अन-नमल · 52/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
فَتِلْكَ بُيُوتُهُمْ خَاوِيَةً بِمَا ظَلَمُوا ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ ۝٥٢
Fatilka buyootuhum khaa wiyatam bimaa zalamoo; inna fee zaalika la Aayatal liqaw miny-ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
ये बस उनके घर हैं कि उनकी नाफरमानियों की वज़ह से ख़ाली वीरान पड़े हैं इसमे शक नही कि उस वाक़िये में वाक़िफ कार लोगों के लिए बड़ी इबरत है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ख़ावियतन (خَاوِيَةً) — खाली, वीरान, बर्बाद
  • बिमा ज़लमू (بِمَا ظَلَمُوا) — उनके ज़ुल्म की वजह से, उनके अत्याचार के कारण
  • आयतन (آيَةً) — निशानी, सबक, सीख
  • यक़लमून (يَعْلَمُونَ) — जो जानते हैं, समझते हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

देखो! ये हैं वो घर जो कभी उनके जीवन की रौनक़ थे, जहाँ उनकी चहल-पहल, उनकी दौलत और उनकी शान-ओ-शौकत का साम्राज्य था। लेकिन आज वही घर खंडहर बन चुके हैं, उनकी दीवारें गिर पड़ी हैं, उनकी छतें ढह गई हैं, और वे बिल्कुल खाली और वीरान पड़े हैं। उनमें कोई बसने वाला नहीं, कोई आवाज़ देने वाला नहीं, सिर्फ़ सन्नाटा और तबाही का मंज़र है।

यह सब क्यों हुआ? इसलिए कि उन्होंने ज़ुल्म किया — अपने ऊपर ज़ुल्म किया, अपने नबी को झुठलाया, अल्लाह के साथ शिर्क किया और उसकी नाफ़रमानी में सरकशी की। उनका ज़ुल्म ही उनकी तबाही का सबब बना। जब अल्लाह का अज़ाब आया तो उन्हें ऐसे उखाड़ फेंका कि उनके घर उनके लिए क़ब्रगाह बन गए।

इसमें कोई शक नहीं कि इस वाक़िए में एक बहुत बड़ी निशानी है — एक ज़बरदस्त सबक है — उन लोगों के लिए जो जानते और समझते हैं। जो लोग अल्लाह की क़ुदरत को पहचानते हैं, जो इतिहास से सीख लेते हैं, जो आँखें खोलकर देखते हैं कि अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) कभी नहीं बदलती — जो लोग अपने नबियों को झुठलाते हैं, उनका अंजाम यही होता है।

यह सिर्फ़ एक क़ौम की कहानी नहीं है, बल्कि हर उस इंसान के लिए आईना है जो आज भी हक़ को ठुकराता है और बातिल को अपनाता है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह रहम करने वाला भी है। जो लोग सीख लेते हैं, वे अपनी ज़िंदगी को संवार लेते हैं, और जो आँखें बंद कर लेते हैं, वे उसी अंजाम की तरफ बढ़ते हैं।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह क़ुरआन का पैग़ाम है कि हम इतिहास से सबक लें। अल्लाह ने ये क़िस्से इसलिए सुनाए ताकि हम सीधे रास्ते पर चलें, उसकी इबादत करें, अपने नबी की पैरवी करें और उन लोगों की तरह न बनें जिनका अंजाम तबाही और बर्बादी थी। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अल्लाह के फरमानों को मानें और उसकी रहमत के हक़दार बनें।



📜 आयत 50-54 — सूरा अन-नमल

50وَمَكَرُوا مَكْرًا وَمَكَرْنَا مَكْرًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और उन लोगों ने एक तदबीर की और हमने भी एक तदबीर की और (हमारी तदबीर की) उनको ख़बर भी न हुई
51فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ مَكْرِهِمْ أَنَّا دَمَّرْنَاهُمْ وَقَوْمَهُمْ أَجْمَعِينَ
तो (ऐ रसूल) तुम देखो उनकी तदबीर का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ कि हमने उनको और सारी क़ौम को हलाक कर डाला
52فَتِلْكَ بُيُوتُهُمْ خَاوِيَةً بِمَا ظَلَمُوا ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
ये बस उनके घर हैं कि उनकी नाफरमानियों की वज़ह से ख़ाली वीरान पड़े हैं इसमे शक नही कि उस वाक़िये में वाक़िफ कार लोगों के लिए बड़ी इबरत है
53وَأَنجَيْنَا الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
और हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और परहेज़गार थे बचा लिया
54وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَتَأْتُونَ الْفَاحِشَةَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ
और (ऐ रसूल) लूत को (याद करो) जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि क्या तुम देखभाल कर (समझ बूझ कर) ऐसी बेहयाई करते हो
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
52आयत

अनुवाद — अन-नमल 52

सूरा अन-नमल आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये बस उनके घर हैं कि उनकी नाफरमानियों की वज़ह…

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Thursday, October 1, 2026

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