अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَنجَيْنَا: हमने बचा लिया / मुक्ति दी।
- الَّذِينَ آمَنُوا: वे लोग जो ईमान लाए।
- يَتَّقُونَ: वे लोग जो डर रखते हैं (अल्लाह का), यानी उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि जब हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम (समूद) ने हठधर्मी और कुफ्र पर अड़े रहकर अल्लाह के आदेशों को ठुकराया और अपने नबी को झुठलाया, तो उन पर अल्लाह का अज़ाब आया। लेकिन उस भयानक अज़ाब से अल्लाह ने उन लोगों को पूरी तरह महफूज़ रखा जो ईमान लाए थे और अपने ईमान के साथ तक़वा (अल्लाह का डर) भी रखते थे। यानी वे सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान नहीं कहते थे, बल्कि अपने अमल से भी अल्लाह के हुक्मों पर चलते थे और गुनाहों से बचते थे। इन्हीं में हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम और उनके साथी शामिल थे, जिन्हें अल्लाह ने उस तबाही से नजात दी।
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत और खुशखबरी है। यह सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त उन्हीं को मिलती है जो सच्चे दिल से ईमान लाएं और अपनी ज़िंदगी में तक़वा अपनाएं। तक़वा यानी अल्लाह का डर दिल में रखना, उसकी नाराज़गी से बचना और उसकी रज़ा के काम करना। जब इंसान ईमान और तक़वा को साथ रखता है, तो अल्लाह उसे हर मुसीबत से निकालने का रास्ता बनाता है, जैसे उसने सालेह अलैहिस्सलाम और उनके साथियों को बचाया।
आज भी यही रास्ता हमारे लिए कामयाबी का ज़रिया है। अगर हम चाहते हैं कि अल्लाह हमें दुनिया और आख़िरत की तकलीफों से बचाए, तो हमें अपने ईमान को अमल से मज़बूत करना होगा और तक़वा को अपनी ज़िंदगी का उसूल बनाना होगा। यही वह चीज़ है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत और उसकी पनाह के क़रीब लाती है।
📜 आयत 51-55 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 53
सूरा अन-नमल आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और…सूरा आयत 53/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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