अन-नमल · 53/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
وَأَنجَيْنَا الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ ۝٥٣
Wa anjainal lazeena aamanoo wa kaanoo yattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और परहेज़गार थे बचा लिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَنجَيْنَا: हमने बचा लिया / मुक्ति दी।
  • الَّذِينَ آمَنُوا: वे लोग जो ईमान लाए।
  • يَتَّقُونَ: वे लोग जो डर रखते हैं (अल्लाह का), यानी उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि जब हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम (समूद) ने हठधर्मी और कुफ्र पर अड़े रहकर अल्लाह के आदेशों को ठुकराया और अपने नबी को झुठलाया, तो उन पर अल्लाह का अज़ाब आया। लेकिन उस भयानक अज़ाब से अल्लाह ने उन लोगों को पूरी तरह महफूज़ रखा जो ईमान लाए थे और अपने ईमान के साथ तक़वा (अल्लाह का डर) भी रखते थे। यानी वे सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान नहीं कहते थे, बल्कि अपने अमल से भी अल्लाह के हुक्मों पर चलते थे और गुनाहों से बचते थे। इन्हीं में हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम और उनके साथी शामिल थे, जिन्हें अल्लाह ने उस तबाही से नजात दी।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत और खुशखबरी है। यह सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त उन्हीं को मिलती है जो सच्चे दिल से ईमान लाएं और अपनी ज़िंदगी में तक़वा अपनाएं। तक़वा यानी अल्लाह का डर दिल में रखना, उसकी नाराज़गी से बचना और उसकी रज़ा के काम करना। जब इंसान ईमान और तक़वा को साथ रखता है, तो अल्लाह उसे हर मुसीबत से निकालने का रास्ता बनाता है, जैसे उसने सालेह अलैहिस्सलाम और उनके साथियों को बचाया।

आज भी यही रास्ता हमारे लिए कामयाबी का ज़रिया है। अगर हम चाहते हैं कि अल्लाह हमें दुनिया और आख़िरत की तकलीफों से बचाए, तो हमें अपने ईमान को अमल से मज़बूत करना होगा और तक़वा को अपनी ज़िंदगी का उसूल बनाना होगा। यही वह चीज़ है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत और उसकी पनाह के क़रीब लाती है।



📜 आयत 51-55 — सूरा अन-नमल

51فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ مَكْرِهِمْ أَنَّا دَمَّرْنَاهُمْ وَقَوْمَهُمْ أَجْمَعِينَ
तो (ऐ रसूल) तुम देखो उनकी तदबीर का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ कि हमने उनको और सारी क़ौम को हलाक कर डाला
52فَتِلْكَ بُيُوتُهُمْ خَاوِيَةً بِمَا ظَلَمُوا ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِّقَوْمٍ يَعْلَمُونَ
ये बस उनके घर हैं कि उनकी नाफरमानियों की वज़ह से ख़ाली वीरान पड़े हैं इसमे शक नही कि उस वाक़िये में वाक़िफ कार लोगों के लिए बड़ी इबरत है
53وَأَنجَيْنَا الَّذِينَ آمَنُوا وَكَانُوا يَتَّقُونَ
और हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और परहेज़गार थे बचा लिया
54وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَتَأْتُونَ الْفَاحِشَةَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ
और (ऐ रसूल) लूत को (याद करो) जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि क्या तुम देखभाल कर (समझ बूझ कर) ऐसी बेहयाई करते हो
55أَئِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ الرِّجَالَ شَهْوَةً مِّن دُونِ النِّسَاءِ ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ تَجْهَلُونَ
क्या तुम औरतों को छोड़कर शहवत से मर्दों के आते हो (ये तुम अच्छा नहीं करते) बल्कि तुम लोग बड़ी जाहिल क़ौम हो तो लूत की क़ौम का इसके सिवा कुछ जवाब न था
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
53आयत

अनुवाद — अन-नमल 53

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Thursday, October 1, 2026

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