Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ: पवित्र, पाकदामन और सती-साध्वी स्त्रियों पर (व्यभिचार का) आरोप लगाना।
- جَلْدَةً: कोड़े मारना।
- الْفَاسِقُونَ: अल्लाह की आज्ञा से बाहर निकल जाने वाले, अवज्ञाकारी लोग।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो पाकदामन, सती-साध्वी मुस्लिम महिलाओं (और इसी तरह पवित्र पुरुषों) पर बिना किसी सबूत के व्यभिचार का आरोप लगाते हैं। इस्लाम ने समाज की पवित्रता और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त के लिए बहुत सख्त क़ानून बनाया है। अगर कोई व्यक्ति किसी पाकदामन इंसान पर ऐसा आरोप लगाता है, तो उसे चार गवाह पेश करने होंगे जो उस आरोप को साबित करें। अगर वह चार गवाह नहीं ला सकता, तो उसकी सज़ा यह है:
- उसे अस्सी कोड़े मारे जाएँ — यह सज़ा उसकी ज़ुबान की सज़ा है, क्योंकि उसने किसी की इज़्ज़त पर हमला किया।
- उसकी गवाही कभी स्वीकार न की जाए — यानी अगर वह आगे कभी कोई गवाही दे, तो उसे क़बूल नहीं किया जाएगा, क्योंकि उसकी साख खत्म हो गई।
- उसे फ़ासिक़ (अवज्ञाकारी) कहा गया — यानी वह अल्लाह की आज्ञा से बाहर निकल गया, उसका दिल और अमल दोनों ख़राब हो गए।
यह सज़ा सिर्फ़ सज़ा नहीं है, बल्कि समाज की हिफ़ाज़त का ज़रिया है। इस्लाम चाहता है कि समाज में पाकीज़गी और भरोसा क़ायम रहे। जब कोई व्यक्ति किसी की इज़्ज़त पर हमला करता है, तो वह पूरे समाज के नैतिक ढाँचे को कमज़ोर करता है। इसलिए अल्लाह ने यह सख्त सज़ा मुक़र्रर की ताकि लोग डरें और किसी की इज़्ज़त से खिलवाड़ न करें।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़ुबान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए। किसी के बारे में बुरा गुमान करना, उस पर झूठा इल्ज़ाम लगाना — यह बहुत बड़ा गुनाह है। अल्लाह ने हमें पाकदामन लोगों की इज़्ज़त की हिफ़ाज़त का हुक्म दिया है। अगर हम किसी के बारे में कुछ कहें, तो सबूत के साथ कहें, वरना ख़ामोश रहना बेहतर है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इस्लाम में इंसान की इज़्ज़त कितनी अहम है। एक मुसलमान की इज़्ज़त इतनी पवित्र है कि उस पर झूठा इल्ज़ाम लगाना सबसे बड़े गुनाहों में से एक है। अल्लाह हमें अपनी ज़ुबान की हिफ़ाज़त करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 2-6 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 4
सूरा अन-नूर आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो लोग पाक दामन औरतों पर (ज़िना की) तोहमत…सूरा आयत 4/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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