश्मन बन जाएँगे, सिवाय मुत्तक़ियों के।
यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। यह हमें सचेत करती है कि आज हम जिन लोगों को अपना नेता, अपना रहनुमा, अपना हीरो बनाते हैं, और उनकी पैरवी में अपना दीन और अपनी आख़िरत बर्बाद करते हैं, क़यामत के दिन वही लोग हमें छोड़ देंगे। वे न सिर्फ़ हमारी मदद करेंगे, बल्कि हमसे बरी हो जाएँगे। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने रहनुमा सिर्फ़ अल्लाह के रसूल ﷺ को बनाएँ, और उन लोगों की पैरवी से बचें जो हमें अल्लाह की राह से भटकाते हैं।
याद रखिए, दुनिया के सारे रिश्ते और सारे ज़रिए एक दिन टूट जाने वाले हैं। सिर्फ़ अल्लाह का रिश्ता और उसकी रस्सी (क़ुरआन) को थामना ही वह ज़रिया है जो क़यामत के दिन भी काम आएगा। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को इस हक़ीक़त के मुताबिक़ ढालें, और उन कामों को करें जो उस दिन हमारे काम आएँ — नेकी, तक़वा, और अल्लाह की इबादत। यही वह रास्ता है जो हमें उस भयानक दिन की रुसवाई और अज़ाब से बचाएगा और हमें जन्नत की तरफ़ ले जाएगा।
📜 आयत 164-168 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 166
सूरा अल-बकरा आयत 166 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (वह क्या सख्त वक्त होगा) जब पेशवा लोग अपने पैरवो…सूरा आयत 166/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 164–168. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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