Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُؤْمِنُونَ: विश्वास करते हैं, दिल से स्वीकार करते हैं और उस पर अमल करते हैं।
- بِالْغَيْبِ: उन चीज़ों पर जो आँखों से दिखाई न दें और इंद्रियों से महसूस न हों, जैसे अल्लाह, फ़रिश्ते, जन्नत, जहन्नम, क़यामत का दिन आदि।
- يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ: नमाज़ को उसके सही तरीके, समय, रुक्न (अर्कान) और शर्तों के साथ पूरी तरह अदा करते हैं।
- رَزَقْنَاهُمْ: हमने उन्हें दिया — यानी माल, दौलत, और दूसरी नेअमतें जो अल्लाह ने उन्हें प्रदान कीं।
- يُنفِقُونَ: खर्च करते हैं — अल्लाह की राह में, ज़कात और दान के रूप में।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के गुण बयान करती है जिनका ज़िक्र पिछली आयत में किया गया था। ऐसे लोग वे हैं जो ग़ैब (अदृश्य) पर ईमान लाते हैं — यानी वे उन चीज़ों को सच मानते हैं जो उनकी आँखों से ओझल हैं, लेकिन अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उनके बारे में बताया है। यह ईमान सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं, बल्कि दिल की गहराई से होता है, और इसका असर उनके अमल में नज़र आता है।
फिर उनका दूसरा गुण यह है कि वे नमाज़ की पाबंदी करते हैं — यानी नमाज़ को उसके निर्धारित समय पर, पूरी शर्तों, अरकान और सुन्नतों के साथ अदा करते हैं। नमाज़ सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि उनके दिल को अल्लाह से जोड़ने का ज़रिया होती है, और वे इसे नियमित रूप से क़ायम करते हैं।
तीसरा गुण यह है कि वे अल्लाह की दी हुई रोज़ी में से खर्च करते हैं — यानी जो माल और नेअमतें अल्लाह ने उन्हें दी हैं, उनमें से वे दूसरों की मदद करते हैं। इसमें फ़र्ज़ ज़कात भी शामिल है और नफ़्ली सदक़ा भी। वे जानते हैं कि यह सब अल्लाह की देन है, इसलिए उसी की राह में खर्च करना उनका कर्तव्य समझते हैं।
फ़ायदे (सीख):
- ईमान का असली मतलब — सिर्फ़ अल्लाह पर यक़ीन करना काफ़ी नहीं, बल्कि उसकी बताई हुई हर चीज़ (ग़ैब) पर दिल से ईमान लाना ज़रूरी है, चाहे वह हमारी समझ से परे ही क्यों न हो।
- नमाज़ की अहमियत — नमाज़ ईमान की पहचान है। जो इसे पूरी तरह क़ायम करता है, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह बुराइयों से दूर रहता है।
- खर्च करने की बरकत — अल्लाह की दी हुई नेअमतों में से दूसरों के लिए खर्च करना न सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा का ज़रिया है, बल्कि इससे माल में बरकत भी होती है और समाज में भाईचारा बढ़ता है।
- तीनों गुणों का जुड़ाव — ईमान, नमाज़ और खर्च — ये तीनों एक साथ मिलकर इंसान को पूर्ण मुत्तक़ी बनाते हैं। जिसके पास ये तीनों गुण हों, वही सच्चा मोमिन है और अल्लाह की रहमत का हक़दार है।
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 3
सूरा अल-बकरा आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो ग़ैब पर ईमान लाते हैं और (पाबन्दी से) नमाज़…सूरा आयत 3/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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