अल-बकरा · 23/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَإِن كُنتُمْ فِي رَيْبٍ مِّمَّا نَزَّلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا فَأْتُوا بِسُورَةٍ مِّن مِّثْلِهِ وَادْعُوا شُهَدَاءَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٢٣
Wa in kuntum fee raibim mimmaa nazzalnaa `alaa `abdinaa fatoo bi Sooratim mim mislihee wad`oo shuhadaaa`akum min doonil laahi in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम लोग इस कलाम से जो हमने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर नाज़िल किया है शक में पड़े हो पस अगर तुम सच्चे हो तो तुम (भी) एक सूरा बना लाओ और खुदा के सिवा जो भी तुम्हारे मददगार हों उनको भी बुला लो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَيْب (रैब): संदेह, शक।
  • نَزَّلْنَا (नज़्ज़लना): हमने उतारा।
  • عَبْدِنَا (अब्दिना): हमारे बंदे (अर्थात् पैगंबर मुहम्मद ﷺ)।
  • فَأْتُوا (फ़ातू): लाओ, पेश करो।
  • سُورَةٍ (सूरह): कुरआन की एक अध्याय।
  • شُهَدَاءَكُم (शुहदाअकुम): अपने गवाहों को, यहाँ अर्थ है अपने सहायकों और मददगारों को।
  • مِن دُونِ اللَّهِ (मिन दूनिल्लाह): अल्लाह के सिवा।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! अगर तुम्हें उस कुरआन के बारे में कोई संदेह है जो हमने अपने बंदे मुहम्मद ﷺ पर उतारा है, और तुम्हारा दावा है कि यह अल्लाह की ओर से नहीं बल्कि मुहम्मद ﷺ की अपनी रचना है, तो हम तुम्हें चुनौती देते हैं कि तुम भी इस जैसी एक ही सूरह लेकर आओ। चाहे वह सबसे छोटी सूरह ही क्यों न हो। और अगर तुम सच्चे हो, तो अपने सभी सहायकों, मददगारों और उन्हें बुला लो जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो, ताकि वे इस काम में तुम्हारी मदद कर सकें।

यह एक ऐतिहासिक चुनौती है जो आज तक क़ायम है। कुरआन की भाषा, उसका बलाग़त (वाक्चातुर्य), उसकी गहराई, उसका ज्ञान और उसकी सच्चाई — यह सब ऐसा है कि पूरी दुनिया की ताकतें भी इकट्ठा हो जाएँ तो भी इस जैसी एक सूरह नहीं ला सकतीं। यह चुनौती उस समय दी गई थी जब अरब के लोग भाषा और काव्य में अपने युग के सबसे आगे थे, फिर भी वे इसका मुकाबला नहीं कर सके।

यह चुनौती सिर्फ़ उस समय के लिए नहीं थी, बल्कि हर युग और हर ज़माने के लिए है। अगर कोई यह दावा करता है कि कुरआन अल्लाह की किताब नहीं है, तो उसे चाहिए कि वह इस चुनौती को स्वीकार करे और एक सूरह बना लाए। लेकिन यह कभी संभव नहीं हो सका और न ही कभी होगा।

यह चुनौती हमारे लिए एक बड़ी निशानी है कि कुरआन वाकई अल्लाह की किताब है। और जो लोग इसे मान लेते हैं और इस पर अमल करते हैं, उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी मिलती है। कुरआन वह रहनुमा किताब है जो इंसान को अंधेरों से निकालकर रोशनी की तरफ ले जाती है, उसे सच्चाई, इंसाफ़, रहमत और अच्छाई की राह दिखाती है।

आओ, हम इस चुनौती पर ग़ौर करें और कुरआन की सच्चाई को दिल से क़बूल करें, क्योंकि यही हमारी भलाई और हिदायत का ज़रिया है। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए। आमीन।



📜 आयत 21-25 — सूरा अल-बकरा

21يَا أَيُّهَا النَّاسُ اعْبُدُوا رَبَّكُمُ الَّذِي خَلَقَكُمْ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
ऐ लोगों अपने परवरदिगार की इबादत करो जिसने तुमको और उन लोगों को जो तुम से पहले थे पैदा किया है अजब नहीं तुम परहेज़गार बन जाओ
22الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ فِرَاشًا وَالسَّمَاءَ بِنَاءً وَأَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجَ بِهِ مِنَ الثَّمَرَاتِ رِزْقًا لَّكُمْ ۖ فَلَا تَجْعَلُوا لِلَّهِ أَندَادًا وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन का बिछौना और आसमान को छत बनाया और आसमान से पानी बरसाया फिर उसी ने तुम्हारे खाने के लिए बाज़ फल पैदा किए पस किसी को खुदा का हमसर न बनाओ हालाँकि तुम खूब जानते हो
23وَإِن كُنتُمْ فِي رَيْبٍ مِّمَّا نَزَّلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا فَأْتُوا بِسُورَةٍ مِّن مِّثْلِهِ وَادْعُوا شُهَدَاءَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और अगर तुम लोग इस कलाम से जो हमने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर नाज़िल किया है शक में पड़े हो पस अगर तुम सच्चे हो तो तुम (भी) एक सूरा बना लाओ और खुदा के सिवा जो भी तुम्हारे मददगार हों उनको भी बुला लो
24فَإِن لَّمْ تَفْعَلُوا وَلَن تَفْعَلُوا فَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي وَقُودُهَا النَّاسُ وَالْحِجَارَةُ ۖ أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ
पस अगर तुम ये नहीं कर सकते हो और हरगिज़ नहीं कर सकोगे तो उस आग से डरो सिके ईधन आदमी और पत्थर होंगे और काफ़िरों के लिए तैयार की गई है
25وَبَشِّرِ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ كُلَّمَا رُزِقُوا مِنْهَا مِن ثَمَرَةٍ رِّزْقًا ۙ قَالُوا هَٰذَا الَّذِي رُزِقْنَا مِن قَبْلُ ۖ وَأُتُوا بِهِ مُتَشَابِهًا ۖ وَلَهُمْ فِيهَا أَزْوَاجٌ مُّطَهَّرَةٌ ۖ وَهُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक काम किए उनको (ऐ पैग़म्बर) खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए (बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरे जारी हैं जब उन्हें इन बाग़ात का कोई मेवा खाने को मिलेगा तो कहेंगे ये तो वही (मेवा है जो पहले भी हमें खाने को मिल चुका है) (क्योंकि) उन्हें मिलती जुलती सूरत व रंग के (मेवे) मिला करेंगे और बेहिश्त में उनके लिए साफ सुथरी बीवियाँ होगी और ये लोग उस बाग़ में हमेशा रहेंगे
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
23आयत

अनुवाद — अल-बकरा 23

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Tuesday, September 29, 2026

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