Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَوَلَّىٰ: मुँह मोड़ना, पीठ फेरना, अलग हो जाना।
- سَعَىٰ: प्रयास करना, दौड़-धूप करना, भरसक कोशिश करना।
- الْحَرْثَ: खेती, खेत, फसलें।
- النَّسْلَ: संतान, नस्ल, मानव और पशु की औलाद।
- الْفَسَادَ: बिगाड़, विनाश, अराजकता, नुक़सान।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मुनाफ़िक़ों (दोमुंहे लोगों) के हाल का वर्णन कर रही है जो आपके सामने तो मीठी-मीठी बातें करते हैं और इस्लाम की भलाई की बात कहते हैं, लेकिन जैसे ही आपके पास से हटते हैं और उन्हें मौक़ा मिलता है, वे धरती पर बुराई फैलाने के लिए दौड़-धूप करते हैं। वे ज़मीन में इसलिए कोशिशें करते हैं कि उसमें फ़साद पैदा करें, खेतों और फसलों को तबाह कर दें, और इंसानों व जानवरों की नस्लों को ख़त्म कर दें। वे रिश्तों को तोड़ते हैं, निर्दोष लोगों का ख़ून बहाते हैं, और समाज में अराजकता फैलाते हैं।
अल्लाह तआला साफ़ फ़रमा रहा है कि वह ऐसे फ़साद और बिगाड़ को कभी पसंद नहीं करता। वह फ़साद फैलाने वालों से नफ़रत करता है और उनके इस काम पर उन्हें सज़ा देने वाला है। यह आयत मुनाफ़िक़ों की असलियत बयान करती है कि उनके दिलों में ईमान नहीं, बल्कि नफ़रत और बुराई का जज़्बा भरा हुआ है। जब वे मौक़ा पाते हैं, तो अपने असली चेहरे को ज़ाहिर कर देते हैं और धरती पर तबाही मचाते हैं।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इंसान का असली रूप उसके अमल से पहचाना जाता है, सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं। जो लोग दिखावे के लिए अच्छी बातें करते हैं, लेकिन उनके काम बुरे होते हैं, वे अल्लाह की नज़र में नापसंद हैं।
- अल्लाह तआला फ़साद और तबाही को कभी पसंद नहीं करता। इस्लाम हमेशा अमन, सुधार और भलाई का दावत देता है। हमें चाहिए कि हम ज़मीन पर इंसाफ़ और भलाई फैलाने की कोशिश करें, न कि बिगाड़ और तबाही की।
- खेती और नस्लों (इंसानों और जानवरों) की हिफ़ाज़त करना इस्लाम की तालीमात में शामिल है। जो लोग इन्हें तबाह करते हैं, वे अल्लाह के नापसंदीदा लोगों में से हैं।
- यह आयत हमें सच्चाई और ईमानदारी की तरफ़ बुलाती है कि हमारा ज़ाहिर और बातिन (अंदर और बाहर) एक जैसा हो। मुनाफ़िक़ी अल्लाह के यहाँ सबसे बुरा रवैया है।
- अल्लाह की मुहब्बत हासिल करने का तरीक़ा यह है कि हम फ़साद से बचें और अपनी ज़िंदगी में सुधार, भलाई और रहमत को अपनाएँ।
📜 आयत 203-207 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 205
सूरा अल-बकरा आयत 205 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जहाँ तुम्हारी मोहब्बत से मुँह फेरा तो इधर उधर…सूरा आयत 205/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 203–207. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 4, 2026
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