अन-नूर · 4/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
وَالَّذِينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَأْتُوا بِأَرْبَعَةِ شُهَدَاءَ فَاجْلِدُوهُمْ ثَمَانِينَ جَلْدَةً وَلَا تَقْبَلُوا لَهُمْ شَهَادَةً أَبَدًا ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ ۝٤
Wallazeena yarmoonal muhsanaati summa lam yaatoo bi-arba`ati shuhadaaa`a fajlidoohum samaaneena jaldatanw wa laa taqbaloo lahum shahaadatan abadaa; wa ulaaa`ika humul faasiqoon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग पाक दामन औरतों पर (ज़िना की) तोहमत लगाएँ फिर (अपने दावे पर) चार गवाह पेश न करें तो उन्हें अस्सी कोड़ें मारो और फिर (आइन्दा) कभी उनकी गवाही कुबूल न करो और (याद रखो कि) ये लोग ख़ुद बदकार हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ: पवित्र, पाकदामन और सती-साध्वी स्त्रियों पर (व्यभिचार का) आरोप लगाना।
  • جَلْدَةً: कोड़े मारना।
  • الْفَاسِقُونَ: अल्लाह की आज्ञा से बाहर निकल जाने वाले, अवज्ञाकारी लोग।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो पाकदामन, सती-साध्वी मुस्लिम महिलाओं (और इसी तरह पवित्र पुरुषों) पर बिना किसी सबूत के व्यभिचार का आरोप लगाते हैं। इस्लाम ने समाज की पवित्रता और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त के लिए बहुत सख्त क़ानून बनाया है। अगर कोई व्यक्ति किसी पाकदामन इंसान पर ऐसा आरोप लगाता है, तो उसे चार गवाह पेश करने होंगे जो उस आरोप को साबित करें। अगर वह चार गवाह नहीं ला सकता, तो उसकी सज़ा यह है:

  1. उसे अस्सी कोड़े मारे जाएँ — यह सज़ा उसकी ज़ुबान की सज़ा है, क्योंकि उसने किसी की इज़्ज़त पर हमला किया।
  2. उसकी गवाही कभी स्वीकार न की जाए — यानी अगर वह आगे कभी कोई गवाही दे, तो उसे क़बूल नहीं किया जाएगा, क्योंकि उसकी साख खत्म हो गई।
  3. उसे फ़ासिक़ (अवज्ञाकारी) कहा गया — यानी वह अल्लाह की आज्ञा से बाहर निकल गया, उसका दिल और अमल दोनों ख़राब हो गए।

यह सज़ा सिर्फ़ सज़ा नहीं है, बल्कि समाज की हिफ़ाज़त का ज़रिया है। इस्लाम चाहता है कि समाज में पाकीज़गी और भरोसा क़ायम रहे। जब कोई व्यक्ति किसी की इज़्ज़त पर हमला करता है, तो वह पूरे समाज के नैतिक ढाँचे को कमज़ोर करता है। इसलिए अल्लाह ने यह सख्त सज़ा मुक़र्रर की ताकि लोग डरें और किसी की इज़्ज़त से खिलवाड़ न करें।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़ुबान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए। किसी के बारे में बुरा गुमान करना, उस पर झूठा इल्ज़ाम लगाना — यह बहुत बड़ा गुनाह है। अल्लाह ने हमें पाकदामन लोगों की इज़्ज़त की हिफ़ाज़त का हुक्म दिया है। अगर हम किसी के बारे में कुछ कहें, तो सबूत के साथ कहें, वरना ख़ामोश रहना बेहतर है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इस्लाम में इंसान की इज़्ज़त कितनी अहम है। एक मुसलमान की इज़्ज़त इतनी पवित्र है कि उस पर झूठा इल्ज़ाम लगाना सबसे बड़े गुनाहों में से एक है। अल्लाह हमें अपनी ज़ुबान की हिफ़ाज़त करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 2-6 — अन-नूर

2الزَّانِيَةُ وَالزَّانِي فَاجْلِدُوا كُلَّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا مِائَةَ جَلْدَةٍ ۖ وَلَا تَأْخُذْكُم بِهِمَا رَأْفَةٌ فِي دِينِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ تُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ ۖ وَلْيَشْهَدْ عَذَابَهُمَا طَائِفَةٌ مِّنَ الْمُؤْمِنِينَ
़ज़िना करने वाली औरत और ज़िना करने वाले मर्द इन दोनों में से हर एक को सौ (सौ) कोडे मारो और अगर तुम ख़ुदा और रोजे अाख़िरत पर ईमान रखते हो तो हुक्मे खुदा के नाफिज़ करने में तुमको उनके बारे में किसी तरह की तरस का लिहाज़ न होने पाए और उन दोनों की सज़ा के वक्त मोमिन की एक जमाअत को मौजूद रहना चाहिए
3الزَّانِي لَا يَنكِحُ إِلَّا زَانِيَةً أَوْ مُشْرِكَةً وَالزَّانِيَةُ لَا يَنكِحُهَا إِلَّا زَانٍ أَوْ مُشْرِكٌ ۚ وَحُرِّمَ ذَٰلِكَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ
ज़िना करने वाला मर्द तो ज़िना करने वाली औरत या मुशरिका से निकाह करेगा और ज़िना करने वाली औरत भी बस ज़िना करने वाले ही मर्द या मुशरिक से निकाह करेगी और सच्चे ईमानदारों पर तो इस क़िस्म के ताल्लुक़ात हराम हैं
4وَالَّذِينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَأْتُوا بِأَرْبَعَةِ شُهَدَاءَ فَاجْلِدُوهُمْ ثَمَانِينَ جَلْدَةً وَلَا تَقْبَلُوا لَهُمْ شَهَادَةً أَبَدًا ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ
और जो लोग पाक दामन औरतों पर (ज़िना की) तोहमत लगाएँ फिर (अपने दावे पर) चार गवाह पेश न करें तो उन्हें अस्सी कोड़ें मारो और फिर (आइन्दा) कभी उनकी गवाही कुबूल न करो और (याद रखो कि) ये लोग ख़ुद बदकार हैं
5إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
मगर हाँ जिन लोगों ने उसके बाद तौबा कर ली और अपनी इसलाह की तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
6وَالَّذِينَ يَرْمُونَ أَزْوَاجَهُمْ وَلَمْ يَكُن لَّهُمْ شُهَدَاءُ إِلَّا أَنفُسُهُمْ فَشَهَادَةُ أَحَدِهِمْ أَرْبَعُ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ ۙ إِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِقِينَ
और जो लोग अपनी बीवियों पर (ज़िना) का ऐब लगाएँ और (इसके सुबूत में) अपने सिवा उनका कोई गवाह न हो तो ऐसे लोगों में से एक की गवाही चार मरतबा इस तरह होगी कि वह (हर मरतबा) ख़ुदा की क़सम खाकर बयान करे कि वह (अपने दावे में) जरुर सच्चा है
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अनुवाद — अन-नूर 4

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Tuesday, August 18, 2026

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