अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- جُمْلَةً وَاحِدَةً: एक साथ, एक ही बार में (जैसे तौरात, इंजील और ज़बूर उतारे गए थे)।
- لِنُثَبِّتَ بِهِ فُؤَادَكَ: ताकि इसके द्वारा हम आपके दिल को मज़बूत करें (आपके सीने को क़ुरआन के नुज़ूल से इत्मिनान और सुकून दें)।
- وَرَتَّلْنَاهُ تَرْتِيلًا: और हमने इसे थोड़ा-थोड़ा करके, स्पष्ट रूप से, अच्छी तरह समझा-समझाकर उतारा।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब काफ़िरों ने देखा कि क़ुरआन करीम एक ही बार में नाज़िल नहीं हुआ, बल्कि 23 साल की अवधि में थोड़ा-थोड़ा करके उतरा, तो उन्होंने आपत्ति जताई और कहा: "इस पैग़म्बर पर पूरा क़ुरआन एक ही बार में क्यों नहीं उतारा गया, जैसे पहले की किताबें (तौरात, इंजील, ज़बूर) एक ही बार में उतारी गई थीं?" उनका यह कहना वास्तव में एक बहाना था, क्योंकि उनका असली मक़सद सच्चाई को मानना नहीं था, बल्कि झगड़ा और इंकार करना था।
अल्लाह तआला ने इसका जवाब दिया कि हमने क़ुरआन को इसी तरह (थोड़ा-थोड़ा करके) इसलिए उतारा ताकि तुम्हारे दिल को मज़बूत किया जाए। जब भी कोई नई मुश्किल, कोई नया सवाल या कोई नई घटना पेश आती, तो उसी के अनुसार क़ुरआन की आयतें उतरतीं, जिससे पैग़म्बर ﷺ के दिल को तसल्ली होती और उनका यक़ीन और बढ़ता। यह एक बड़ी रहमत थी कि क़ुरआन धीरे-धीरे उतरा, ताकि उसे आसानी से हिफ़्ज़ (कंठस्थ) किया जा सके, उसके मायने समझे जा सकें और उस पर अमल किया जा सके।
अल्लाह ने फ़रमाया: "और हमने इसे रुक-रुक कर, स्पष्ट रूप से उतारा" यानी हमने इसे थोड़ा-थोड़ा करके, साफ़ और वाज़ेह अंदाज़ में उतारा, ताकि लोगों के लिए इसे समझना, याद करना और उस पर चलना आसान हो। यह कोई कमी नहीं, बल्कि इसी में क़ुरआन की अज़मत और हिकमत है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह का हर काम हिकमत (बुद्धिमत्ता) से भरा होता है। क़ुरआन का तदरीजी (क्रमिक) नुज़ूल हमारे लिए रहमत था, ताकि हम इसकी हर आयत को अच्छी तरह समझें, उस पर ग़ौर करें और उसे अपनी ज़िंदगी में लागू करें। यह हमें सिखाता है कि दीन को समझना और उस पर अमल करना एक मंज़िल है, जिसे हमें सब्र और हिम्मत के साथ हासिल करना है। जिस तरह अल्लाह ने पैग़म्बर ﷺ के दिल को क़ुरआन से मज़बूत किया, उसी तरह आज भी जो लोग क़ुरआन को पढ़ते हैं, समझते हैं और उस पर अमल करते हैं, अल्लाह उनके दिलों को सुकून और इत्मिनान देता है। क़ुरआन हर दौर में ज़िंदा किताब है, और जो इसे थाम लेता है, वह कभी गुमराह नहीं होता।
📜 आयत 30-34 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 32
सूरा अल-फुरकान आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कुफ्फार कहने लगे कि उनके ऊपर (आख़िर) क़ुरान का…सूरा आयत 32/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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