अन-नमल · 26/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ ۩ ۝٢٦
Allaahu laaa ilaaha illaa Huwa Rabbul `Arshil Azeem
📖 हिंदी अर्थ
अल्लाह वह है जिससे सिवा कोई माबूद नहीं वही (इतने) बड़े अर्श का मालिक है (सजदा)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْعَرْشِ الْعَظِيمِ: अर्थात वह विशाल और महान सिंहासन, जो सारे संसार से कहीं अधिक विशाल है, और जिसे केवल अल्लाह ही जानता है। यह अल्लाह की महानता और उसके प्रभुत्व का प्रतीक है।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला अपनी महानता और एकता का वर्णन कर रहे हैं। यहाँ बताया गया है कि अल्लाह ही सच्चा माबूद (पूज्य) है, उसके अलावा कोई भी इबादत के योग्य नहीं है। वही इस पूरे ब्रह्मांड का पालनहार है, और वही उस महान सिंहासन (अर्श) का स्वामी है, जो उसकी कुदरत और अज़मत की निशानी है।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची इबादत और सजदा केवल अल्लाह के लिए है। शैतान इंसान को अल्लाह की इबादत से रोकने की कोशिश करता है, जैसा कि हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के समय में बिल्क़ीस (सबा की रानी) की क़ौम के साथ हुआ, जब शैतान ने उन्हें सूरज की पूजा पर बहकाया था। लेकिन सच्चाई यह है कि अल्लाह ही है जो आसमान और ज़मीन के छिपे हुए राज़ जानता है, जो बारिश उतारता है, पेड़-पौधे उगाता है, और हर इंसान के दिल के हाल से वाक़िफ़ है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी वहदानियत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम इस आयत को पढ़ते हैं, तो हमें याद आता है कि इस कायनात का मालिक कोई और नहीं, बल्कि अल्लाह ही है। उसका अर्श (सिंहासन) इतना विशाल है कि उसकी हमारी कल्पना से भी परे है। यह हमारे दिलों में अल्लाह की महानता का खौफ़ और उसकी मुहब्बत पैदा करता है। जब हम सजदे में जाते हैं, तो हमें यक़ीन होना चाहिए कि हम उस सर्वशक्तिमान के सामने झुक रहे हैं, जो सब कुछ कर सकता है, जो हमारी हर ज़रूरत को पूरा कर सकता है, और जो हमारी हर दुआ सुनता है। यही सच्ची कामयाबी है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए समर्पित कर दें।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — अन-नमल

24وَجَدتُّهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ مِن دُونِ اللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ الشَّيْطَانُ أَعْمَالَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ السَّبِيلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُونَ
मैने खुद मलका को देखा और उसकी क़ौम को देखा कि वह लोग ख़ुदा को छोड़कर आफताब को सजदा करते हैं शैतान ने उनकी करतूतों को (उनकी नज़र में) अच्छा कर दिखाया है और उनको राहे रास्त से रोक रखा है
25أَلَّا يَسْجُدُوا لِلَّهِ الَّذِي يُخْرِجُ الْخَبْءَ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
तो उन्हें (इतनी सी बात भी नहीं सूझती) कि वह लोग ख़ुदा ही का सजदा क्यों नहीं करते जो आसमान और ज़मीन की पोशीदा बातों को ज़ाहिर कर देता है और तुम लोग जो कुछ छिपाकर या ज़ाहिर करके करते हो सब जानता है
26اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ ۩
अल्लाह वह है जिससे सिवा कोई माबूद नहीं वही (इतने) बड़े अर्श का मालिक है (सजदा)
27۞ قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقْتَ أَمْ كُنتَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
(ग़रज़) सुलेमान ने कहा हम अभी देखते हैं कि तूने सच सच कहा या तू झूठा है
28اذْهَب بِّكِتَابِي هَٰذَا فَأَلْقِهْ إِلَيْهِمْ ثُمَّ تَوَلَّ عَنْهُمْ فَانظُرْ مَاذَا يَرْجِعُونَ
(अच्छा) हमारा ये ख़त लेकर जा और उसको उन लोगों के सामने डाल दे फिर उन के पास से जाना फिर देखते रहना कि वह लोग अख़िर क्या जवाब देते हैं
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अनुवाद — अन-नमल 26

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Tuesday, August 18, 2026

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