Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُؤْمِنُونَ: विश्वास करते हैं, दृढ़ ईमान रखते हैं।
- بِمَا أُنزِلَ إِلَيْكَ: जो कुछ आप (ऐ नबी) पर उतारा गया, अर्थात् क़ुरआन और सुन्नत (पैग़म्बर की शिक्षाएँ)।
- وَمَا أُنزِلَ مِن قَبْلِكَ: और जो कुछ आपसे पहले उतारा गया, अर्थात् तौरात, इंजील और अन्य दिव्य पुस्तकें।
- بِالْآخِرَةِ: आख़िरत (परलोक) पर, जिसमें मृत्यु के बाद का जीवन, हिसाब-किताब, जन्नत और जहन्नम शामिल हैं।
- يُوقِنُونَ: यक़ीन रखते हैं, अटल और पक्का विश्वास रखते हैं जिसमें किसी प्रकार का संदेह न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन मोमिनों की एक और ख़ूबी बयान कर रहा है, जो हिदायत पर हैं और तक़्वा की राह पर चलते हैं। ये लोग वे हैं जो उस वह़ी (प्रकाशना) पर ईमान लाते हैं जो अल्लाह ने अपने आख़िरी नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारी, यानी क़ुरआन और उसके साथ आई हुई सुन्नत पर। साथ ही, वे उन सभी किताबों और शिक्षाओं पर भी ईमान रखते हैं जो अल्लाह ने पहले के पैग़म्बरों (जैसे मूसा, ईसा, दाऊद, इब्राहीम — अलैहिमुस्सलाम) पर उतारी थीं, जैसे तौरात, ज़बूर और इंजील। वे इन सबको सच्चा मानते हैं और किसी भी पैग़म्बर या किताब के बीच फ़र्क़ नहीं करते।
इसके बाद अल्लाह उनकी एक और विशेषता बताता है: वे आख़िरत (परलोक) पर पूरा यक़ीन रखते हैं। उन्हें इस बात पर अटल विश्वास है कि मृत्यु के बाद दोबारा जीवन है, सब क़ब्रों से उठेंगे, अल्लाह के सामने हाज़िर होंगे, उनके अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब होगा, और फिर जन्नत या जहन्नम में उनका ठिकाना होगा। यह यक़ीन केवल ज़ुबानी नहीं, बल्कि दिल की गहराई से होता है, जो उनके अमल (कर्मों) पर असर डालता है — वे अच्छे काम करते हैं और बुरे कामों से बचते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि उनका हर काम देखा जा रहा है और उसका बदला मिलेगा।
फ़ायदे (उपदेश):
- ईमान का मतलब सिर्फ़ अल्लाह पर ईमान नहीं, बल्कि उसके सभी पैग़म्बरों और उन पर उतारी गई सभी किताबों पर ईमान लाना भी है। यह इस्लाम की वह ख़ूबसूरती है कि वह सभी पैग़म्बरों का सम्मान करता है और उन्हें सच्चा मानता है।
- आख़िरत पर यक़ीन इंसान की ज़िंदगी को मक़सद देता है। जब इंसान को यह विश्वास होता है कि उसके हर अच्छे और बुरे काम का हिसाब होगा, तो वह गुनाहों से दूर रहता है और नेक कामों की तरफ़ रुजू करता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान वही है जो दिल में पैदा हो और अमल पर असर डाले। जो ईमान सिर्फ़ ज़ुबान तक सीमित रहे, वह काम का नहीं।
- अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं को मिलती है जो उसकी भेजी हुई किताबों और रसूलों पर ईमान रखें और आख़िरत की तैयारी करें। यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 2-6 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 4
सूरा अल-बकरा आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो कुछ तुम पर (ऐ रसूल) और तुम से…सूरा आयत 4/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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