अल-हज · 40/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हज
الَّذِينَ أُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِم بِغَيْرِ حَقٍّ إِلَّا أَن يَقُولُوا رَبُّنَا اللَّهُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ اللَّهِ النَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّهُدِّمَتْ صَوَامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَوَاتٌ وَمَسَاجِدُ يُذْكَرُ فِيهَا اسْمُ اللَّهِ كَثِيرًا ۗ وَلَيَنصُرَنَّ اللَّهُ مَن يَنصُرُهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ ۝٤٠
Allazeena ukhrijoo min diyaarihim bighairi haqqin illaaa any yaqooloo rabbunallaah; wa law laa daf`ul laahin naasa ba`dahum biba`dil lahuddimat sawaami`u wa biya`unw wa salawaatunw wa masaajidu yuzkaru feehasmul laahi kaseeraa; wa layansurannal laahu mai yansuruh; innal laaha la qawiyyun `Azeez
📖 हिंदी अर्थ
ये वह (मज़लूम हैं जो बेचारे) सिर्फ इतनी बात कहने पर कि हमारा परवरदिगार खुदा है (नाहक़) अपने-अपने घरों से निकाल दिए गये और अगर खुदा लोगों को एक दूसरे से दूर दफा न करता रहता तो गिरजे और यहूदियों के इबादत ख़ाने और मजूस के इबादतख़ाने और मस्जिद जिनमें कसरत से खुदा का नाम लिया जाता है कब के कब ढहा दिए गए होते और जो शख्स खुदा की मदद करेगा खुदा भी अलबत्ता उसकी मदद ज़रूर करेगा बेशक खुदा ज़रूर ज़बरदस्त ग़ालिब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَوَامِعُ (सवामेअ): ईसाई भिक्षुओं के ऊँचे स्थान या मठ, जहाँ वे इबादत के लिए एकांतवास करते थे।
  • بِيَعٌ (बीअअ): ईसाइयों के चर्च (गिरजाघर)।
  • صَلَوَاتٌ (सलवात): यहूदियों के इबादत के स्थान (जिन्हें 'सलात' या 'सलूत' कहा जाता था)।
  • مَسَاجِدُ (मसाजिद): मुसलमानों की मस्जिदें, जहाँ नमाज़ पढ़ी जाती है और अल्लाह का ज़िक्र होता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुबारक लोगों के बारे में है जिन्हें अल्लाह की राह में घरों से निकाला गया। ये वे लोग थे जिन्हें मक्का के काफ़िरों ने उनके घरों से बेदखल किया, और उनका कोई गुनाह नहीं था, सिवाय इसके कि उन्होंने कहा: "हमारा रब अल्लाह है।" यानी उनका सिर्फ़ यही 'जुर्म' था कि उन्होंने अल्लाह की वहदानियत (एकता) का इक़रार किया और उसकी इबादत को अपना लिया। यह बड़ी ज़ुल्म की बात है कि इंसान को सिर्फ़ ईमान लाने की वजह से उसके घर, उसकी ज़मीन और उसके वतन से निकाल दिया जाए।

फिर अल्लाह तआला ने एक बहुत बड़ी हिकमत (रहस्य) बयान की: अगर अल्लाह लोगों को एक-दूसरे के ज़रिए से न हटाता (यानी अच्छे लोगों को बुरे लोगों के मुक़ाबले में खड़ा न करता), तो धरती पर फ़साद फैल जाता और इबादत के सभी स्थान तबाह हो जाते — चाहे वे ईसाई भिक्षुओं के मठ हों, ईसाइयों के चर्च हों, यहूदियों के इबादतख़ाने हों, या मुसलमानों की मस्जिदें हों, जिनमें अल्लाह का नाम बहुत ज़्यादा लिया जाता है। यानी अल्लाह ने जिहाद और क़ानूनी सज़ाओं (हुदूद) को एक ढाल बनाया है, जिससे इबादत के स्थान और धार्मिक आज़ादी महफ़ूज़ रहती है। यह अल्लाह की रहमत है कि वह कुछ लोगों के ज़रिए दूसरों की बुराई को रोकता है।

इसके बाद अल्लाह तआला ने वादा किया: जो कोई अल्लाह के दीन की मदद करेगा (यानी उसके दीन को फैलाने, उसके कलाम को बुलंद करने और उसके बंदों की भलाई के लिए काम करेगा), अल्लाह ज़रूर उसकी मदद करेगा। यह एक पक्का वादा है, जो कभी नहीं टूटता। अल्लाह तआला बहुत ताक़तवर है, कोई उसे हरा नहीं सकता, और वह अज़ीज़ (प्रभावशाली) है, उसके सामने कोई टिक नहीं सकता। वह अपने दोस्तों की मदद करके उन्हें ग़ालिब बनाता है, चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर क्यों न हों।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में मुसीबतें और कुर्बानियाँ आती हैं, लेकिन अल्लाह अपने बंदों को अकेला नहीं छोड़ता। जो लोग अल्लाह के दीन के लिए उठते हैं, अल्लाह उन्हें ज़रूर नसरत (विजय) देता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी उम्मीद और हौसले की बात है। आज भी अगर हम अल्लाह के दीन की मदद करें — अपने अमल, अपने अख़लाक़, अपने माल और अपनी जान से — तो अल्लाह हमारी मदद करेगा और हमें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी देगा। यही अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता।



📜 आयत 38-42 — सूरा अल-हज

38۞ إِنَّ اللَّهَ يُدَافِعُ عَنِ الَّذِينَ آمَنُوا ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ خَوَّانٍ كَفُورٍ
और (ऐ रसूल) नेकी करने वालों को (हमेशा की) ख़ुशख़बरी दे दो इसमें शक नहीं कि खुदा ईमानवालों से कुफ्फ़ार को दूर दफा करता रहता है खुदा किसी बददयानत नाशुक्रे को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
39أُذِنَ لِلَّذِينَ يُقَاتَلُونَ بِأَنَّهُمْ ظُلِمُوا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ نَصْرِهِمْ لَقَدِيرٌ
जिन (मुसलमानों) से (कुफ्फ़ार) लड़ते थे चूँकि वह (बहुत) सताए गए उस वजह से उन्हें भी (जिहाद) की इजाज़त दे दी गई और खुदा तो उन लोगों की मदद पर यक़ीनन क़ादिर (वत वाना) है
40الَّذِينَ أُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِم بِغَيْرِ حَقٍّ إِلَّا أَن يَقُولُوا رَبُّنَا اللَّهُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ اللَّهِ النَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّهُدِّمَتْ صَوَامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَوَاتٌ وَمَسَاجِدُ يُذْكَرُ فِيهَا اسْمُ اللَّهِ كَثِيرًا ۗ وَلَيَنصُرَنَّ اللَّهُ مَن يَنصُرُهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ
ये वह (मज़लूम हैं जो बेचारे) सिर्फ इतनी बात कहने पर कि हमारा परवरदिगार खुदा है (नाहक़) अपने-अपने घरों से निकाल दिए गये और अगर खुदा लोगों को एक दूसरे से दूर दफा न करता रहता तो गिरजे और यहूदियों के इबादत ख़ाने और मजूस के इबादतख़ाने और मस्जिद जिनमें कसरत से खुदा का नाम लिया जाता है कब के कब ढहा दिए गए होते और जो शख्स खुदा की मदद करेगा खुदा भी अलबत्ता उसकी मदद ज़रूर करेगा बेशक खुदा ज़रूर ज़बरदस्त ग़ालिब है
41الَّذِينَ إِن مَّكَّنَّاهُمْ فِي الْأَرْضِ أَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوُا الزَّكَاةَ وَأَمَرُوا بِالْمَعْرُوفِ وَنَهَوْا عَنِ الْمُنكَرِ ۗ وَلِلَّهِ عَاقِبَةُ الْأُمُورِ
ये वह लोग हैं कि अगर हम इन्हें रूए ज़मीन पर क़ाबू दे दे तो भी यह लोग पाबन्दी से नमाजे अदा करेंगे और ज़कात देंगे और अच्छे-अच्छे काम का हुक्म करेंगे और बुरी बातों से (लोगों को) रोकेंगे और (यूँ तो) सब कामों का अन्जाम खुदा ही के एख्तेयार में है
42وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَثَمُودُ
और (ऐ रसूल) अगर ये (कुफ्फ़ार) तुमको झुठलाते हैं तो कोइ ताज्जुब की बात नहीं उनसे पहले नूह की क़ौम और (क़ौमे आद और समूद)
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अल-हज 40

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सूरा आयत 40/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.





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Monday, September 28, 2026

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