अन-नूर · 5/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝٥
Illal lazeena taaboo mim ba`di zaalika wa aslahoo fa innal laaha Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
मगर हाँ जिन लोगों ने उसके बाद तौबा कर ली और अपनी इसलाह की तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَابُوا: तौबा की, पश्चाताप किया, अपने किए पर नादिम हुए।
  • أَصْلَحُوا: अपने कर्मों को सुधार लिया, अपनी स्थिति को ठीक कर लिया।
  • غَفُورٌ: अत्यंत क्षमाशील, गुनाहों को माफ करने वाला।
  • رَّحِيمٌ: बड़ा दयालु, अपने बंदों पर रहम करने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए रहमत का दरवाज़ा खोलती है जिन्होंने पवित्र लोगों पर आरोप लगाने जैसा गंभीर गुनाह किया हो। अल्लाह तआला फरमाता है कि जो लोग इस गलती के बाद सच्चे दिल से तौबा कर लें, अपने किए पर पछताएं, और अपने अमल को सुधार लें—यानी अपनी ज़ुबान, अपने चाल-चलन और अपने पूरे हालात को नेक बना लें—तो अल्लाह उनकी तौबा कबूल करेगा और उनकी गवाही को भी मान्यता देगा।

अल्लाह ने यहाँ दो शर्तें रखी हैं: पहली तौबा (दिल से पश्चाताप) और दूसरी इस्लाह (अमल की सुधार)। यानी सिर्फ ज़ुबान से "मैंने गलती की" कहना काफी नहीं, बल्कि अपने आचरण को भी बदलना जरूरी है। जब बंदा इन दोनों शर्तों को पूरा कर लेता है, तो अल्लाह की रहमत उस पर नाज़िल होती है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का दरवाजा कभी बंद नहीं होता। चाहे गुनाह कितना ही बड़ा क्यों न हो, अल्लाह की मगफिरत उससे कहीं बड़ी है। वह ग़फूर है—माफ करने वाला, और रहीम है—दया करने वाला। उसकी रहमत उसके गज़ब से पहले है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इंसान से गलती हो सकती है, लेकिन गलती पर अड़े रहना बुरा है। जो सच्चे दिल से पलट आए, अल्लाह उसे अपनी रहमत के साये में ले लेता है। इसलिए कभी निराश न हों, अल्लाह की रहमत से मायूस न हों, क्योंकि वह हर गुनाह को माफ करने की ताकत रखता है। यही इस्लाम की खूबसूरती है—उम्मीद का दामन कभी छूटने नहीं पाता।

🎧 सुनें

📜 आयत 3-7 — अन-नूर

3الزَّانِي لَا يَنكِحُ إِلَّا زَانِيَةً أَوْ مُشْرِكَةً وَالزَّانِيَةُ لَا يَنكِحُهَا إِلَّا زَانٍ أَوْ مُشْرِكٌ ۚ وَحُرِّمَ ذَٰلِكَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ
ज़िना करने वाला मर्द तो ज़िना करने वाली औरत या मुशरिका से निकाह करेगा और ज़िना करने वाली औरत भी बस ज़िना करने वाले ही मर्द या मुशरिक से निकाह करेगी और सच्चे ईमानदारों पर तो इस क़िस्म के ताल्लुक़ात हराम हैं
4وَالَّذِينَ يَرْمُونَ الْمُحْصَنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَأْتُوا بِأَرْبَعَةِ شُهَدَاءَ فَاجْلِدُوهُمْ ثَمَانِينَ جَلْدَةً وَلَا تَقْبَلُوا لَهُمْ شَهَادَةً أَبَدًا ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَاسِقُونَ
और जो लोग पाक दामन औरतों पर (ज़िना की) तोहमत लगाएँ फिर (अपने दावे पर) चार गवाह पेश न करें तो उन्हें अस्सी कोड़ें मारो और फिर (आइन्दा) कभी उनकी गवाही कुबूल न करो और (याद रखो कि) ये लोग ख़ुद बदकार हैं
5إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
मगर हाँ जिन लोगों ने उसके बाद तौबा कर ली और अपनी इसलाह की तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
6وَالَّذِينَ يَرْمُونَ أَزْوَاجَهُمْ وَلَمْ يَكُن لَّهُمْ شُهَدَاءُ إِلَّا أَنفُسُهُمْ فَشَهَادَةُ أَحَدِهِمْ أَرْبَعُ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ ۙ إِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِقِينَ
और जो लोग अपनी बीवियों पर (ज़िना) का ऐब लगाएँ और (इसके सुबूत में) अपने सिवा उनका कोई गवाह न हो तो ऐसे लोगों में से एक की गवाही चार मरतबा इस तरह होगी कि वह (हर मरतबा) ख़ुदा की क़सम खाकर बयान करे कि वह (अपने दावे में) जरुर सच्चा है
7وَالْخَامِسَةُ أَنَّ لَعْنَتَ اللَّهِ عَلَيْهِ إِن كَانَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
और पाँचवी (मरतबा) यूँ (कहेगा) अगर वह झूट बोलता हो तो उस पर ख़ुदा की लानत
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अनुवाद — अन-नूर 5

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सूरा आयत 5/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 3–7. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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