Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَمْ تَفْعَلُوا – तुमने नहीं किया
- وَلَن تَفْعَلُوا – और तुम कभी नहीं कर पाओगे
- فَاتَّقُوا النَّارَ – तो आग से बचो (अर्थात ईमान लाओ और अल्लाह की आज्ञा का पालन करो)
- وَقُودُهَا – उसका ईंधन
- أُعِدَّتْ – तैयार की गई है
विस्तृत तफसीर:
अल्लाह तआला ने पिछली आयत में काफिरों को चुनौती दी थी कि यदि तुम्हें संदेह है कि यह क़ुरआन अल्लाह का कलाम है, तो इस जैसी एक ही सूरा ले आओ। अब इस आयत में फ़रमाया जा रहा है कि यदि तुम ऐसा नहीं कर सके – और तुम आगे भी कभी नहीं कर पाओगे – क्योंकि यह अल्लाह की ओर से उतारा गया कलाम है, जिसकी मिसाल लाना मानव शक्ति से बाहर है। यह एक ऐतिहासिक चुनौती है जो क़ियामत तक क़ायम रहेगी।
जब तुम इस नाज़िल किए गए क़ुरआन की मिसाल लाने से असमर्थ हो, तो उस आग से बचो जिसका ईंधन लोग और पत्थर हैं। यानी उस जहन्नम की आग जिसे अल्लाह ने काफिरों के लिए तैयार किया है। उस आग का ईंधन वही लोग होंगे जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया, और पत्थर – जिनमें विशेष रूप से गंधक (सल्फर) के पत्थर शामिल हैं, जो सबसे अधिक जलने वाले होते हैं। कुछ मुफस्सिरों ने कहा है कि इसका मतलब उन मूर्तियों के पत्थर हैं जिन्हें काफिर अल्लाह के सिवा पूजते थे – वही पत्थर उनकी आग का ईंधन बनेंगे, और यह उनके लिए बड़ी रुसवाई की बात होगी कि जिन्हें वे दुनिया में पूजते थे, वही आख़िरत में उन्हें जलाएंगे।
यह आग काफिरों के लिए तैयार की गई है – यानी उन लोगों के लिए जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का इनकार किया। यह आग उन्हीं के लिए है, चाहे वे कितने भी ताकतवर, अमीर या बड़े क्यों न हों।
इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने बंदों को डराया है ताकि वे ईमान लाएं और अपने कुफ्र से तौबा करें। यह अल्लाह की रहमत का पहलू है कि वह अपने बंदों को आग की सज़ा से डराकर उन्हें ईमान की तरफ बुलाता है। जो लोग इस चेतावनी से सबक़ हासिल कर लें, वे सफल हैं; और जो इसे नज़रअंदाज़ करें, वे अपने नुक़सान के ज़िम्मेदार होंगे।
इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि अल्लाह का कलाम सच्चा है, और उसकी चेतावनियाँ भी सच्ची हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की आज्ञा का पालन करें, उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाएं, और उस आग से बचने का रास्ता अपनाएं – जो सिर्फ ईमान और नेक अमल है। अल्लाह हम सबको जहन्नम की आग से बचाए और जन्नत की राह दिखाए। आमीन।
📜 आयत 22-26 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 24
सूरा अल-बकरा आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : पस अगर तुम ये नहीं कर सकते हो और हरगिज़…सूरा आयत 24/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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