अल-फुरकान · 34/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
الَّذِينَ يُحْشَرُونَ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ إِلَىٰ جَهَنَّمَ أُولَٰئِكَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضَلُّ سَبِيلًا ۝٣٤
(Allazeena yuhsharoona `alaa wujoohim ilaa jahannama ulaaa`ika sharrum makaananw wa adallu sabeelaa )section
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग (क़यामत के दिन) अपने अपने मोहसिनों के बल जहन्नुम में हकाए जाएगें वही लोग बदतर जगह में होगें और सब से ज्यादा राह रास्त से भटकने वाले

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُحْشَرُونَ: एकत्र किए जाएंगे, इकट्ठा किए जाएंगे।
  • عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ: अपने चेहरों के बल (घसीटते हुए)।
  • شَرٌّ مَّكَانًا: सबसे बुरा स्थान और सबसे निकृष्ट ठिकाना।
  • أَضَلُّ سَبِيلًا: रास्ते की दृष्टि से सबसे अधिक भटका हुआ, सत्य से सबसे दूर।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन काफिरों और मुशरिकों के भयानक अंजाम को बयान करती है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के रसूल (ﷺ) और उनके लाए हुए सत्य को झुठलाया। क़ियामत के दिन उन्हें इस तरह उठाया जाएगा कि वे अपने चेहरों के बल घसीटते हुए जहन्नम की तरफ ले जाए जाएंगे। यह उनकी सबसे बड़ी रुसवाई और ज़िल्लत होगी कि जिस चेहरे को दुनिया में उन्होंने इतराते हुए उठाया था, वही चेहरा आज मिट्टी में रगड़ा जाएगा।

अल्लाह तआला फरमाता है कि यही लोग "शर्र मकानन" यानी सबसे बुरे ठिकाने वाले हैं, क्योंकि उनका ठिकाना जहन्नम है, जो आग का वह घर है जिसकी तपिश और अज़ाब का कोई अंत नहीं। और वे "अज़ल्लु सबीलन" यानी रास्ते की दृष्टि से सबसे ज्यादा भटके हुए हैं, क्योंकि उन्होंने हिदायत और सीधे रास्ते को छोड़कर कुफ्र और गुमराही का रास्ता अपनाया, जो उन्हें सिर्फ तबाही की तरफ ले जाता है।

यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में उस रास्ते को पहचानें जो अल्लाह की तरफ ले जाता है—वह रास्ता जो कुरआन और सुन्नत से मिलता है। जो लोग इस रास्ते को छोड़कर अपनी इच्छाओं और शैतान के पीछे चलते हैं, वे दुनिया में भले ही खुश दिखें, लेकिन आख़िरत में उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफीक दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो चेहरों के बल जहन्नम की तरफ घसीटे जाएंगे। आमीन।



📜 आयत 32-36 — अल-फुरकान

32وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لَوْلَا نُزِّلَ عَلَيْهِ الْقُرْآنُ جُمْلَةً وَاحِدَةً ۚ كَذَٰلِكَ لِنُثَبِّتَ بِهِ فُؤَادَكَ ۖ وَرَتَّلْنَاهُ تَرْتِيلًا
और कुफ्फार कहने लगे कि उनके ऊपर (आख़िर) क़ुरान का कुल (एक ही दफा) क्यों नहीं नाज़िल किया गया (हमने) इस तरह इसलिए (नाज़िल किया) ताकि तुम्हारे दिल को तस्कीन देते रहें और हमने इसको ठहर ठहर कर नाज़िल किया
33وَلَا يَأْتُونَكَ بِمَثَلٍ إِلَّا جِئْنَاكَ بِالْحَقِّ وَأَحْسَنَ تَفْسِيرًا
और (ये कुफ्फार) चाहे कैसी ही (अनोखी) मसल बयान करेंगे मगर हम तुम्हारे पास (उनका) बिल्कुल ठीक और निहायत उम्दा (जवाब) बयान कर देगें
34الَّذِينَ يُحْشَرُونَ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ إِلَىٰ جَهَنَّمَ أُولَٰئِكَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضَلُّ سَبِيلًا
जो लोग (क़यामत के दिन) अपने अपने मोहसिनों के बल जहन्नुम में हकाए जाएगें वही लोग बदतर जगह में होगें और सब से ज्यादा राह रास्त से भटकने वाले
35وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ وَجَعَلْنَا مَعَهُ أَخَاهُ هَارُونَ وَزِيرًا
और अलबत्ता हमने मूसा को किताब (तौरैत) अता की और उनके साथ उनके भाई हारुन को (उनका) वज़ीर बनाया
36فَقُلْنَا اذْهَبَا إِلَى الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَدَمَّرْنَاهُمْ تَدْمِيرًا
तो हमने कहा तुम दोनों उन लोगों के पास जा जो हमारी (कुदरत की) निशानियों को झुठलाते हैं जाओ (और समझाओ जब न माने) तो हमने उन्हें खूब बरबाद कर डाला
अल-फुरकानकुरान सूची
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अनुवाद — अल-फुरकान 34

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Tuesday, August 18, 2026

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