अल-बकरा · 24/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
فَإِن لَّمْ تَفْعَلُوا وَلَن تَفْعَلُوا فَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي وَقُودُهَا النَّاسُ وَالْحِجَارَةُ ۖ أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ ۝٢٤
Fail lam taf`aloo wa lan taf`aloo fattaqun Naaral latee waqooduhan naasu walhijaaratu u`iddat lilkaafireen
📖 हिंदी अर्थ
पस अगर तुम ये नहीं कर सकते हो और हरगिज़ नहीं कर सकोगे तो उस आग से डरो सिके ईधन आदमी और पत्थर होंगे और काफ़िरों के लिए तैयार की गई है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَمْ تَفْعَلُوا – तुमने नहीं किया
  • وَلَن تَفْعَلُوا – और तुम कभी नहीं कर पाओगे
  • فَاتَّقُوا النَّارَ – तो आग से बचो (अर्थात ईमान लाओ और अल्लाह की आज्ञा का पालन करो)
  • وَقُودُهَا – उसका ईंधन
  • أُعِدَّتْ – तैयार की गई है

विस्तृत तफसीर:

अल्लाह तआला ने पिछली आयत में काफिरों को चुनौती दी थी कि यदि तुम्हें संदेह है कि यह क़ुरआन अल्लाह का कलाम है, तो इस जैसी एक ही सूरा ले आओ। अब इस आयत में फ़रमाया जा रहा है कि यदि तुम ऐसा नहीं कर सके – और तुम आगे भी कभी नहीं कर पाओगे – क्योंकि यह अल्लाह की ओर से उतारा गया कलाम है, जिसकी मिसाल लाना मानव शक्ति से बाहर है। यह एक ऐतिहासिक चुनौती है जो क़ियामत तक क़ायम रहेगी।

जब तुम इस नाज़िल किए गए क़ुरआन की मिसाल लाने से असमर्थ हो, तो उस आग से बचो जिसका ईंधन लोग और पत्थर हैं। यानी उस जहन्नम की आग जिसे अल्लाह ने काफिरों के लिए तैयार किया है। उस आग का ईंधन वही लोग होंगे जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया, और पत्थर – जिनमें विशेष रूप से गंधक (सल्फर) के पत्थर शामिल हैं, जो सबसे अधिक जलने वाले होते हैं। कुछ मुफस्सिरों ने कहा है कि इसका मतलब उन मूर्तियों के पत्थर हैं जिन्हें काफिर अल्लाह के सिवा पूजते थे – वही पत्थर उनकी आग का ईंधन बनेंगे, और यह उनके लिए बड़ी रुसवाई की बात होगी कि जिन्हें वे दुनिया में पूजते थे, वही आख़िरत में उन्हें जलाएंगे।

यह आग काफिरों के लिए तैयार की गई है – यानी उन लोगों के लिए जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का इनकार किया। यह आग उन्हीं के लिए है, चाहे वे कितने भी ताकतवर, अमीर या बड़े क्यों न हों।

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने बंदों को डराया है ताकि वे ईमान लाएं और अपने कुफ्र से तौबा करें। यह अल्लाह की रहमत का पहलू है कि वह अपने बंदों को आग की सज़ा से डराकर उन्हें ईमान की तरफ बुलाता है। जो लोग इस चेतावनी से सबक़ हासिल कर लें, वे सफल हैं; और जो इसे नज़रअंदाज़ करें, वे अपने नुक़सान के ज़िम्मेदार होंगे।

इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि अल्लाह का कलाम सच्चा है, और उसकी चेतावनियाँ भी सच्ची हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की आज्ञा का पालन करें, उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाएं, और उस आग से बचने का रास्ता अपनाएं – जो सिर्फ ईमान और नेक अमल है। अल्लाह हम सबको जहन्नम की आग से बचाए और जन्नत की राह दिखाए। आमीन।



📜 आयत 22-26 — सूरा अल-बकरा

22الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ فِرَاشًا وَالسَّمَاءَ بِنَاءً وَأَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجَ بِهِ مِنَ الثَّمَرَاتِ رِزْقًا لَّكُمْ ۖ فَلَا تَجْعَلُوا لِلَّهِ أَندَادًا وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन का बिछौना और आसमान को छत बनाया और आसमान से पानी बरसाया फिर उसी ने तुम्हारे खाने के लिए बाज़ फल पैदा किए पस किसी को खुदा का हमसर न बनाओ हालाँकि तुम खूब जानते हो
23وَإِن كُنتُمْ فِي رَيْبٍ مِّمَّا نَزَّلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا فَأْتُوا بِسُورَةٍ مِّن مِّثْلِهِ وَادْعُوا شُهَدَاءَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और अगर तुम लोग इस कलाम से जो हमने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर नाज़िल किया है शक में पड़े हो पस अगर तुम सच्चे हो तो तुम (भी) एक सूरा बना लाओ और खुदा के सिवा जो भी तुम्हारे मददगार हों उनको भी बुला लो
24فَإِن لَّمْ تَفْعَلُوا وَلَن تَفْعَلُوا فَاتَّقُوا النَّارَ الَّتِي وَقُودُهَا النَّاسُ وَالْحِجَارَةُ ۖ أُعِدَّتْ لِلْكَافِرِينَ
पस अगर तुम ये नहीं कर सकते हो और हरगिज़ नहीं कर सकोगे तो उस आग से डरो सिके ईधन आदमी और पत्थर होंगे और काफ़िरों के लिए तैयार की गई है
25وَبَشِّرِ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ كُلَّمَا رُزِقُوا مِنْهَا مِن ثَمَرَةٍ رِّزْقًا ۙ قَالُوا هَٰذَا الَّذِي رُزِقْنَا مِن قَبْلُ ۖ وَأُتُوا بِهِ مُتَشَابِهًا ۖ وَلَهُمْ فِيهَا أَزْوَاجٌ مُّطَهَّرَةٌ ۖ وَهُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक काम किए उनको (ऐ पैग़म्बर) खुशख़बरी दे दो कि उनके लिए (बेहिश्त के) वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरे जारी हैं जब उन्हें इन बाग़ात का कोई मेवा खाने को मिलेगा तो कहेंगे ये तो वही (मेवा है जो पहले भी हमें खाने को मिल चुका है) (क्योंकि) उन्हें मिलती जुलती सूरत व रंग के (मेवे) मिला करेंगे और बेहिश्त में उनके लिए साफ सुथरी बीवियाँ होगी और ये लोग उस बाग़ में हमेशा रहेंगे
26۞ إِنَّ اللَّهَ لَا يَسْتَحْيِي أَن يَضْرِبَ مَثَلًا مَّا بَعُوضَةً فَمَا فَوْقَهَا ۚ فَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا فَيَعْلَمُونَ أَنَّهُ الْحَقُّ مِن رَّبِّهِمْ ۖ وَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَيَقُولُونَ مَاذَا أَرَادَ اللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلًا ۘ يُضِلُّ بِهِ كَثِيرًا وَيَهْدِي بِهِ كَثِيرًا ۚ وَمَا يُضِلُّ بِهِ إِلَّا الْفَاسِقِينَ
बेशक खुदा मच्छर या उससे भी बढ़कर (हक़ीर चीज़) की कोई मिसाल बयान करने में नहीं झेंपता पस जो लोग ईमान ला चुके हैं वह तो ये यक़ीन जानते हैं कि ये (मिसाल) बिल्कुल ठीक है और ये परवरदिगार की तरफ़ से है (अब रहे) वह लोग जो काफ़िर है पस वह बोल उठते हैं कि खुदा का उस मिसाल से क्या मतलब है, ऐसी मिसाल से ख़ुदा बहुतेरों की हिदायत करता है मगर गुमराही में छोड़ता भी है तो ऐसे बदकारों को
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अनुवाद — अल-बकरा 24

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सूरा आयत 24/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

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