अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- نَفْحَةٌ – हल्का सा स्पर्श, थोड़ी सी मात्रा, ज़रा सा अंश।
- يَا وَيْلَنَا – हाय हमारी बर्बादी! (विलाप और पश्चाताप का उद्गार)
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में उन काफ़िरों और मुक़्तरिहों (जो अज़ाब के लिए जल्दी मचाते थे) की हालत बयान कर रहे हैं, जो आख़िरत के अज़ाब का मज़ाक़ उड़ाते थे और कहते थे कि यह अज़ाब कब आएगा? अल्लाह फ़रमाता है कि अगर उन्हें उस अज़ाब का ज़रा सा भी हिस्सा — यानी दुनिया में ही उसका एक बहुत हल्का सा अंश — छू जाए, तो वे तुरंत चीख़ उठेंगे: "हाय हमारी बर्बादी! बेशक हम ज़ालिम थे।"
यानी जब उन पर अज़ाब का एक छोटा सा कतरा भी पड़ता है, तो उनकी सारी शेख़ी और घमंड धूल में मिल जाता है। वे अपने किए पर पछताते हैं और अपने ज़ुल्म — यानी शिर्क और रसूल ﷺ के साथ झुठलाने — का इक़रार करते हैं। यह उनकी फ़ितरत है कि जब तक आराम में होते हैं, सरकशी करते हैं, लेकिन जैसे ही अज़ाब का ज़रा सा भी साया पड़ता है, उनकी कमज़ोरी और बेबसी ज़ाहिर हो जाती है, और वे ख़ुद अपने ऊपर इल्ज़ाम लगाते हैं।
यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने अपने रहम से हमें दुनिया में मोहलत दी है, ताकि हम अपनी ग़लतियों को सुधार लें। हमें उस दिन का इंतज़ार नहीं करना चाहिए जब अज़ाब आ जाए और पछतावा किसी काम न आए। आज ही अपने रब की तरफ़ रुजू करें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और उस रसूल ﷺ की पैरवी करें जो हमारे लिए रहमत बनकर आए। क्योंकि जब अज़ाब आ जाएगा, तो सिर्फ़ "हाय अफ़सोस" कहना होगा, और वह पुकार उस दिन किसी काम न आएगी। अल्लाह हमें उस अंधेपन से बचाए जो क़ौमों को उनके नबियों के सामने सरकश बना देता है। आमीन।
📜 आयत 44-48 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 46
सूरा अल-अंबिया आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) अगर कहीं उनको तुम्हारे परवरदिगार के अज़ाब…सूरा आयत 46/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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