अल-बकरा · 205/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَإِذَا تَوَلَّىٰ سَعَىٰ فِي الْأَرْضِ لِيُفْسِدَ فِيهَا وَيُهْلِكَ الْحَرْثَ وَالنَّسْلَ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الْفَسَادَ ۝٢٠٥
Wa izaa tawallaa sa`aa fil ardi liyufsida feeha wa yuhlikal harsa wannasl; wallaahu laa yuhibbul fasaad
📖 हिंदी अर्थ
और जहाँ तुम्हारी मोहब्बत से मुँह फेरा तो इधर उधर दौड़ धूप करने लगा ताकि मुल्क में फ़साद फैलाए और ज़राअत (खेती बाड़ी) और मवेशी का सत्यानास करे और ख़ुदा फसाद को अच्छा नहीं समझता
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَوَلَّىٰ: मुँह मोड़ना, पीठ फेरना, अलग हो जाना।
  • سَعَىٰ: प्रयास करना, दौड़-धूप करना, भरसक कोशिश करना।
  • الْحَرْثَ: खेती, खेत, फसलें।
  • النَّسْلَ: संतान, नस्ल, मानव और पशु की औलाद।
  • الْفَسَادَ: बिगाड़, विनाश, अराजकता, नुक़सान।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुनाफ़िक़ों (दोमुंहे लोगों) के हाल का वर्णन कर रही है जो आपके सामने तो मीठी-मीठी बातें करते हैं और इस्लाम की भलाई की बात कहते हैं, लेकिन जैसे ही आपके पास से हटते हैं और उन्हें मौक़ा मिलता है, वे धरती पर बुराई फैलाने के लिए दौड़-धूप करते हैं। वे ज़मीन में इसलिए कोशिशें करते हैं कि उसमें फ़साद पैदा करें, खेतों और फसलों को तबाह कर दें, और इंसानों व जानवरों की नस्लों को ख़त्म कर दें। वे रिश्तों को तोड़ते हैं, निर्दोष लोगों का ख़ून बहाते हैं, और समाज में अराजकता फैलाते हैं।

अल्लाह तआला साफ़ फ़रमा रहा है कि वह ऐसे फ़साद और बिगाड़ को कभी पसंद नहीं करता। वह फ़साद फैलाने वालों से नफ़रत करता है और उनके इस काम पर उन्हें सज़ा देने वाला है। यह आयत मुनाफ़िक़ों की असलियत बयान करती है कि उनके दिलों में ईमान नहीं, बल्कि नफ़रत और बुराई का जज़्बा भरा हुआ है। जब वे मौक़ा पाते हैं, तो अपने असली चेहरे को ज़ाहिर कर देते हैं और धरती पर तबाही मचाते हैं।

फ़ायदे (सीख):

  1. इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इंसान का असली रूप उसके अमल से पहचाना जाता है, सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं। जो लोग दिखावे के लिए अच्छी बातें करते हैं, लेकिन उनके काम बुरे होते हैं, वे अल्लाह की नज़र में नापसंद हैं।
  2. अल्लाह तआला फ़साद और तबाही को कभी पसंद नहीं करता। इस्लाम हमेशा अमन, सुधार और भलाई का दावत देता है। हमें चाहिए कि हम ज़मीन पर इंसाफ़ और भलाई फैलाने की कोशिश करें, न कि बिगाड़ और तबाही की।
  3. खेती और नस्लों (इंसानों और जानवरों) की हिफ़ाज़त करना इस्लाम की तालीमात में शामिल है। जो लोग इन्हें तबाह करते हैं, वे अल्लाह के नापसंदीदा लोगों में से हैं।
  4. यह आयत हमें सच्चाई और ईमानदारी की तरफ़ बुलाती है कि हमारा ज़ाहिर और बातिन (अंदर और बाहर) एक जैसा हो। मुनाफ़िक़ी अल्लाह के यहाँ सबसे बुरा रवैया है।
  5. अल्लाह की मुहब्बत हासिल करने का तरीक़ा यह है कि हम फ़साद से बचें और अपनी ज़िंदगी में सुधार, भलाई और रहमत को अपनाएँ।
🎧 सुनें

📜 आयत 203-207 — अल-बकरा

203۞ وَاذْكُرُوا اللَّهَ فِي أَيَّامٍ مَّعْدُودَاتٍ ۚ فَمَن تَعَجَّلَ فِي يَوْمَيْنِ فَلَا إِثْمَ عَلَيْهِ وَمَن تَأَخَّرَ فَلَا إِثْمَ عَلَيْهِ ۚ لِمَنِ اتَّقَىٰ ۗ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعْلَمُوا أَنَّكُمْ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
और ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है (निस्फ़) और इन गिनती के चन्द दिनों तक (तो) ख़ुदा का ज़िक्र करो फिर जो शख्स जल्दी कर बैठै और (मिना) से और दो ही दिन में चल ख़ड़ा हो तो उस पर भी गुनाह नहीं है और जो (तीसरे दिन तक) ठहरा रहे उस पर भी कुछ गुनाह नही लेकिन यह रियायत उसके वास्ते है जो परहेज़गार हो, और खुदा से डरते रहो और यक़ीन जानो कि एक दिन तुम सब के सब उसकी तरफ क़ब्रों से उठाए जाओगे
204وَمِنَ النَّاسِ مَن يُعْجِبُكَ قَوْلُهُ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَيُشْهِدُ اللَّهَ عَلَىٰ مَا فِي قَلْبِهِ وَهُوَ أَلَدُّ الْخِصَامِ
ऐ रसूल बाज़ लोग मुनाफिक़ीन से ऐसे भी हैं जिनकी चिकनी चुपड़ी बातें (इस ज़रा सी) दुनयावी ज़िन्दगी में तुम्हें बहुत भाती है और वह अपनी दिली मोहब्बत पर ख़ुदा को गवाह मुक़र्रर करते हैं हालॉकि वह तुम्हारे दुश्मनों में सबसे ज्यादा झगड़ालू हैं
205وَإِذَا تَوَلَّىٰ سَعَىٰ فِي الْأَرْضِ لِيُفْسِدَ فِيهَا وَيُهْلِكَ الْحَرْثَ وَالنَّسْلَ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الْفَسَادَ
और जहाँ तुम्हारी मोहब्बत से मुँह फेरा तो इधर उधर दौड़ धूप करने लगा ताकि मुल्क में फ़साद फैलाए और ज़राअत (खेती बाड़ी) और मवेशी का सत्यानास करे और ख़ुदा फसाद को अच्छा नहीं समझता
206وَإِذَا قِيلَ لَهُ اتَّقِ اللَّهَ أَخَذَتْهُ الْعِزَّةُ بِالْإِثْمِ ۚ فَحَسْبُهُ جَهَنَّمُ ۚ وَلَبِئْسَ الْمِهَادُ
और जब कहा जाता है कि ख़ुदा से डरो तो उसे ग़ुरुर गुनाह पर उभारता है बस ऐसे कम्बख्त के लिए जहन्नुम ही काफ़ी है और बहुत ही बुरा ठिकाना है
207وَمِنَ النَّاسِ مَن يَشْرِي نَفْسَهُ ابْتِغَاءَ مَرْضَاتِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ رَءُوفٌ بِالْعِبَادِ
और लोगों में से ख़ुदा के बन्दे कुछ ऐसे हैं जो ख़ुदा की (ख़ुशनूदी) हासिल करने की ग़रज़ से अपनी जान तक बेच डालते हैं और ख़ुदा ऐसे बन्दों पर बड़ा ही यफ्क्क़त वाला है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
205आयत

अनुवाद — अल-बकरा 205

सूरा अल-बकरा आयत 205 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जहाँ तुम्हारी मोहब्बत से मुँह फेरा तो इधर उधर…

सूरा आयत 205/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 203–207. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए