अल-हज · 39/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हज
أُذِنَ لِلَّذِينَ يُقَاتَلُونَ بِأَنَّهُمْ ظُلِمُوا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ نَصْرِهِمْ لَقَدِيرٌ ۝٣٩
Uzina lillazeena yuqaataloona bi annahum zulimoo; wa innal laaha `alaa nasrihim la Qaderr
📖 हिंदी अर्थ
जिन (मुसलमानों) से (कुफ्फ़ार) लड़ते थे चूँकि वह (बहुत) सताए गए उस वजह से उन्हें भी (जिहाद) की इजाज़त दे दी गई और खुदा तो उन लोगों की मदद पर यक़ीनन क़ादिर (वत वाना) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُذِنَ: अनुमति दी गई।
  • يُقَاتَلُونَ: जिनसे युद्ध किया जा रहा हो (अर्थात जिन पर अत्याचार हो रहा हो)।
  • ظُلِمُوا: उन पर अत्याचार किया गया।
  • لَقَدِيرُ: पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

इस्लाम के प्रारंभिक काल में मुसलमानों को युद्ध की अनुमति नहीं थी, बल्कि उन्हें अत्याचार सहने और धैर्य रखने का आदेश दिया गया था। जब मक्का में काफिरों का अत्याचार अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया, और नबी ﷺ को मक्का से हिजरत करके मदीना जाना पड़ा, और इस्लाम को एक शक्ति प्राप्त हुई, तब अल्लाह ने मुसलमानों को युद्ध की अनुमति दी। यह अनुमति इसलिए दी गई क्योंकि उन पर अत्याचार किया गया था, उन्हें उनके घरों से निकाला गया था, और उनके धर्म के कारण उन्हें सताया गया था।

यह आयत इस्लाम के इतिहास में पहली आयत है जिसमें युद्ध की अनुमति दी गई। अल्लाह ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह अनुमति केवल इसलिए दी गई है क्योंकि मुसलमान मज़लूम हैं, और अल्लाह उनकी सहायता करने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है। वह चाहे तो बिना युद्ध के भी उन्हें विजय दिला सकता है, लेकिन उसकी बुद्धि और हिकमत ने यही माँगा कि मुसलमानों को जिहाद के माध्यम से परीक्षण में डाला जाए, ताकि सच्चे और झूठे लोग स्पष्ट हो जाएँ।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है, खासकर उनकी जो मज़लूम हों और अत्याचार के खिलाफ खड़े हों। यह भी सिखाती है कि जब अत्याचार अपनी हद से बढ़ जाए, तो उसके खिलाफ आवाज़ उठाना और अपने अधिकारों की रक्षा करना इस्लामी शिक्षा का हिस्सा है। अल्लाह ने मुसलमानों को युद्ध की अनुमति देकर यह भी बताया कि वह उनकी मदद करेगा, चाहे वह युद्ध के माध्यम से हो या बिना युद्ध के।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की मदद उन लोगों के साथ है जो न्याय और सच्चाई पर कायम रहते हैं, चाहे उनकी संख्या कितनी भी कम क्यों न हो। अल्लाह की शक्ति असीम है, और वह अपने वादे को पूरा करने वाला है। यह आयत मुसलमानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह उनके साथ है, और उनकी मदद करेगा, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अत्याचार के खिलाफ खड़ा होना और अपने धर्म तथा अपनी इज़्ज़त की रक्षा करना एक महान कार्य है, और अल्लाह ऐसे लोगों की मदद करता है। यह आयत हमें धैर्य, साहस और अल्लाह पर भरोसा रखने की शिक्षा देती है, और यह बताती है कि अल्लाह की मदद निकट है।



📜 आयत 37-41 — सूरा अल-हज

37لَن يَنَالَ اللَّهَ لُحُومُهَا وَلَا دِمَاؤُهَا وَلَٰكِن يَنَالُهُ التَّقْوَىٰ مِنكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ سَخَّرَهَا لَكُمْ لِتُكَبِّرُوا اللَّهَ عَلَىٰ مَا هَدَاكُمْ ۗ وَبَشِّرِ الْمُحْسِنِينَ
खुदा तक न तो हरगिज़ उनके गोश्त ही पहुँचेगे और न खून मगर (हाँ) उस तक तुम्हारी परहेज़गारी अलबत्ता पहुँचेगी ख़ुदा ने जानवरों को (इसलिए) यूँ तुम्हारे क़ाबू में कर दिया है ताकि जिस तरह खुदा ने तुम्हें बनाया है उसी तरह उसकी बड़ाई करो
38۞ إِنَّ اللَّهَ يُدَافِعُ عَنِ الَّذِينَ آمَنُوا ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ خَوَّانٍ كَفُورٍ
और (ऐ रसूल) नेकी करने वालों को (हमेशा की) ख़ुशख़बरी दे दो इसमें शक नहीं कि खुदा ईमानवालों से कुफ्फ़ार को दूर दफा करता रहता है खुदा किसी बददयानत नाशुक्रे को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
39أُذِنَ لِلَّذِينَ يُقَاتَلُونَ بِأَنَّهُمْ ظُلِمُوا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ نَصْرِهِمْ لَقَدِيرٌ
जिन (मुसलमानों) से (कुफ्फ़ार) लड़ते थे चूँकि वह (बहुत) सताए गए उस वजह से उन्हें भी (जिहाद) की इजाज़त दे दी गई और खुदा तो उन लोगों की मदद पर यक़ीनन क़ादिर (वत वाना) है
40الَّذِينَ أُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِم بِغَيْرِ حَقٍّ إِلَّا أَن يَقُولُوا رَبُّنَا اللَّهُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ اللَّهِ النَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّهُدِّمَتْ صَوَامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَوَاتٌ وَمَسَاجِدُ يُذْكَرُ فِيهَا اسْمُ اللَّهِ كَثِيرًا ۗ وَلَيَنصُرَنَّ اللَّهُ مَن يَنصُرُهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ
ये वह (मज़लूम हैं जो बेचारे) सिर्फ इतनी बात कहने पर कि हमारा परवरदिगार खुदा है (नाहक़) अपने-अपने घरों से निकाल दिए गये और अगर खुदा लोगों को एक दूसरे से दूर दफा न करता रहता तो गिरजे और यहूदियों के इबादत ख़ाने और मजूस के इबादतख़ाने और मस्जिद जिनमें कसरत से खुदा का नाम लिया जाता है कब के कब ढहा दिए गए होते और जो शख्स खुदा की मदद करेगा खुदा भी अलबत्ता उसकी मदद ज़रूर करेगा बेशक खुदा ज़रूर ज़बरदस्त ग़ालिब है
41الَّذِينَ إِن مَّكَّنَّاهُمْ فِي الْأَرْضِ أَقَامُوا الصَّلَاةَ وَآتَوُا الزَّكَاةَ وَأَمَرُوا بِالْمَعْرُوفِ وَنَهَوْا عَنِ الْمُنكَرِ ۗ وَلِلَّهِ عَاقِبَةُ الْأُمُورِ
ये वह लोग हैं कि अगर हम इन्हें रूए ज़मीन पर क़ाबू दे दे तो भी यह लोग पाबन्दी से नमाजे अदा करेंगे और ज़कात देंगे और अच्छे-अच्छे काम का हुक्म करेंगे और बुरी बातों से (लोगों को) रोकेंगे और (यूँ तो) सब कामों का अन्जाम खुदा ही के एख्तेयार में है
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
39आयत

अनुवाद — अल-हज 39

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Thursday, October 1, 2026

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