अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الصُّمّ (अस-सुम्म): बहरे, जो सुन न सकें। यहाँ उन लोगों की ओर संकेत है जो सत्य सुनने के इच्छुक नहीं।
- الدُّعَاءَ (अद-दुआ): पुकार, आवाज़, बुलावा।
- يُنذَرُونَ (युन्ज़रून): उन्हें डराया जाता है, सचेत किया जाता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप कह दीजिए कि मैं तुम्हें जिस चीज़ से डराता हूँ, वह मेरी अपनी ओर से नहीं है, बल्कि अल्लाह के उस वह़्य (प्रकाशना) के आधार पर है जो वह मुझ पर उतारता है। यह वह़्य ही कुरआन है, जो सत्य और स्पष्ट मार्गदर्शन है। मेरा काम केवल यह है कि मैं अल्लाह का संदेश पहुँचा दूँ और तुम्हें उसके अज़ाब से सावधान कर दूँ।
लेकिन अफ़सोस! ये काफ़िर लोग उस बहरे व्यक्ति की तरह हैं जो आवाज़ सुनता ही नहीं। जब उन्हें सत्य की ओर बुलाया जाता है और अल्लाह के अज़ाब से डराया जाता है, तो वे उसे सुनते हुए भी नहीं सुनते — उनके कान हैं, पर वे उनसे लाभ नहीं उठाते। उनका दिल बंद है और उनकी समझ मृत है। वे नसीहत को सुनते हैं, लेकिन उस पर विचार नहीं करते, और न ही उससे कोई सबक़ लेते हैं। यह उनकी अपनी हठधर्मिता और अहंकार का परिणाम है।
यह आयत हमें सिखाती है कि नबी का काम केवल संदेश पहुँचाना है — हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है। और यह भी कि जो व्यक्ति सत्य सुनने के लिए तैयार नहीं, उसे कोई भी बात लाभ नहीं पहुँचा सकती। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने कान और दिल खुले रखें, कुरआन की आयतों पर गहराई से विचार करें, और उन्हें सुनकर उस पर अमल करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।
अल्लाह का कुरआन हमारे लिए रहमत और शिफ़ा है — जो इसे सच्चे दिल से सुनेगा और उस पर अमल करेगा, उसके लिए यह रोशनी बनेगा, और जो इसे अनसुना कर देगा, वह अंधेरों में भटकता रहेगा।
📜 आयत 43-47 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 45
सूरा अल-अंबिया आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो बस तुम…सूरा आयत 45/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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