अन-नमल · 27/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
۞ قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقْتَ أَمْ كُنتَ مِنَ الْكَاذِبِينَ ۝٢٧
Qaala sananzuru asadaqta am kunta minal kaazibeen
📖 हिंदी अर्थ
(ग़रज़) सुलेमान ने कहा हम अभी देखते हैं कि तूने सच सच कहा या तू झूठा है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَنَنظُرُ: हम देखेंगे, अर्थात हम इस मामले की जाँच-पड़ताल करेंगे।
  • أَصَدَقْتَ: क्या तूने सच कहा?
  • مِنَ الْكَاذِبِينَ: झूठ बोलने वालों में से।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हुदहुद (पक्षी) ने सुलैमान अलैहिस्सलाम को सबा (सबा) की रानी और उसकी क़ौम के बारे में ख़बर दी, जो सूरज की पूजा करती थी, तो सुलैमान अलैहिस्सलाम ने उसकी बात को पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर लिया, बल्कि एक नबी और बादशाह होने के नाते उन्होंने पूरी सत्यता और सावधानी से काम लिया। उन्होंने हुदहुद से कहा: "हम देखेंगे और जाँच करेंगे कि तूने सच कहा है या तू झूठ बोलने वालों में से है।"

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा है कि किसी भी ख़बर को बिना सत्यापन के स्वीकार नहीं करना चाहिए, चाहे वह ख़बर कितनी भी अहम क्यों न हो। सुलैमान अलैहिस्सलाम ने हुदहुद को धमकी नहीं दी, बल्कि उसे मौका दिया कि वह अपनी बात का सबूत पेश करे। यह न्याय और सत्य की तलाश का एक बेहतरीन उदाहरण है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें हर मामले में सच्चाई की जाँच करनी चाहिए और किसी भी बात को बिना प्रमाण के नहीं मान लेना चाहिए। अल्लाह तआला हमें सच्चाई पर चलने और झूठ से बचने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 25-29 — सूरा अन-नमल

25أَلَّا يَسْجُدُوا لِلَّهِ الَّذِي يُخْرِجُ الْخَبْءَ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
तो उन्हें (इतनी सी बात भी नहीं सूझती) कि वह लोग ख़ुदा ही का सजदा क्यों नहीं करते जो आसमान और ज़मीन की पोशीदा बातों को ज़ाहिर कर देता है और तुम लोग जो कुछ छिपाकर या ज़ाहिर करके करते हो सब जानता है
26اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ ۩
अल्लाह वह है जिससे सिवा कोई माबूद नहीं वही (इतने) बड़े अर्श का मालिक है (सजदा)
27۞ قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقْتَ أَمْ كُنتَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
(ग़रज़) सुलेमान ने कहा हम अभी देखते हैं कि तूने सच सच कहा या तू झूठा है
28اذْهَب بِّكِتَابِي هَٰذَا فَأَلْقِهْ إِلَيْهِمْ ثُمَّ تَوَلَّ عَنْهُمْ فَانظُرْ مَاذَا يَرْجِعُونَ
(अच्छा) हमारा ये ख़त लेकर जा और उसको उन लोगों के सामने डाल दे फिर उन के पास से जाना फिर देखते रहना कि वह लोग अख़िर क्या जवाब देते हैं
29قَالَتْ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ إِنِّي أُلْقِيَ إِلَيَّ كِتَابٌ كَرِيمٌ
(ग़रज़) हुद हुद ने मलका के पास ख़त पहुँचा दिया तो मलका बोली ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों ये एक वाजिबुल एहतराम ख़त मेरे पास डाल दिया गया है
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अन-नमल 27

सूरा अन-नमल आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ग़रज़) सुलेमान ने कहा हम अभी देखते हैं कि तूने…

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Friday, October 2, 2026

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