अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْعَرْشِ الْعَظِيمِ: अर्थात वह विशाल और महान सिंहासन, जो सारे संसार से कहीं अधिक विशाल है, और जिसे केवल अल्लाह ही जानता है। यह अल्लाह की महानता और उसके प्रभुत्व का प्रतीक है।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला अपनी महानता और एकता का वर्णन कर रहे हैं। यहाँ बताया गया है कि अल्लाह ही सच्चा माबूद (पूज्य) है, उसके अलावा कोई भी इबादत के योग्य नहीं है। वही इस पूरे ब्रह्मांड का पालनहार है, और वही उस महान सिंहासन (अर्श) का स्वामी है, जो उसकी कुदरत और अज़मत की निशानी है।
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची इबादत और सजदा केवल अल्लाह के लिए है। शैतान इंसान को अल्लाह की इबादत से रोकने की कोशिश करता है, जैसा कि हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के समय में बिल्क़ीस (सबा की रानी) की क़ौम के साथ हुआ, जब शैतान ने उन्हें सूरज की पूजा पर बहकाया था। लेकिन सच्चाई यह है कि अल्लाह ही है जो आसमान और ज़मीन के छिपे हुए राज़ जानता है, जो बारिश उतारता है, पेड़-पौधे उगाता है, और हर इंसान के दिल के हाल से वाक़िफ़ है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी वहदानियत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम इस आयत को पढ़ते हैं, तो हमें याद आता है कि इस कायनात का मालिक कोई और नहीं, बल्कि अल्लाह ही है। उसका अर्श (सिंहासन) इतना विशाल है कि उसकी हमारी कल्पना से भी परे है। यह हमारे दिलों में अल्लाह की महानता का खौफ़ और उसकी मुहब्बत पैदा करता है। जब हम सजदे में जाते हैं, तो हमें यक़ीन होना चाहिए कि हम उस सर्वशक्तिमान के सामने झुक रहे हैं, जो सब कुछ कर सकता है, जो हमारी हर ज़रूरत को पूरा कर सकता है, और जो हमारी हर दुआ सुनता है। यही सच्ची कामयाबी है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए समर्पित कर दें।
📜 आयत 24-28 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 26
सूरा अन-नमल आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अल्लाह वह है जिससे सिवा कोई माबूद नहीं वही (इतने)…सूरा आयत 26/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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