अल-फुरकान · 33/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
وَلَا يَأْتُونَكَ بِمَثَلٍ إِلَّا جِئْنَاكَ بِالْحَقِّ وَأَحْسَنَ تَفْسِيرًا ۝٣٣
Wa laa yaatoonaka bimasainn illaa ji`naaka bilhaqqi wa ahsana tafseeraa
📖 हिंदी अर्थ
और (ये कुफ्फार) चाहे कैसी ही (अनोखी) मसल बयान करेंगे मगर हम तुम्हारे पास (उनका) बिल्कुल ठीक और निहायत उम्दा (जवाब) बयान कर देगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मतल (مَثَل): उदाहरण, दलील, आपत्ति या भ्रांति।
  • बिल-हक़ (بِالْحَقِّ): सत्य के साथ, सच्चा उत्तर।
  • अहसन तफ़सीर (أَحْسَنَ تَفْسِيرًا): सबसे अच्छा स्पष्टीकरण, सबसे उत्तम व्याख्या और खोलकर बयान करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! ये मुशरिकीन जब भी आपके पास कोई शुबहा (संदेह) या झूठी दलील लेकर आते हैं, और आपको नीचा दिखाने के लिए कोई उदाहरण पेश करते हैं, तो अल्लाह तआला आपको उसका सच्चा और स्पष्ट उत्तर देता है। वह ऐसा उत्तर देता है जो उनकी हर बात को जड़ से मिटा देता है, और उनके झूठ को बेनक़ाब कर देता है। यही अल्लाह का दिया हुआ उत्तर उनकी हर दलील से बेहतर और अधिक स्पष्ट होता है, क्योंकि यह सत्य पर आधारित होता है, जबकि उनकी बातें महज़ भ्रम और धोखे पर टिकी होती हैं।

यह आयत मुसलमानों के लिए एक बड़ी तसल्ली और इत्मिनान का पैग़ाम है कि इस्लाम का हर जवाब क़ुरआन की रोशनी में पूर्ण सत्य है। जब भी कोई शख़्स इस्लाम के ख़िलाफ़ कोई शुबहा पैदा करता है, तो अल्लाह अपने कलाम में उसका मुकम्मल हल रखता है। यही वजह है कि क़ुरआन का हर जवाब न सिर्फ़ सच्चा होता है, बल्कि उसका अंदाज़-ए-बयान भी सबसे खूबसूरत और दिलों को सुकून देने वाला होता है।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि हमें अपने ईमान पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि हमारा दीन हक़ पर क़ायम है। जब भी कोई शख़्स हमारे दीन पर एतराज़ करे, तो हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में उसका जवाब देना चाहिए। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ और उनकी उम्मत को हर ज़माने में ऐसे लोगों से बचाता आया है, और यह सिलसिला क़यामत तक जारी रहेगा। क़ुरआन का हर हर्फ़ सच्चाई का मीनार है, और जो कोई भी इसे थाम लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। यही वह किताब है जिसका हर जवाब "अहसन तफ़सीर" है — यानी सबसे उत्तम और सबसे स्पष्ट व्याख्या, जो दिलों को रौशनी देती है और सीनों को कुशादगी अता करती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 31-35 — अल-फुरकान

31وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا مِّنَ الْمُجْرِمِينَ ۗ وَكَفَىٰ بِرَبِّكَ هَادِيًا وَنَصِيرًا
और हमने (गोया ख़ुद) गुनाहगारों में से हर नबी के दुश्मन बना दिए हैं और तुम्हारा परवरदिगार हिदायत और मददगारी के लिए काफी है
32وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا نُزِّلَ عَلَيْهِ الْقُرْآنُ جُمْلَةً وَاحِدَةً ۚ كَذَٰلِكَ لِنُثَبِّتَ بِهِ فُؤَادَكَ ۖ وَرَتَّلْنَاهُ تَرْتِيلًا
और कुफ्फार कहने लगे कि उनके ऊपर (आख़िर) क़ुरान का कुल (एक ही दफा) क्यों नहीं नाज़िल किया गया (हमने) इस तरह इसलिए (नाज़िल किया) ताकि तुम्हारे दिल को तस्कीन देते रहें और हमने इसको ठहर ठहर कर नाज़िल किया
33وَلَا يَأْتُونَكَ بِمَثَلٍ إِلَّا جِئْنَاكَ بِالْحَقِّ وَأَحْسَنَ تَفْسِيرًا
और (ये कुफ्फार) चाहे कैसी ही (अनोखी) मसल बयान करेंगे मगर हम तुम्हारे पास (उनका) बिल्कुल ठीक और निहायत उम्दा (जवाब) बयान कर देगें
34الَّذِينَ يُحْشَرُونَ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ إِلَىٰ جَهَنَّمَ أُولَٰئِكَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضَلُّ سَبِيلًا
जो लोग (क़यामत के दिन) अपने अपने मोहसिनों के बल जहन्नुम में हकाए जाएगें वही लोग बदतर जगह में होगें और सब से ज्यादा राह रास्त से भटकने वाले
35وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَجَعَلْنَا مَعَهُ أَخَاهُ هَارُونَ وَزِيرًا
और अलबत्ता हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और उनके साथ उनके भाई हारुन को (उनका) वज़ीर बनाया
अल-फुरकानकुरान सूची
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अनुवाद — अल-फुरकान 33

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Tuesday, August 18, 2026

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