अल-बकरा · 2/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
ذَٰلِكَ ٱلۡكِتَٰبُ لَا رَيۡبَۛ فِيهِۛ هُدًى لِّلۡمُتَّقِينَ  ۝٢
Zaalikal Kitaabu laa raiba feeh; hudal lilmuttaqeen
📖 हिंदी अर्थ
(ये) वह किताब है। जिस (के किताबे खुदा होने) में कुछ भी शक नहीं (ये) परहेज़गारों की रहनुमा है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذَٰلِكَ (ज़ालिक): यह (इशारा दूर की ओर है, जो महानता और ऊँचाई को दर्शाता है)।
  • الْكِتَابُ (अल-किताब): यहाँ से आशय क़ुरआन करीम है।
  • لَا رَيْبَ (ला रैब): कोई संदेह नहीं, कोई शक नहीं।
  • هُدًى (हुदन): मार्गदर्शन, सीधा रास्ता दिखाने वाला।
  • لِلْمُتَّقِينَ (लिल-मुत्तक़ीन): उन लोगों के लिए जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी अवज्ञा से बचते हैं (परहेज़गार)।

विस्तृत व्याख्या:

यह क़ुरआन वह महान ग्रंथ है जिसे अल्लाह ने अपने पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ पर उतारा है। यह किताब अपनी स्पष्टता, बेमिसाल शैली और गहरे अर्थों की वजह से हर उस व्यक्ति के लिए स्पष्ट प्रमाण है जो सत्य की तलाश में है। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह अल्लाह की ओर से है—न इसके उतरने के सिलसिले में, न इसके शब्दों में, और न इसके अर्थों में। यह किसी इंसान की रचना नहीं, बल्कि सृष्टिकर्ता का कलाम है।

यह किताब सभी इंसानों के लिए मार्गदर्शन है, लेकिन इसका पूरा लाभ और हिदायत उन्हीं लोगों को मिलती है जो मुत्तक़ी हैं—यानी जो अल्लाह का भय रखते हैं, शिर्क, बड़े गुनाहों और अश्लील कामों से बचते हैं, और अल्लाह के हुक्मों को अपनाते हैं। यही लोग हैं जो इस किताब से अमल करते हैं, उस पर ग़ौर करते हैं, और उसकी रोशनी में अपनी ज़िंदगी गुज़ारते हैं। जिनके दिल साफ़ और नीयतें सच्ची होती हैं, वही इस किताब से हिदायत पाते हैं; जबकि जो लोग अहंकार और जिद में डूबे हैं, वे इससे भटक जाते हैं।


फ़ायदे (सीख):

  1. क़ुरआन में कोई संदेह नहीं—यह अल्लाह की ओर से एक अटल सत्य है। इस पर यक़ीन करना हर मुसलमान का ईमान है, और यह यक़ीन इंसान के दिल को सुकून और इत्मिनान देता है।
  2. हिदायत पाने के लिए सिर्फ़ पढ़ना काफ़ी नहीं, बल्कि तक़वा (अल्लाह का डर) ज़रूरी है। जो इंसान अल्लाह से डरता है और गुनाहों से बचता है, अल्लाह उसके दिल में समझ और नूर पैदा करता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ बरकत के लिए पढ़ने की चीज़ नहीं, बल्कि यह ज़िंदगी का नक्शा है। जो इसे अपनाएगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा।
  4. तक़वा ही वह गुण है जो इंसान को क़ुरआन की हिदायत से जोड़ता है। इसलिए हमें अपने अंदर अल्लाह का डर और उसकी रज़ा की चाहत पैदा करनी चाहिए, ताकि क़ुरआन हमारे लिए रहनुमा बने।
  5. यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन जैसी अज़ीम किताब अल्लाह की तरफ़ से है—यह हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत है। इस पर अमल करना हमारी कामयाबी की कुंजी है, और यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — अल-बकरा

1الٓمٓ 
अलीफ़ लाम मीम
2ذَٰلِكَ ٱلۡكِتَٰبُ لَا رَيۡبَۛ فِيهِۛ هُدًى لِّلۡمُتَّقِينَ 
(ये) वह किताब है। जिस (के किताबे खुदा होने) में कुछ भी शक नहीं (ये) परहेज़गारों की रहनुमा है
3ٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡغَيۡبِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ يُنفِقُونَ 
जो ग़ैब पर ईमान लाते हैं और (पाबन्दी से) नमाज़ अदा करते हैं और जो कुछ हमने उनको दिया है उसमें से (राहे खुदा में) ख़र्च करते हैं
4وَٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبۡلِكَ وَبِٱلۡأٓخِرَةِ هُمۡ يُوقِنُونَ 
और जो कुछ तुम पर (ऐ रसूल) और तुम से पहले नाज़िल किया गया है उस पर ईमान लाते हैं और वही आख़िरत का यक़ीन भी रखते हैं
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
2आयत

अनुवाद — अल-बकरा 2

सूरा आयत 2/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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