अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُذِنَ: अनुमति दी गई।
- يُقَاتَلُونَ: जिनसे युद्ध किया जा रहा हो (अर्थात जिन पर अत्याचार हो रहा हो)।
- ظُلِمُوا: उन पर अत्याचार किया गया।
- لَقَدِيرُ: पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला।
तफसीर (व्याख्या):
इस्लाम के प्रारंभिक काल में मुसलमानों को युद्ध की अनुमति नहीं थी, बल्कि उन्हें अत्याचार सहने और धैर्य रखने का आदेश दिया गया था। जब मक्का में काफिरों का अत्याचार अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया, और नबी ﷺ को मक्का से हिजरत करके मदीना जाना पड़ा, और इस्लाम को एक शक्ति प्राप्त हुई, तब अल्लाह ने मुसलमानों को युद्ध की अनुमति दी। यह अनुमति इसलिए दी गई क्योंकि उन पर अत्याचार किया गया था, उन्हें उनके घरों से निकाला गया था, और उनके धर्म के कारण उन्हें सताया गया था।
यह आयत इस्लाम के इतिहास में पहली आयत है जिसमें युद्ध की अनुमति दी गई। अल्लाह ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह अनुमति केवल इसलिए दी गई है क्योंकि मुसलमान मज़लूम हैं, और अल्लाह उनकी सहायता करने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है। वह चाहे तो बिना युद्ध के भी उन्हें विजय दिला सकता है, लेकिन उसकी बुद्धि और हिकमत ने यही माँगा कि मुसलमानों को जिहाद के माध्यम से परीक्षण में डाला जाए, ताकि सच्चे और झूठे लोग स्पष्ट हो जाएँ।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है, खासकर उनकी जो मज़लूम हों और अत्याचार के खिलाफ खड़े हों। यह भी सिखाती है कि जब अत्याचार अपनी हद से बढ़ जाए, तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाना और अपने अधिकारों की रक्षा करना इस्लामी शिक्षा का हिस्सा है। अल्लाह ने मुसलमानों को युद्ध की अनुमति देकर यह भी बताया कि वह उनकी मदद करेगा, चाहे वह युद्ध के माध्यम से हो या बिना युद्ध के।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की मदद उन लोगों के साथ है जो न्याय और सच्चाई पर कायम रहते हैं, चाहे उनकी संख्या कितनी भी कम क्यों न हो। अल्लाह की शक्ति असीम है, और वह अपने वादे को पूरा करने वाला है। यह आयत मुसलमानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह उनके साथ है, और उनकी मदद करेगा, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अत्याचार के खिलाफ खड़ा होना और अपने धर्म तथा अपनी इज़्ज़त की रक्षा करना एक महान कार्य है, और अल्लाह ऐसे लोगों की मदद करता है। यह आयत हमें धैर्य, साहस और अल्लाह पर भरोसा रखने की शिक्षा देती है, और यह बताती है कि अल्लाह की मदद निकट है।
📜 आयत 37-41 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 39
सूरा अल-हज आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन (मुसलमानों) से (कुफ्फ़ार) लड़ते थे चूँकि वह (बहुत) सताए…सूरा आयत 39/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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