अन-नमल · 51/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ مَكْرِهِمْ أَنَّا دَمَّرْنَاهُمْ وَقَوْمَهُمْ أَجْمَعِينَ ۝٥١
Fanzur kaifa kaana `aaqibatu makrihim annaa dammar naahum wa qawmahum ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम देखो उनकी तदबीर का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ कि हमने उनको और सारी क़ौम को हलाक कर डाला

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَكْرِهِمْ: उनकी चालाकी, धोखा और साज़िश।
  • عَاقِبَةُ: अंजाम, परिणाम, जो बाद में सामने आए।
  • دَمَّرْنَاهُمْ: हमने उन्हें जड़ से उखाड़ फेंका, पूरी तरह तबाह कर दिया।
  • أَجْمَعِينَ: सबको मिलाकर, एक साथ, बिना किसी को छोड़े।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! ज़रा उन षड्यंत्रकारियों के मामले पर ग़ौर करो, जिन्होंने अपने नबी सालेह (अलैहिस्सलाम) को शहीद करने की साज़िश रची थी। उनके मकर का अंजाम देखो — उन्होंने सोचा था कि वे अपनी चालाकी से सालेह और उनके साथियों को ख़त्म कर देंगे, लेकिन अल्लाह ने उनकी सारी योजनाओं को ध्वस्त कर दिया। उनके उसी मकर ने उन्हें ही हलाक कर दिया। अल्लाह ने उन्हें और उनकी पूरी क़ौम को एक साथ ऐसे तबाह किया कि कोई बच न सका। यह सिर्फ़ एक इतिहास नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए सबक़ है जो अल्लाह के दीन को रोकने या उसके नबियों के ख़िलाफ़ साज़िश करता है।

अल्लाह का अज़ाब उन पर इस तरह आया कि उनकी सारी ताक़त, उनकी सारी चालाकियाँ और उनके सारे इंतज़ामात बेकार हो गए। जो लोग सोचते हैं कि वे अल्लाह की पकड़ से बच सकते हैं, वे बड़ी भूल में हैं। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसका फ़ैसला आने पर कोई उसे टाल नहीं सकता।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि बुराई की साज़िश करने वालों का अंजाम हमेशा बुरा होता है। चाहे वे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों, अल्लाह उन्हें उनके किए की सज़ा ज़रूर देता है। और जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, उनके लिए अल्लाह हमेशा रास्ता निकालता है। सालेह (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह ने बचा लिया, और उनके दुश्मनों को ज़मीन में इस तरह मिटा दिया कि आज उनका कोई नामो-निशान नहीं।

यह क़िस्सा हमें बताता है कि अल्लाह का दीन हमेशा बुलंद रहता है, चाहे दुश्मन कितनी भी कोशिशें कर लें। ईमान वालों को चाहिए कि वे अल्लाह पर भरोसा रखें और कभी निराश न हों, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों की मदद करता है और सच्चाई को हमेशा कामयाब करता है। यही वादा हर ज़माने में अल्लाह ने अपने नेक बंदों से किया है।



📜 आयत 49-53 — अन-नमल

49قَالُوا تَقَاسَمُوا بِاللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُ وَأَهْلَهُ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِ مَا شَهِدْنَا مَهْلِكَ أَهْلِهِ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ
कि हम लोग सालेह और उसके लड़के बालो पर शब खून करे उसके बाद उसके वाली वारिस से कह देगें कि हम लोग उनके घर वालों को हलाक़ होते वक्त मौजूद ही न थे और हम लोग तो यक़ीनन सच्चे हैं
50وَمَكَرُوا مَكْرًا وَمَكَرْنَا مَكْرًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ
और उन लोगों ने एक तदबीर की और हमने भी एक तदबीर की और (हमारी तदबीर की) उनको ख़बर भी न हुई
51فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ مَكْرِهِمْ أَنَّا دَمَّرْنَاهُمْ وَقَوْمَهُمْ أَجْمَعِينَ
तो (ऐ रसूल) तुम देखो उनकी तदबीर का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ कि हमने उनको और सारी क़ौम को हलाक कर डाला
52فَتِلْكَ بُيُوتُهُمْ خَاوِيَةً بِمَا ظَلَمُوا ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
ये बस उनके घर हैं कि उनकी नाफरमानियों की वज़ह से ख़ाली वीरान पड़े हैं इसमे शक नही कि उस वाक़िये में वाक़िफ कार लोगों के लिए बड़ी इबरत है
53وَأَنجَيْنَا الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
और हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और परहेज़गार थे बचा लिया
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अनुवाद — अन-नमल 51

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Tuesday, August 18, 2026

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