अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُعْجِبُكَ – तुम्हें आश्चर्यचकित करे, तुम्हारे मन को भाए।
- يُشْهِدُ اللَّهَ – अल्लाह को गवाह बनाता है, अल्लाह की क़सम खाता है।
- أَلَدُّ الْخِصَامِ – सबसे अधिक झगड़ालू, कटु विरोधी और जिद्दी।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) की एक ख़तरनाक सिफ़त बयान कर रहा है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी बातें सुनकर आप (ऐ नबी!) दंग रह जाते हैं — उनकी ज़ुबान बड़ी मीठी, अंदाज़ बड़ा भला और बयान बड़ा प्रभावशाली होता है। वे दुनिया की ज़िंदगी में अपनी बातों से लोगों को अपना ग़ुलाम बना लेते हैं। उनकी बातें सुनकर लगता है कि यह कितना नेक, सच्चा और ईमानदार इंसान है।
इससे भी बढ़कर, वे अल्लाह को गवाह बनाकर क़समें खाते हैं कि "अल्लाह गवाह है, मेरे दिल में तुम्हारे लिए सिर्फ़ मुहब्बत और ख़ैर है, मैं तो सच्चा मुसलमान हूँ।" वे अपने दिल की सच्चाई पर अल्लाह को गवाह ठहराते हैं, हालाँकि वे झूठे होते हैं। यह अल्लाह की बारगाह में सबसे बड़ी जुर्रत और बेहयाई है कि इंसान झूठी बात पर अल्लाह का नाम ले।
लेकिन हक़ीक़त यह है कि वह इंसान सबसे ज़्यादा झगड़ालू, कटु विरोधी और ज़िद्दी दुश्मन होता है। जब बात सच्चाई और इंसाफ़ की आती है, तो वह अपनी ज़ुबान से लोगों को भड़काता है, झूठे तर्क देता है और मुसलमानों से लड़ने-झगड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ता। उसकी बाहरी बातें और अंदरूनी हालत में ज़मीन-आसमान का फ़र्क़ होता है।
फ़ायदे:
- बातों से धोखा न खाएँ: यह आयत हमें सिखाती है कि किसी इंसान की मीठी बातों और ख़ूबसूरत अंदाज़ से धोखा नहीं खाना चाहिए। असली कसौटी उसका अमल और सच्चाई है, सिर्फ़ ज़ुबान नहीं।
- अल्लाह का नाम झूठ पर न लें: अल्लाह को गवाह बनाकर झूठी क़समें खाना बहुत बड़ा गुनाह है। मुसलमान को चाहिए कि अल्लाह का नाम सिर्फ़ सच्चाई पर ले।
- दिल की सफ़ाई अहम है: इस्लाम में सिर्फ़ ज़ुबान की नहीं, दिल की पाकीज़गी की भी बड़ी अहमियत है। अल्लाह हमारे दिलों का हाल जानता है, इसलिए हमें अपने दिल को सच्चाई, मुहब्बत और नेकी से भरना चाहिए।
- झगड़ालू स्वभाव से बचें: इस्लाम सिखाता है कि इंसान को नरमी, इंसाफ़ और भलाई अपनानी चाहिए। झगड़ालू और ज़िद्दी स्वभाव मुनाफ़िक़ों की निशानी है, जिससे हमें दूर रहना चाहिए।
- हर इंसान को परखने का तरीक़ा: यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इंसान को उसके कामों और सच्चाई से परखा जाए, न कि उसकी ज़ुबान की मिठास से।
📜 आयत 202-206 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 204
सूरा अल-बकरा आयत 204 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ रसूल बाज़ लोग मुनाफिक़ीन से ऐसे भी हैं जिनकी…सूरा आयत 204/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 202–206. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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